फ्रांस / द विंसी के निधन के 500 साल: लियोनार्डो की कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगेगी, रोज 30 हजार लोगों के आने की उम्मीद

लियोनार्डो की पेंटिंग द लास्ट सपर।

  • फ्रांस के लूवर म्यूजियम में गुरुवार से लियोनार्डो द विंसी की बनाई मूर्तियां, पेंटिग्स, स्केच, लेख और ड्रॉइंग प्रदर्शित की जाएंगी, 10 साल से तैयारी हो रही थी
  • इटली के टस्कन प्रांत के विंसी गांव में 1452 में जन्मे थे लियोनार्डो, 2 मई 1519 को हुआ था निधन
  • लियोनार्डो ने जीवन के अंतिम दिन फ्रांस के राजा फ्रांसिस प्रथम के दरबार मेंगुजारे थे

Dainik Bhaskar

Oct 21, 2019, 08:16 AM IST

पेरिस.फ्रांस के मशहूर लूवर म्यूजियम में अगले हफ्ते से विख्यात आर्टिस्ट लियोनार्डो द विंसी की कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इस प्रदर्शनी में रोज करीब 30 हजार लोगों के आने की संभावना है। प्रदर्शनी लियानार्डो के निधन के 500 साल पूरे होने पर लगाई जा रही है। प्रदर्शनी 24 अक्टूबर से शुरू हो रही है, यह फरवरी तक चलेगी।

लूवर दुनिया का अकेला म्यूजियम है, जहां सबसे ज्यादा लोग घूमने जाते हैं। यहां लियोनार्डो की ड्रॉइंग, स्केच, पेंटिग्स, मूर्तियां, लेख सभी कुछ प्रदर्शन के लिए रखा जाएगा। लियानार्डो की चीजों की इतने बड़े स्तर पर प्रदर्शनी पहली बार लगाई जा रही है। यह भी उस वक्त हो रहा है कि जब द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से फ्रांस और इटली के बीच सबसे बड़ा गतिरोध चल रहा है।

अब भी सवाल- सल्वाटोर मुंडी कौन खरीदेगा
प्रदर्शनी में लियोनार्डो की विख्यात पेंटिंग में शुमार मोनालिसा भी होगी। हालांकि सल्वाटोर मुंडी पर संशय है। इसे दुनिया की सबसे महंगी पेंटिंग माना जाता है। यह अब भी रहस्य बना हुआ है कि सल्वाटोर मुंडी प्रदर्शनी में शामिल होगी या नहीं। इस पेंटिंग में जीसस को पुनर्जागरण काल के कपड़ों में दिखाया गया है। माना जा रहा है कि सल्वाटोर मुंडी किसी खाड़ी देश में है। वहीं, म्यूजियम प्रशासन ने तस्वीरों की जगह निर्धारित कर दी है। ऐसे में अगर ऐन मौके पर सल्वाटोर आती है तो अफसरों को परेशानी हो सकती है।

जानकारों का कहना है कि लियोनार्डो की कलाकृतियों से उनके बारे में जानना का मौका मिलेगा। लोग एक साथ मोनालिसा, ला बेल फेरोनियर, सेंट जॉन द बैप्टिस्ट और द लास्ट सपर जैसी पेंटिंग देख पाएंगे। मोनालिसा को वर्चुअल रियलिटी से दिखाने के भी प्रयास चल रहे हैं।

म्यूजियम के अफसरों को चिंता
लियोनार्डो की प्रदर्शनी के लिए रोज 7 हजार लोगों के देखने की व्यवस्था है, लेकिन 30 हजार लोगों के रोज पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में अफसरों के लिए प्रबंधन मुश्किल हो सकता है। अफसर यह नहीं चाहते कि किसी को भी विख्यात चीजों को देखने से रोका जाए। हालांकि, वे ही लोग प्रदर्शनी देख सकेंगे, जिन्होंने इसके लिए पहले से बुकिंग कराई होगी।

प्रदर्शनी को लेकर भी विवाद हुआ था
पिछले साल इस प्रदर्शनी को लेकर भी इटली के सत्ताधारी दल लीग पार्टी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच विवाद हुआ था। इटली ने आरोप लगाया था कि फ्रांस उनके विख्यात कलाकार की मौत के 500 साल के मौके को भुनाना चाहता है, लिहाजा हम लियोनार्डो की कई चीजें प्रदर्शनी में नहीं रखेंगे। लीग पार्टी के एक सांसद ने कहा था कि लियोनार्डो इतालवी थे, उनकी केवल मौत ही फ्रांस में हुई। हालांकि बाद में दोनों देशों में प्रदर्शनी को लेकर सहमति बन गई।

इटली में जन्मे थे, फ्रांस में मौत
लियोनार्डो का जन्म इटली के टस्कन प्रांत के विंसी गांव में 1452 में हुआ था। उन्होंने इटली के फ्लोरेंस और मिलान में ज्यादा वक्त गुजारा। वे महान चित्रकार, वैज्ञानिक, इंजीनियर और दार्शनिक थे। उन्हें उस दौर का जीनियस माना जाता है। उनके जीवन के अंतिम दिन फ्रांस के राजा फ्रांसिस प्रथम के दरबार में गुजरे। 2 मई 1519 को फ्रांस में ही उनका निधन हो गया। जानकारों का कहना है कि लियोनार्डो की चित्रकारी का दौर काफी कम रहा। उनकी 15 पेंटिंग ही बची हैं। इनमें से 9 का प्रदर्शन किया जा रहा है। माना जाता है कि लियोनार्डो ने एक पेंटिंग बनाने में 10 साल से ज्यादा लिए। प्रदर्शनी के क्यूरेटर लुई फ्रैंक का कहना है कि केवल बाहरी चीजों को बेहतर तरीके से दिखाना ही लियोनार्डो क्षमता नहीं थी, बल्कि उन्होंने जीवन की गति, स्पंदन और भावनाओं को भी तस्वीरों में उकेरा।

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