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बेलारूस में चुनाव के बाद बवाल जारी:तीन दिन में 6 हजार से ज्यादा लोग गिरफ्तार; विपक्षी नेता स्वेतलाना ने बच्चों के लिए खतरा बताकर देश छोड़ा

मिंस्क5 महीने पहले
37 साल की स्वेतलाना ने जेल में बंद अपने पति के स्थान पर यह चुनाव लड़ा था। - फाइल फोटो
  • बेलारूस में 26 साल से राष्ट्रपति लुकाशेंको की फिर जीत हुई है, चुनाव में धांधली के आरोप लगे
  • यूरोप के आखिरी डिक्टेटर माने जाते हैं लुकाशेंको, पूरे देश में अभी भी इंटरनेट ब्लॉक है
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बेलारूस में चुनाव परिणाम आने के बाद से प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। लोगों ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया है। तीन दिन में 6 हजार से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इसके साथ ही विपक्षी नेता स्वेतलाना तिखानोव्सना ने देश छोड़ दिया है। एक यूट्यूब वीडियो में उन्होंने बताया कि उनके बच्चों को खतरा था। उन्हें धमकी मिल रही थी। विदेश मंत्री ने कहा है कि वह लिथुआनिया में सुरक्षित हैं।

बेलारूस में 9 अगस्त को छठी बार राष्ट्रपति पद के चुनाव हुए थे। 26 साल से राष्ट्रपति लुकाशेंको को 80.23% ‌‌वोट मिले थे और विपक्षी स्वेतलाना को 9%। चुनाव में धांधली के आरोप लगा लोगों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इसके चलते पूरे देश में इंटरनेट ढप कर दिया गया है। सोमवार को स्वेतलाना को भी हिरासत में लिया गया था। हालांकि, शाम तक उन्हें छोड़ दिया गया था।

ईयू ने सैंक्शन लगाने की चेतावनी दी
यूरोपियन यूनियन (ईयू) ने बेलारूस पर चुनाव में धांधली करने और हिंसक प्रदर्शनों को न रोक पाने के कारण कई तरह के प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है। ईयू के विदेश मंत्री ने कहा है कि बेलारूस में कभी भी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव नहीं हुए। बेलारूस यूरोपियन देश है। यह 1991 में सोवियत संघ से अलग हुआ था। इससे पहले 2010 के चुनावों में भी लुकाशेंको पर धांधली करने के आरोप लगे थे। तब ईयू ने बेलारूस पर कई तरह के सैंक्शन भी लगाए थे।

स्वेतलाना ने कहा- संघर्ष जारी रहेगा
परिणाम आने के बाद स्वेतलना ने कहा था कि भले ही चुनाव हार गई हूं, पर हिम्मत नहीं। तानाशाही के खिलाफ मेरा संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा था कि लोगों का सड़कों पर उतरकर विरोध जताना, स्पष्ट संदेश है कि चुनाव में धांधली हुई है। मेरी रैलियों में उमड़ी भीड़ से तय था कि लोग बदलाव चाहते हैं।

पति जेल में बंद हैं
स्वेतलाना ने जेल में बंद अपने पति के स्थान पर यह चुनाव लड़ा। उन्होंने विपक्ष की कई बड़ी रैलियों का नेतृत्व किया। इन रैलियों में ऐतिहासिक भीड़ उमड़ी। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। विपक्ष ने पहले ही कहा था कि उसे वोटिंग में धांधली की आशंका है। स्वेतलाना एक शिक्षिका रह चुकी हैं। पति के गिरफ्तार होने और वोट के लिए पंजीकरण पर रोक के बाद, स्वेतलाना ने राजनीति में कदम रखा। वह शुरू से ही कहती रही हैं कि देश में निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं हैं।

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