सऊदी अरब / हूती विद्रोहियों के ड्रोन हमले के बाद दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको का 50% उत्पादन बंद

ड्रोन हमलों के बाद अरामको की एक रिफाइनरी से धुआं उठता देखा गया।

  • अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने हमले के पीछे ईरान का हाथ बताया
  • हूती विद्रोहियों ने हमले में 10 ड्रोन्स के इस्तेमाल की बात कही

Dainik Bhaskar

Sep 15, 2019, 09:10 AM IST

रियाद. सऊदी अरब की तेल कंपनी अरामको की दो बड़ी रिफाइनरियों पर यमन के हूती विद्रोहियों ने शनिवार को ड्रोन से हमला कर दिया था। इसके चलते इन दोनों जगहों पर तेल उत्पादन अस्थाई रूप से बंद कर दिया गया। सऊदी के ऊर्जा मंत्री ने बताया कि इस एहतियाती रोक के चलते देश काकुल तेल उत्पादन आधा हो गया है। हमलों की वजह से प्रतिदिन57 लाख बैरल कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के उत्पादन पर असर पड़ा है।

अरामको के सीईओ अमीन नसीर ने कहा कि कंपनी जल्द से जल्द तेल सप्लाई शुरू करने की कोशिश कर रही है। अगले दो दिनों में इसको लेकर एक अपडेट जारी किया जाएगा। नसीर ने बताया कि रिफाइनरियों में काम करने वाले कर्मचारी सुरक्षित हैं।

अमेरिका ने ईरान पर लगाए हमले के आरोप

इसी बीच अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने अरामको पर इन हमलों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया। पोम्पियो ने कहा कि ईरान ने दुनियाभर की ऊर्जा जरूरतों पर हमला किया है। इससे पहले सऊदी अरब भी ईरान पर हूती विद्रोहियों को हथियार देने का आरोप लगा चुका है। शनिवार को ही हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि अरामको पर हमले के लिए उसने 10 ड्रोन्स का इस्तेमाल किया।

हमले के पीछे की ये वजह भी संभव
यमन और सऊदी: पूर्व राष्ट्रपति हादी के समर्थन पर छिड़ी लड़ाई यमन में 2015 से जंग छिड़ी हुई है। हूती विद्रोहियों ने यमन के तत्कालीन राष्ट्रपति अबद्राबुह मंसूर हादी को राजधानी सना से भागने पर मजबूर कर दिया था। सऊदी अरब हादी का समर्थन करता है। इसलिए हूती विद्रोही सऊदी अरब का विरोध करते हैं। हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन प्राप्त है।

अमेरिका और ईरान: खाड़ी में तेल टैंकरों पर हमले का विवाद सऊदी अरब और अमेरिका खाड़ी में अपने दो तेल टैंकरों पर जून और जुलाई में हुए हमलों के लिए ईरान को दोषी मानते हैं। ईरान इन आरोपों को खारिज करता है। ईरान ने अमेरिकी ड्रोन को भी जून में होरमूज में मार गिराया था। सऊदी अरब को अमेरिका का समर्थन है तो हूती लड़ाकों को ईरान का समर्थन है।

अरामको कंपनी: अरामको की स्थापना 1933 में हुई थी। साल 1970 में राष्ट्रीयकरण किया गया। इसमें 65 हजार लोग काम करते हैं। पिछले साल कंपनी की कमाई 8 लाख करोड़ रु. रही। बकीक की तेल रिफाइनरी में रोज 70 लाख बैरल और खुरैस में 15 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन होता है।

आतंकी हमले की जद में रहा प्लांट
बीते सालों में अरामको प्लांट आतंकियों के निशाने पर रहा है। फरवरी 2006 में अलकायदा ने तेल कंपनी पर फिदायीन हमले की कोशिश की थी, जिसे नाकाम कर दिया गया।


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