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जलवायु/ वैज्ञानिकों का दावा- समुद्र के अंदर दीवार बनाने से रुक सकता है ग्लेशियरों का पिघलना



  • प्लान के तहत 300 मीटर ऊंची दीवार बनानी होगी, इसमें 0.1 क्यूबिक किमी से 1.5 क्यूबिक किमी धातु का इस्तेमाल होगा

  • दुबई के कृत्रिम द्वीप पाम जुमैरा की दीवार बनाने में लगी थी 0.1 क्यूबिक किमी धातु, खर्च हुए थे 86 हजार करोड़ रुपए

Dainik Bhaskar | Sep 25, 2018, 09:02 AM IST

लंदन. ग्लेशियरों को पिघलने से बचाने के लिए वैज्ञानिकों ने नया तरीका तलाशने का दावा है। उनका मानना है कि समंदर में धातु की दीवार बनाने से ग्लेशियरों का पिघलना काफी हद तक कम हो जाएगा। इससे समुद्र का जलस्तर बढ़ने में भी कमी आएगी और तटीय शहरों के डूबने का खतरा कम होगा। क्रायोस्फियर जर्नल में प्रकाशित यूरोपियन जियोसाइंस यूनियन रिपोर्ट के मुताबिक, समंदर में बनी दीवारें ग्लेशियरों के पास गर्म पानी नहीं पहुंचने देंगी। ऐसे में हिमखंड टूटकर समुद्र में नहीं गिरेंगे।

अरबों रुपए होगा बजट

  1. अध्ययन में बताया गया कि इस प्लान के तहत 300 मीटर ऊंची दीवार बनानी होगी, जिस पर 0.1 क्यूबिक किमी से 1.5 क्यूबिक किमी धातु लगेगी। हालांकि, इस पर काफी पैसा खर्च होने का अनुमान है। इससे पहले इस तकनीक से दुबई का पाम जुमैरा पास और हॉन्गकॉन्ग इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाया गया था।

  2. दुबई के पाम जुमैरा के लिए 0.1 क्यूबिक किमी धातु से दीवार बनाई गई थी, जिस पर 86 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। वहीं, हॉन्गकॉन्ग इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 0.3 किमी धातु से दीवार बनाने का बजट डेढ़ लाख करोड़ रुपए था।

  3. शॉर्ट टर्म प्लान है यह प्रयोग

    यह रिपोर्ट प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर माइकल वोलोविक और फिनलैंड की यूनिवर्सिटी के जॉन मूर ने लिखी है। उनका मानना है कि यह प्रयोग जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए उत्सर्जन में कमी लाने के एक शॉर्ट टर्म प्लान की तरह है। ग्लेशियरों को पिघलने से रोकने के लिए कुछ नया सोचना पड़ेगा।

  4. सबसे बड़े ग्लेशियर को बनाया अध्ययन का आधार

    2016 में नासा की जेट प्रपुल्शन लेबोरेटरी ने बताया था कि पश्चिमी अंटार्कटिका की बर्फ काफी तेजी से पिघल रही है। नेचर कम्युनिकेशन में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया था कि पहाड़ के नीचे मौजूद गर्म पानी बर्फ पिघलने का कारण हो सकता है।

  5. इसके बाद वोलोविक और मूर ने दुनिया के सबसे बड़े ग्लेशियर में से एक थ्वाइट्स का अध्ययन किया। कंप्यूटर मॉडल्स के जरिए वैज्ञानिक बर्फ पिघलने की वजह जानने की कोशिश कर रहे हैं।

  6. कामयाबी की 30% उम्मीद

    वैज्ञानिकों के मुताबिक, समंदर में धातु की दीवारें दुनिया का सबसे बड़ा सिविल इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट हो सकता है। यह दुनिया का सबसे चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट होगा, जिसके कामयाब होने की उम्मीद महज 30% ही है।

  7. साइंस जर्नल के मुताबिक, समुद्र तल को सामान्य रखने में ग्लेशियर अहम रोल निभाते हैं। पिछले दशक में पश्चिमी अंटार्कटिका की बर्फ पिघलने की दर में 70% का इजाफा हुआ है।

  8. सात फीट तक बढ़ सकता है समुद्र का जलस्तर

    वैज्ञानिकों के मुताबिक, भविष्य में सिर्फ थ्वाइट्स ग्लेशियर ही सभी समुद्रों का जलस्तर बढ़ा सकता है। इस हिसाब से वर्ष 2100 तक समुद्र का जलस्तर सात फीट तक बढ़ सकता है।

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