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पाकिस्तान/ दो बांधों के लिए डेढ़ लाख करोड़ रुपए की जरूरत, चंदे से पैसा जुटा रही इमरान सरकार

मोहमंद बांध 2012 से बन रहा है। दायमर-बाशा बांध का काम शुरू ही नहीं हुआ। (फाइल)

  • चीफ जस्टिस साकिब निसार ने परियोजनाओं के लिए 360 करोड़ रु. जुटाए
  • आर्मी चीफ ने भी दिया 100 करोड़ रुपए का चंदा
  • निसार ने कहा- चंदे की सार्वजनिक रूप से आलोचना करने वालों पर केस चलेगा

Dainik Bhaskar | Sep 24, 2018, 02:09 PM IST

इस्लामाबाद. पाकिस्तान में दो बांध बनाए जाने हैं, लेकिन सरकार के पास पैसा नहीं है। लिहाजा, अब चंदा जुटाया जा रहा है। इसकी पहल चीफ जस्टिस ने की है। उनका कहना है कि इस कोशिशों की आलोचना करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दोनों बांध की अनुमानित लागत 12.4 अरब डॉलर (करीब डेढ़ लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपए) है। सरकार के पास इसके लिए सिर्फ 143 करोड़ रुपए बचे हैं। विश्व बांध आयोग के मुताबिक- बड़े बांध बनाने में अनुमानित लागत से 63% ज्यादा पैसा लग जाता है।

360 करोड़ चंदा जुटाया गया

  1. दोनों बांधों के लिए चीफ जस्टिस साकिब निसार अब तक 360 करोड़ रुपए जुटा चुके हैं। उधर, नए प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी देश और विदेश में रह रहे लोगों से ज्यादा से ज्यादा चंदा देने की अपील की है। 

  2. चंदा अभियान को पाक सेना का भी समर्थन है। पिछले महीने आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा ने इसके लिए 100 करोड़ रुपए का चेक दिया। चंदे के लिए जगह-जगह पोस्टर लगाए गए हैं। टीवी-रेडियो पर विज्ञापन दिया जा रहा है। 

  3. उत्तरी पाकिस्तान में 4500 मेगावॉट क्षमता का दायमर-बाशा बांध और 800 मेगावॉट क्षमता का मोहमंद बांध बनाया जाना है। 30 हजार करोड़ रुपए की लागत वाले मोहमंद का काम 2012 से जारी है। सवा लाख करोड़ रुपए की लागत वाले दायमर-बाशा का काम अभी तक शुरू ही नहीं हुआ है।

  4. पाक के आर्थिक मामलों के विश्लेषक खुर्रम हुसैन के मुताबिक, चंदा देना सभी के लिए आसान नहीं है। बांध बनने के लिए काफी रकम चाहिए और जिस रफ्तार से पैसा जुटाया जा रहा है, वह काफी धीमी है। लिहाजा पैसा जुटने में बहुत वक्त लगेगा।

  5. जानकारों की राय- पैसे के लिए दूसरे रास्ते तलाशें

    खुर्रम का कहना है कि सरकार को पैसा जुटाने के लिए अन्य रास्तों पर ध्यान देना होगा मसलन बॉन्ड्स जारी करना चाहिए। साथ ही अंतरराष्ट्रीय दानदाता संगठनों से भी संपर्क करना चाहिए।

  6. 2011 में इथियोपिया ने भी नील नदी पर पांच अरब डॉलर की लागत से बनने वाले बांध के लिए बॉन्ड जारी किए थे। सरकार को चीनी फर्म ने पैसा भी दिया था।