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इनसाइड स्टोरी/ डेरे की गाड़ी से बच्चे की मौत की शिकायत के बाद राम रहीम की निगाह में आ गए थे रामचंद्र छत्रपति

Dainik Bhaskar | Jan 18, 2019, 08:19 AM IST
-- पूरी ख़बर पढ़ें --

  • कहा जाता है कि डेरा के साथ छत्रपति की दुश्मनी यौन शोषण का मामला सामने लाने के बाद से हुई थी, लेकिन ऐसा नहीं है
  • दरअसल, 1998 में डेरे की गाड़ी से बेगू गांव में एक बच्चे की मौत हो गई, डेरे के लोगों ने पत्रकारों को धमकाया
  • पत्रकार रामचंद्र छत्रपति ने इस मामले की शिकायत पुलिस में की और केस दर्ज करवाया

Dainik Bhaskar

Jan 18, 2019, 08:19 AM IST

चंडीगढ़ (संजीव महाजन/अमित शर्मा).पत्रकार रामचंद्र छत्र‍पति की 2002 में हुई हत्या के 16 साल बाद सीबीआई कोर्ट नेगुरुवार कोडेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह समेत चार दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। आमतौर पर ऐसा कहा जाता है कि डेरा के साथ छत्रपति की दुश्मनी साध्वियों के यौन शोषण का मामला सामने लाने के बाद से हुई थी, पर ऐसा नहीं है।


दरअसल,1998 मेंडेरे की ओर से लोगों को सिरसाबस स्टैंड से डेरा लेकर आने के लिए अपने व्हीकल चलाए जाते थे। डेरे के साथ लगते गांव बेगू का एक बच्चा एक गाड़ी से एक्सीडेंट में मारा गया। इस पर बेगू गांव के लोगों ने सड़क जाम कर दी। लोगों की डिमांड थी कि डेरे पर मामला दर्ज हो। बात मीडिया में आई। इस पर डेरे के लोग भी जमा हो गए। पत्रकारों को धमकाया गया तो पुलिस में इस बारे में शिकायत दी गई। शिकायत देने वालों में रामचंद्र छत्रपति पहले नंबर पर थे।

गुरमीत सिंह के खिलाफ आवाज उठाने वालों में थे सबसे आगे

इस मामले में प्रशासन के दखल के बाद समझौता हुआ तो डेरा कमेटी ने माफी मांगी। इस पर पांच पत्रकारों की कमेटी ने साइन किए, जिसमें सबसे पहले छत्रपति थे। इस पर वे डेरे की निगाह में आ गए। 2001 में कुछ लोगों ने डेरे के खिलाफ उस समय के सीएम बंसीलाल को ज्ञापन दिया। इसमें छत्रपति ने ही लोगों की मांग को आगे रखा और ज्ञापन दिलवाया था। इस पर कार्रवाई भी हुई। इस दौरान भी छत्रपति डेरा प्रबंधन की नजर में थे। 2001 में डेरा प्रबंधन को लेकर खबरें सामने लगीं तो प्रबंधन ने छत्रपति को डराने का काम शुरू कर दिया। मई 2002 में साध्वियों की ओर से भेजी गई चिट्‌ठीसामने आई। 1998 में डेरे की ओर से पत्रकारों को डराने के बाद किसी ने इस खबर को जगह नहीं दी तो छत्रपति ने इसे प्रकाशित किया। ऐसे में अगले दिन ही छत्रपति को धमकी भरेकॉल्स आने शुरू हो गए।छत्रपति का ऑफिस रेलवे फाटक के पास दिल्ली हाईवे पर था, जहां लोगों ने बाहर आकर भी उन्हें धमकाया। इसके बाद डेरे के फाॅलोअर्स ने फतेहाबाद में, सिरसा, रतिया सहित कई जगहों पर पत्रकारों को धमकाया। चिट्‌ठी बांटने का आरोप लगा कई लोगों से अन्याय किया गया तो उन लोगों की खबरों को भी लिखा गया। इसके बाद डेरे की ओर से कोर्ट में सीबीआई इंक्वायरी को लेकर पटीशन दायरकी गई,जिसे कोर्ट ने रिजेक्ट कर दिया था। इस मामले को रामचंद्र छत्रपति ने अपने अखबार पूरा सच में लिखा। इसकेअगले ही दिन रामचंद्र को उनके घरसे बाहर बुलाकर गोली मार दी गई थी।इससे पहले आरोपी कृष्ण लाल ने तो कई बार उन्हें धमकाया था।

रामचंद्र ने पहलेही दी थी प्रशासन को शिकायत :
रामचंद्र को काफी समय पहले से ही धमकियां मिलने लगी थीं। उनकी ओर से सिरसा प्रशासन और पुलिस को शिकायत दी गई थी, लेकिन प्रशासन और पुलिस की ओर डेरा प्रमुख की पहुंच के कारण न तो कोई कार्रवाई की गई और न ही सिक्युरिटी दी गई।

पुलिस शुरू से ही रही प्रभाव में, बदले गए थे बयान : रामचंद्र छत्रपति के सबसे बड़े बेटेअंशुलछत्र‍पति ने बताया कि डेरा प्रमुख का इस कदर प्रभाव था कि पुलिस को रामचंद्र ने जो बयान अस्पताल में नोट करवाए थे, उसमें गुरमीत राम रहीम का नाम था, लेकिन उसे नहीं डाला गया। इसके बाद सीबीआई जांच के लिए कोर्ट में अपील दायर की गई थी। कोर्ट में पुलिस सब इंस्पेक्टर ने कहा था कि उस दौरान अस्पताल में कोई भी नहीं था, आईसीयू में भी कोई नहीं था। लेकिन डॉक्टर्स और हमारे बयानों में सामने आया था कि आईसीयू में डॉक्टर्स और हम वहीं थे। वहांतीन बैड लगे हुए थे।