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एच-1बी वीजा पॉलिसी का विरोध:ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन की एच-1बी वीजा पॉलिसी के खिलाफ कोर्ट पहुंचे 174 भारतीय; कहा- यह परिवार से अलग करने की कोशिश

वॉशिंगटनएक महीने पहले
अमेरिका में हर साल करीब 10 लाख कर्मचारियों को एच-1बी वीजा जारी किए जाते हैं। इनमें सबसे ज्यादा कर्मचारी भारत और चीन के होते हैं। (प्रतीकात्मक)
  • ट्रम्प प्रशासन की एच-1बी वीजा पॉलिसी के खिलाफ कोलंबिया की एक अदालत में केस दायर किया गया
  • केस दायर करने वाले 174 भारतीयों में 7 नाबालिग भी हैं, कोर्ट ने विदेश मंत्री को समन जारी किया
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अमेरिका में रहने वाले 174 भारतीयों ने ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन की एच-1बी वीजा पॉलिसी के खिलाफ कोर्ट केस कर दिया। कोलंबिया की एक अदालत में दायर केस में कहा गया कि एच-1बी के नए नियम से परिवार अलग हो जाएंगे। इसकी वजह से कुछ लोग अमेरिका नहीं आ सकेंगे या उन्हें इसके लिए वीजा ही नहीं मिलेगा।  कोलंबिया के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज ने बुधवार को इस मामले में जवाब देने के लिए विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और कार्यवाहक होमलैंड सिक्योरिटी चीफ के अलावा लेबर सेक्रेटरी को समन जारी कर दिए। 

अमेरिकी इकोनॉमी को भी नुकसान होगा
174 भारतीयों की तरफ से यह केस उनके वकील वासडेन बेनियास ने दायर किया। इसमें कहा गया- एच-1बी और एच-4 वीजा पर बैन से अमेरिका की इकोनॉमी को नुकसान होगा। इससे परिवार जुदा हो जाएंगे और यह संसद के आदेशों के भी खिलाफ है। 
इसमें मांग की गई है कि एच-1बी और एच-4 वीजा से संबंधित नए आदेश पर रोक लगाई जाए। इसके अलावा विदेश विभाग को यह आदेश दिया जाए कि वह इन वीजा से जुड़े तमाम पेंडिंग मामलों को जल्द खत्म करे। 

ट्रम्प के आदेश का विरोध
22 जून को ट्रम्प ने एक आदेश जारी करते हुए एच-1बी वीजा जारी करने पर अगले साल तक के लिए रोक लगा दी थी। उन्होंने कहा था कि इससे अमेरिकियों को रोजगार के ज्यादा मौके मिल सकेंगे। भारत ने इसका विरोध करते हुए अमेरिकी सरकार से बातचीत का भरोसा दिलाया था। ट्रम्प ने कहा था कि फरवरी से मई के बीच अमेरिका में बेरोजगारी चार गुना तक बढ़ गई है। लिहाजा, उन्हें सख्त कदम उठाने पड़ रहे हैं।    

अमेरिका में ही अलग-अलग राय
भारतीयों द्वारा एच-1बी वीजा पर नए आदेश को चुनौती देने की जानकारी फोर्ब्स मैग्जीन ने दी थी। उसके मुताबिक, शिकायत में कहा गया है- एच-1बी वीजा होल्डर्स के हितों की रक्षा की जानी चाहिए। जिन लोगों ने लेबर सर्टिफिकेशन और इमीग्रेशन प्रॉसेस पूरी कर ली है, उन्हें भी इस दायरे में लाना चाहिए। अमेरिका के कई सांसदों ने भी ट्रम्प के आदेश का विरोध किया है। इस बारे में उन्होंने लेबर सेक्रेटरी से भी दखल देने को कहा है।   

एच-1बी वीजा: ऐसे समझिए
एच-1बी वीजा नॉन इमीग्रेंट या गैर प्रवासी वीजा है। अमेरिकी कंपनियां दूसरे देशों के टेक्निकल एक्सपर्ट्स हायर करती हैं। फिर यह कंपनियां सरकार से हायर किए गए इम्पलॉइज के लिए एच-1बी वीजा मांगती हैं। ज्यादातर कर्मचारी भारत या चीन के होते हैं। अगर किसी एच-1बी वीजाधारक की कंपनी ने उसके साथ कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर लिया है, तो वीजा स्टेटस बनाए रखने के लिए उसे 60 दिनों में नई कंपनी में जॉब तलाशना होता है। भारतीय आईटी वर्कर्स इस 60 दिन की अवधि को बढ़ाकर 180 दिन करने की मांग कर रहे हैं। यूएस सिटीजनशिप एंड इमीग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआईएस) के मुताबिक, एच-1बी वीजा से सबसे ज्यादा फायदा भारतीय नागरिकों को ही होता है। 

पिचाई ने कहा था- सरकार के फैसले से निराश हूं
एच-1बी वीजा पर अमेरिकी सरकार के फैसले पर गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने निराशा जाहिर की थी। उन्होंने कहा था- प्रवासियों ने अमेरिका को आर्थिक तौर पर मजबूत बनाने में मदद की, देश को तकनीक में अव्वल बनाया। इन्हीं लोगों की वजह से गूगल इस जगह पहुंचा। हम इन लोगों को समर्थन करते रहेंगे।

टेस्ला और माइक्रोसॉफ्ट ने भी किया विरोध
टेस्ला के सीईओ एलन मस्क और माइक्रोसॉफ्ट के प्रेसिडेंट ब्रेड स्मिथ ने भी इस फैसले का विरोध किया था। मस्क ने कहा था- यह देश को वर्ल्ड टैलेंट से अलग करने का वक्त नहीं है। प्रवासियों ने हमारी मदद उस दौर में की थी जब हमें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। फेसबुक ने एक बयान में कहा था- ट्रम्प के इस आदेश से वह बेहतरीन प्रतिभाएं अमेरिका से बाहर रह जाएंगी, जिनकी हमें जरूरत है। इकोनॉमिक रिकवरी मुश्किल हो जाएगी। 

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