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राफेल/ ओलांद ने अब कहा- रिलायंस को चुनने के दबाव के बारे में दैसो से ही पूछो



  • सितंबर 2016 में जब राफेल डील हुई, तब फ्रांस के राष्ट्रपति थे फ्रांसुआ ओलांद
  • शुक्रवार को उन्होंने कहा था- रिलायंस को चुनने के अलावा विकल्प नहीं था
  • राफेल बनाने वाली कंपनी दैसो और अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस के बीच करार विवादों में 
  • दैसो और रिलायंस नागपुर में राफेल के पार्ट्स बनाएंगे, यूपीए के वक्त एचएएल को यह काम मिलना था
Dainik Bhaskar | Sep 22, 2018, 08:21 PM IST

नई दिल्ली/पेरिस. राफेल विवाद पर फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलांद ने शुक्रवार को कहा था कि फ्रांस के सामने रिलायंस काे स्थानीय भागीदार के रूप में चुनने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। हमें सिर्फ रिलायंस डिफेंस का नाम दिया गया था। 24 घंटे बाद उन्होंने अपना बयान बदलते हुए कहा कि रिलायंस को चुने जाने के बारे में राफेल बनाने वाली दैसो कंपनी ही कुछ बता सकती है। ओलांद ने ही सितंबर 2016 में हुई राफेल डील पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हस्ताक्षर किए थे। 

डील के लिए फ्रांस ने रिलायंस को पार्टनर नहीं चुना था: आेलांद

  1. फ्रांसुआ ओलांद ने शनिवार शाम न्यूज एजेंसी एएफपी से कहा, ‘‘फ्रांस ने किसी भी तरह से रिलायंस को नहीं चुना।’’ क्या भारत सरकार की तरफ से यह दबाव था कि रिलायंस और दैसो को एकसाथ काम करना चाहिए? इस पर ओलांद ने कहा कि वे इस बारे में कुछ नहीं जानते। इस बारे में सिर्फ दैसो ही कमेंट कर सकती है।

  2. ओलांद ने कहा कि मुझे याद नहीं आता कि जूली गाए (ओलांद की करीबी) का किसी फिल्म प्रोडक्शन से संबंध है। लिहाजा, उस ग्रुप (रिलायंस) को किसी भी बात के लिए मेरा शुक्रिया अदा करने की जरूरत नहीं है।

  3. जूली गाए ओलांद की करीबी और बिजनेस पार्टनर हैं। ओलांद ने यह टिप्पणी इन आरोपों के संदर्भ में की कि अनिल अंबानी की रिलायंस एंटरटेनमेंट ने जूली की कंपनी रोग इंटरनेशनल के साथ एक फ्रेंच फिल्म बनाने को लेकर करार किया था। 

  4. दरअसल, अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट में बताया था कि 24 जनवरी 2016 को जब रिलायंस एंटरटेनमेंट ने रोग इंटरनेशनल के साथ करार किया था, तब ओलांद भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 36 राफेल एयरक्रॉफ्ट के लिए एक एमओयू साइन कर रहे थे। 

  5. 24 घंटे पहले कहा था- रिलायंस के अलावा विकल्प नहीं था

    शुक्रवार को एक इंटरव्यू में ओलांद ने कहा था- "फ्रांस के सामने इस रिलायंस का चुनाव करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। भारत सरकार के प्रस्ताव के बाद दैसो ने अनिल अंबानी के साथ डील को लेकर बात की।"

  6. सरकार ने कहा- हमारी भूमिका नहीं

    रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा था, “ओलांद के बयान की जांच की जा रही है। पहले ही कहा जा चुका है कि इस कमर्शियल फैसले में फ्रांस और  भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं थी।” दैसो ने भी कहा कि एक अलग अनुबंध निजी कंपनियों के बीच हुआ है।

  7. क्यों है एचएएल-रिलायंस विवाद?

    इस समझौते में राफेल विमानों के रखरखाव का जिम्मा भारत की कंपनियों को सौंपा जाना है। इसी के तहत दैसो एविएशन ने अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस के साथ समझौता किया। सरकार ने एचएएल के समझौते से बाहर होने की वजह यूपीए सरकार की नीतियों को बताया। लेकिन, विशेषज्ञों का कहना है कि दैसो ने खुद तकनीक के ट्रांसफर की आशंका के चलते एचएएल के साथ समझौते से इनकार कर दिया था।

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