पहल / बेंगलुरु के स्कूल में रोबोट शिक्षक बनें, बच्चों को बायोलॉजी और हिस्ट्री जैसे सब्जेक्ट्स पढ़ातें हैं

  • रोबोट सातवीं से नौवीं क्लास के छात्रों को बायोलॉजी, केमेस्ट्री, जियोग्राफी, हिस्ट्री और फिजिक्स जैसे सब्जेक्ट पढ़ाते हैं
  • इनका वजन45 किलो है, इन्हें बनाने में तीन साल का वक्त लगा
  • इनके डेवलपर का कहना है कि ये शिक्षकों की मदद के लिए बनाए गए हैं न की उन्हेंरिप्लेस करने के लिए

Dainik Bhaskar

Sep 02, 2019, 01:03 PM IST

गैजेट डेस्क. बेंगलुरु के एक प्रायवेट स्कूल में एआई तकनीक पर बेस्ड रोबोट्स बच्चों को पढ़ा रहे हैं। रोबोट्स इंसानों की तरह दिखते हैं, जो न सिर्फ बच्चों को पढ़ाते हैं, बल्कि उनके डाउट्स भी क्लीयर करते हैं। इसके डेवलपर्स का कहना है कि इनकी मौजूदगी से टीचर बच्चों की पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दे सकते हैं।

एक रोबोट की लागत 8 लाख रुपए

  1. इसके चीफ डिजाइन ऑफिसर विग्नेश राव का कहना है कि यह रोबोट सातवीं से नौवीं क्लास के 300 से ज्यादा बच्चों को पांच अलग अलग विषय पढ़ाते हैं। यह उनसे बात करते हैं साथ ही उनके द्वारा पूछे गए संबंधित विषय के सवालों का सही जवाब भी देते हैं। इन रोबोट्स को फीमेल टीचर लुक दिया गया है। एक रोबोट की लागत 8 लाख रुपए आई।

  2. राव ने बताया कि इन रोबोट्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे बच्चों से बात करते हैं और विषय से जुड़ें सवालों के जवाब दें। ये रोबोट सातवीं से नौवीं क्लास के छात्रों को बायोलॉजी, केमेस्ट्री, जियोग्राफी, हिस्ट्री और फिजिक्स जैसे सब्जेक्ट पढ़ाते हैं।

  3. राव ने बताया कि हमने तीन रोबोट को तैयार किया। हमारी टीम में 17 लोग है। इन्हें हल्के थ्री-डी प्रिंटेड मटेरियल और स्मार्ट सर्वो मोटर से बनाया गया है। इनकी मदद से यह रोबोट क्लास में पढ़ाते समय इंसान की तरह हाव-भाव देते हैं। उन्होंने बताया कि इस पहल से किसी की नौकरी नहीं जाएगी।

  4. टीम में टीचर्स, प्रोग्रामर, कंटेंट डेवलपर, ग्राफिक्स डिजाइनर्स शामिल थे। इन्हें बनाने के लिए कई सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर और एआई टूल की मदद ली गई। इनका वजन 45 किलो है। इन्हें बनाने में दो साल का समय लगा। 

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