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रूस से रक्षा सौदा/ अमेरिका ने चीन पर प्रतिबंध लगाया, कहा- मिसाइल सौदा हुआ तो भारत पर भी कार्रवाई संभव

भारत रूस से मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने की तैयारी कर रहा है। - फाइल

  • 2017 में अमेरिका ने एक्ट लागू करके ईरान, उत्तरी कोरिया और रूस पर प्रतिबंध लगाया था
  • भारत रूस से 5 एस-400 मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने की तैयारी कर रहा

Dainik Bhaskar | Sep 21, 2018, 05:06 PM IST

वॉशिंगटन. अमेरिका ने रूस से सैन्य उपकरण खरीदने के आरोप में चीन की मिलिट्री एजेंसी इक्विपमेंट डेवेलपमेंट डिपार्टमेंट और उसके निदेशक ली शांगफु पर प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसे में यह एजेंसी अमेरिका के अधिकार क्षेत्र में निर्यात लाइसेंस के लिए आवेदन नहीं कर पाएगी। साथ ही, फॉरेन एक्सचेंज ट्रांजेक्शन में भी हिस्सा नहीं ले पाएगी। अमेरिका ने यह भी कहा कि भारत अगर रूस के साथ एस-400 मिसाइल डील करता है तो उस पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

चीन पर अमेरिकी कानून के उल्लंघन का आरोप

  1. चीन ने पलटवार करते हुए अमेरिका को धमकी दी है कि अगर प्रतिबंध तुरंत नहीं हटाए गए तो अंजाम भुगतने पड़ सकते हैं। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेग शुआंग ने कहा कि अमेरिका ने यह कार्रवाई बेवजह की, यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है।

  2. गेंग ने कहा- “हमने अमेरिका से तुरंत अपनी गलती सुधारने के लिए कहा है, वरना उन्हें नतीजों के लिए तैयार रहना होगा। ये कदम उठाकर अमेरिका ने दोनों देशों और सेनाओं के आपसी रिश्ते खराब किए हैं।। 

  3. चीन की मिलिट्री एजेंसी पर आरोप है कि उसने अमेरिका के एक कानून का उल्लंघन करके रूस की हथियार निर्यातक कंपनी से डील की। इसके तहत चीन ने 2017 में 10 सुखोई, 35 लड़ाकू विमान और 2018 में जमीन से हवा में मार करने वाली एस-400 मिसाइल खरीदीं।

  4. अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने बताया कि 2017 में अमेरिका ने काउंटरिंग अमेरिकाज अडवर्सरीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट-काट्सा (सीएएटीएसए) लागू किया गया। इस कानून के जरिए अमेरिका ने ईरान, उत्तरी कोरिया और रूस पर प्रतिबंध लगाया और रूस से रक्षा उपकरणों की खरीद को प्रतिबंधित कर दिया।

  5. ट्रम्प प्रशासन ने इस कानून के तहत रूस की मिलिट्री और खुफिया एजेंसी से जुड़े 33 लोगों और कंपनियों को ब्लैकलिस्टेड कर दिया है। इनसे किसी भी तरह की डील करने वाले देशों पर अमेरिका कार्रवाई कर सकता है। 

  6. अमेरिका के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, ‘‘चीन की एजेंसी पर लगे प्रतिबंध का असल निशाना रूस है। इस कानून की मदद से अमेरिका किसी खास देश की रक्षा क्षमता को कमजोर नहीं करना चाहता है। इस एक्ट का मकसद है कि रूस को उसकी गलत हरकतों की कीमत चुकानी पड़े।’’

  7. बताया जा रहा है कि अमेरिकी राजनीति में रूस के हस्तक्षेप का हवाला देते हुए खुफिया एजेंसी ने रूस पर कार्रवाई के लिए ट्रम्प प्रशासन पर दबाव बना रखा है। ऐसे में अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य बार-बार ट्रम्प प्रशासन से मॉस्को के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने के लिए कह रहे हैं।