दिलचस्प / चीन की पहली टेस्ट ट्यूब बेबी बनी मां, बोलीं; 31 साल पहले रेडियो पर खबर सुनकर आईवीएफ टेस्टिंग में शामिल हुई थीं मां

  • 31 साल की झेयांग मेंगझू ने हाल ही में बीजिंग के एक अस्पताल में बच्चे को दिया जन्म
  • तीन दशक पहले चीन में आईवीएफ टेस्टिंग के लिए महिलाओं की जरूरत थी, जिसमें झेयांग की मां शामिल हुई थीं
  • डिलीवरी कराने वाली डॉ. झेयांग लिजू का नाम जोड़कर झेयांग रखना चाहती हैं अपने बच्चे का नाम
  • आईवीएफ ट्रीटमेंट के लिए दूसरे देशों का रुख करते हैं चीनी, उनके मुताबिक, यहां के ट्रीटमेंट की सफलता दर कम

Dainik Bhaskar

Apr 18, 2019, 05:50 PM IST

हेल्थ डेस्क.चीन की पहली टेस्ट ट्यूब बेबी झेंग मेंगझू हाल ही में मां बनी हैं। इनका जन्म 31 साल पहले 10 मार्च 1988 को हुआ था। झेंग ने बीजिंग में लड़के को जन्म दिया है।डिलीवरी उसी अस्पताल में हुई है, जहां वह पैदा हुई थीं।बच्चे का वजन 3.8 किलो है। दोनों स्वस्थ हैं।

दुनिया के सबसे पहले टेस्ट ट्यूब बेबी का जन्म ब्रिटेन में हुआ था। इस घटना के एक दशक बाद बीजिंग के पेकिंग यूनिवर्सिर्टी थर्ड हॉस्पिटल में झेंग का जन्म हुआ था।

बच्चे के नाम में उसके डॉक्टर का नाम शामिल करेंगी

  1. झेंग का कहना है कि बच्चे का दुनिया में आना मेरे लिए एक सपने की तरह है। बच्चे का नाम क्या रखूं, अब तक मैंने नहीं सोचा। मैं इसे साधारण सा नाम देना चाहती हूं, जो उसे अधिक मेहनत करने और जीवन में चीजें सीखने के लिए प्रेरित करे। मैं अपने बच्चे के नाम में मुझे दुनिया में लाने वाली डॉ. झेंग लिजू का नाम भी शामिल करना चाहती हूं। ठीक वैसे जैसे मेरी मां ने किया था।

  2. डॉ झेंग लिजू ने पेकिंग यूनिवर्सिटी थर्ड हॉस्पिटल की स्थापना की थी, जिनकी 2016 में मौत हो गई थी। मेरी मां डॉक्टर लिजू से मिली थीं। इसके बाद उन्होंने टेस्ट टयूब बेबी को लेकर फैसला किया था। मेरे नाम का पहला शब्द डॉक्टर के नाम पर था। दूसरा शब्द मेंगझू है। चीनी भाषा में मेंग का मतलब है चीन में अंकुरित होने वाला और झू यहां के एक कैरेक्टर का नाम है।

  3. झेंग के मुताबिक, मुझे काफी प्रसिद्धी मिली, लेकिन कभी नहीं समझ पाई कि मैं इतनी स्पेशल हूं। मुझे लगता था कि मैं दूसरों की तरह ही हूं। मैं उनकी तरह खाती-पीती हूं, पढ़ती हूं और शादी भी हुई।

  4. चीन के नेशनल हेल्थ कमीशन के आंकड़ों के मुताबिक, यहां हर आठ में से एक इंसान जनन से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहा है। चीन में हर साल दुनिया में सबसे ज्यादा करीब 2 लाख टेस्ट ट्यूब बेबी पैदा होते हैं। ज्यादातर दंपति आईवीएफ ट्रीटमेंट के लिए दूसरे देशों का रुख करते हैं क्योंकि उनके मुताबिक, यहां के  ट्रीटमेंट की सफलता दर कम है।

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