हॉन्गकॉन्ग / चीन से आजादी की मांग भड़की, घर पर ‘विदाई चिट्ठी’ छोड़कर जा रहे युवा प्रदर्शनकारी

हॉन्गकॉन्ग में जून से प्रदर्शन जारी हैं।

  • कई युवा अपनी विदाई के ‘गुडबाय लेटर्स’ को साथ में लेकर घूम रहे हैं
  • युवा पत्रों में लिख रहे- अगर आपको चिट्ठी मिल गई, तो इसका मतलब है कि मैं गिरफ्तार हुआ या मारा गया
  • हॉन्गकॉन्ग में चीन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हुए 19 हफ्ते से ज्यादा समय हो चुका है

Dainik Bhaskar

Oct 23, 2019, 01:28 PM IST

हॉन्गकॉन्ग. चीन की नीतियों से आजादी और लोकतंत्र की मांग को लेकर हॉन्गकॉन्ग में पिछले 19 हफ्तों से प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनों की शुरुआत शांतिपूर्ण ढंग से हुई थी। हालांकि, चीन समर्थकों और प्रशासन के सामने आने के बाद यह हिंसक हो गया। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, प्रदर्शन के बीच हॉन्गकॉन्ग ने बुधवार को विवादित प्रत्यर्पण बिल वापस ले लिया।

माना जा रहा है कि प्रदर्शनों को रोकने के लिए चीन हॉन्गकॉन्ग में सेना भेज सकता है। हालांकि, हॉन्गकॉन्ग के युवा अब इसे आखिरी लड़ाई की तरह लड़ रहे हैं। ज्यादातर युवा अब अपने घरों पर ‘आखिरी चिट्ठी’ छोड़कर जा रहे हैं। कई लोग इन चिट्ठियों को अपने साथ बैग में लेकर घूम रहे हैं, ताकि गिरफ्तारी या मृत्यु की स्थिति में यह उनके घरवालों को मिल जाए।

ज्यादातर युवाओं ने नाम जाहिर नहीं किया

ज्यादातर युवा अपने पत्रों में नाम तक जाहिर नहीं कर रहे। वे इस जगह पर नो बडी (अज्ञात) लिखकर छोड़ रहे हैं। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, एक प्रदर्शनकारी ने नाम न बताने के शर्त पर कहा कि पिछले महीने एक अंडरकवर पुलिसकर्मी ने कॉजवे बे इलाके में फायरिंग शुरू कर दी। प्रदर्शनकारी के मुताबिक, इसके बाद उसे समझ आ गया कि प्रदर्शनों में उसकी जान दांव पर लगी है। इन्हीं परिस्थितियों के देखते हुए अब ज्यादातर युवक परिवार के लिए चिट्ठियां छोड़ रहे हैं। चीनी भाषा मेंडेरिन में इन आखिरी चिट्ठियों को ‘वाई शू’ भी कहते हैं।

लोकतंत्र की मांग के बाद हिंसक हुए प्रदर्शन
हॉन्गकॉन्ग में प्रदर्शन इसी साल जून में भड़के थे। दरअसल, हॉन्गकॉन्ग सरकार ने चीन के दबाव में प्रत्यर्पण विधेयक पेश किया था। इसके तहत हॉन्गकॉन्ग में पकड़े गए अपराधियों को कार्रवाई और जांच के लिए चीन भेजा जा सकता था। जबकि इससे पहले तक हॉन्गकॉन्ग का कोई भी अपराधी चीन नहीं भेजा जाता था। इस बिल के विरोध में हॉन्गकॉन्ग के नागरिक सड़कों पर उतर आए थे। कहा गया कि चीन कानून का गलत इस्तेमाल कर सकता है। दो महीने तक प्रदर्शन चला, जिसके बाद हॉन्गकॉन्ग सरकार ने इस बिल को वापस ले लिया।

प्रदर्शनकारियों को धमकी दे चुके हैं चीनी राष्ट्रपति

इसके बावजूद हॉन्गकॉन्ग में प्रदर्शन नहीं थमे, बल्कि प्रदर्शनकारियों ने हॉन्गकॉन्ग में चीन से आजादी और लोकतंत्र की मांग की आवाज बुलंद करना शुरू कर दिया है। समय के साथ ही प्रदर्शनकारियों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। कई पश्चिमी देशों की तरफ से हॉन्गकॉन्ग के हाल पर चिंता जाहिर किए जाने के बाद हाल ही में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा था कि जो भी चीन के विभाजन का प्रयास कर रहे हैं, उन्हें कुचल दिया जाएगा। देश में आजादी की वकालत करने वालों का कचूमर निकाल दिया जाएगा। उनके समर्थकों की भी हड्डियां तोड़ दी जाएंगी।

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