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सुलह की पहल:9 महीने बाद 17 अगस्त को भारत-नेपाल बातचीत करेंगे; नेपाली विदेश मंत्री बोले- सीमा विवाद के गुलाम नहीं बन सकते

नई दिल्ली/काठमांडू5 महीने पहले
यह फोटो फरवरी 2016 की है। उस समय नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली भारत के दौरे पर पहुंचे थे। उन्होंने नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी।
  • बातचीत का एजेंडा नेपाल में भारत की सहायता से चल रहे प्रोजेक्ट्स बताए गए हैं
  • दोनों देशों के बीच 2016 में बातचीत के लिए मैकेनिज्म तैयार किया गया था
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सीमा विवाद और तल्ख बयानबाजी के बीच भारत और नेपाल 9 महीने बाद पहली बार बातचीत करेंगे। 17 अगस्त को काठमांडू में यह बातचीत होगी। औपचारिक तौर पर इसका एजेंडा भारत द्वारा नेपाल में चलाए जा रहे प्रोजेक्ट्स की समीक्षा है। लेकिन, दोनों देश सीमा विवाद समेत कुछ दूसरों मुद्दों पर भी बातचीत कर सकते हैं। नेपाल की तरफ से विदेश मंत्रालय में सचिव शंकर दास बैरागी शामिल होंगे। भारतीय दल की अगुआई नेपाल में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा करेंगे।

इस बीच, नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा- दोनों देश सीमा विवाद के गुलाम बन कर नहीं रह सकते। हमें बातचीत करनी ही होगी।

दोनों देशों के बीच आठवीं बातचीत

2016 में नेपाल के तब के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड भारत आए थे। दोनों देशों ने आपसी विवाद सुलझाने और सहयोग बढ़ाने के लिए मैकेनिज्म तैयार किया था। 17 अगस्त को इसी मैकेनिज्म के तहत 8वीं बातचीत होगी। हाल के दिनों में सीमा विवाद और दूसरे मुद्दों की वजह से भारत और नेपाल के रिश्तों में खटास दिखी थी। अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन पर भी नेपाल के प्रधानमंत्री ओली ने बयानबाजी की थी।

हमारे पास विकल्प भी नहीं

भारत और नेपाल के बीच प्रस्तावित बातचीत पर नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा- हमारे पास बातचीत के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। सीमा विवाद के गुलाम नहीं बन सकते। दूसरे मुद्दों पर बातचीत करनी होगी। फिलहाल, सीमा विवाद पर बातचीत नहीं होगी। लेकिन, आज नहीं तो कल, उसे भी सुलझाना होगा। दोनों देश सकारात्मक रूप से आगे बढ़ रहे हैं।

बातचीत होना ही बड़ी सफलता

दोनों देशों के बीच मार्च के बाद जिस तरह की बयानबाजी हुई है, उससे रिश्तों में खटास बढ़ी। नेपाल के एक अफसर ने कहा- बातचीत की शुरुआत ही बहुत बड़ी सफलता है। दोनों देश क्रॉस बॉर्डर ट्रेन सर्विस, एग्रीकल्चर, भूकंप के बाद री-कन्स्ट्रक्शन जैसे प्रोजेक्ट साथ कर रहे हैं।

दोनों देशों के बीच कैसे शुरू हुआ विवाद

भारत ने अपना नया राजनीतिक नक्शा 2 नवम्बर 2019 को जारी किया था। इस पर नेपाल ने आपत्ति जताई थी और कालापानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख इलाके को अपना क्षेत्र बताया था। इस साल 18 मई को नेपाल ने इन तीनों इलाकों को शामिल करते हुए अपना नया नक्शा जारी कर दिया। इस नक्शे को अपने संसद के दोनों सदनों में पारित कराया। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया। मई-जून में नेपाल ने भारत से सटी सीमाओं पर सैनिकों की तादाद बढ़ा दी। बिहार में भारत-नेपाल सीमा पर नेपाली सैनिकों ने भारत के लोगों पर फायरिंग भी की थी।

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