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जलवायु परिवर्तन का असर:दुनिया में सबसे गर्म कैलिफोर्निया की ‘मौत की घाटी’ में पारा 53.3° पहुंचा, वैज्ञानिक बोले- उत्सर्जन नहीं घटा तो तापमान 60° हो जाएगा

कैलिफोर्नियाएक महीने पहले
अमेरिकी मौसम विभाग ने दक्षिण अमेरिका में रहने वाले 5 करोड़ लोगों को तेज गर्मी और लू से बचने के लिए चेतावनी जारी कर दी है।
  • द. अमेरिकी राज्यों में पांच करोड़ लोगों को गर्मी से बचाने के लिए चेतावनी जारी
  • द. अमेरिका के राज्यों में औसत तापमान 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ा
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जलवायु परिवर्तन का असर दुनियाभर में दिखाई दे रहा है। अमेरिका के पूर्वी कैलिफोर्निया के रेगिस्तानी इलाके डेथ वैली यानी मौत की घाटी में रविवार को तापमान 53.3° सेल्सियस दर्ज किया गया। यह पिछले तीन साल में इस मौसम में दर्ज किया गया धरती का सबसे ज्यादा तापमान है।

मौसम में अचानक आई तब्दीली के बाद अमेरिकी मौसम विभाग ने दक्षिण अमेरिका में रहने वाले 5 करोड़ लोगों को तेज गर्मी और लू से बचने के लिए चेतावनी जारी कर दी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर कार्बन उत्सर्जन इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो 2030 तक घाटी का तापमान 60° सेल्सियस तक पहुंच सकता है।

कैलिफोर्निया का यह रेगिस्तानी हिस्सा फ्लोरिडा पनाहले के पनामा सिटी तक करीब पौने तीन हजार किमी इलाके में फैला हुआ है। यहां आस-पास के इलाकों बोर्गर, टेक्सास, एमारिलो, फोनिक्स, रोजवेल और न्यू मैक्सिको में भी तापमान 40 से 46° सेल्सियस तक दर्ज किया गया, जो औसत से 2° ज्यादा है। डेथ वैली दुनिया की सबसे गर्म जगह है। यहां सामान्य तापमान भी 50° सेल्सियस से ऊपर रहता है। 1913 में यहां का तापमान 56.7° सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो अब तक का सबसे ज्यादा था।

तापमान ज्यादा होने का कारण बारिश में कमी
अमेरिकी मौसम वैज्ञानिक ब्रॉयन थॉमसन का कहना है कि डेथ वैली का तापमान इतना ज्यादा गर्म होने की बहुत सारी वजहें हैं। यहां बारिश बहुत कम होती है और सर्दी होती ही नहीं है। प्रशांत महासागर से उठी हवा जब तक यहां पहुंचती है, उसकी सारी नमी सूख चुकी होती है, इसलिए यहां सिर्फ गर्म हवाएं ही पहुंचती हैं। घाटी की सतह ऐसी है, जो सूरज की रोशनी में धधक उठती है।

ग्रीन हाउस गैस के चलते भी गर्मी बढ़ जाती है
समुद्रतल से ज्यादा नीचे जाने पर हवा दबाव से गर्म हो जाती है और यह घाटी समुद्र तल से 190 फीट नीचे है। इन सबके अलावा एक सबसे जरूरी कारण ग्रीन हाउस गैस का बढ़ता उत्सर्जन है। इसने गर्मी बढ़ने की रफ्तार 600 गुना तेज कर दी है। यहां जमीन पर तापमान और ज्यादा रहता है। यह घाटी लंबी और संकरी हैं, लेकिन ऊंचे पहाड़ों से घिरी है। रात में भी यहां का तापमान 28 से 37° के बीच रहता है।

साइबेरिया में भी तापमान 5° सेल्सियस चढ़ा 
वैज्ञानिकों का कहना है कि साइबेरिया में जनवरी से जून 2020 तक 5° सेल्सियस तापमान बढ़ने के पीछे ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन है। यहां भड़की आग से 11.5 लाख हेक्टेयर जंगल ठूंठ में बदल गए और 5.6 करोड़ टन उत्सर्जन हुआ है। आग की लपटों ने यहां के वायुमंडल को राख से भर दिया है।

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