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चीन-अमेरिका विवाद:विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा- दुनिया चीन से आने वाले खतरों को लेकर सतर्क, लोकतंत्र समर्थक देश इसका जवाब देंगे

न्यूयॉर्कएक महीने पहले
अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा- लोकतांत्रिक देश चीन को पूरी ताकत से जवाब देंगे।
  • अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा- भारत ने चीनी ऐप पर बैन अमेरिका के कहने पर नहीं, बल्कि इसलिए लगाया क्योंकि वे इसके खतरे के बारे में जानते थे
  • उन्होंने कहा- चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ऐसी हरकत करती रहेगी तो आजादी पसंद लोकतांत्रिक देश ऐसा जवाब देंगे, जैसा पहले कभी नहीं दिया गया
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अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने बुधवार को कहा कि दुनिया चीन से आने वाले खतरों को लेकर सतर्क है। लोकतांत्रिक देश इसका पूरी ताकत के साथ जवाब देंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। हाल ही में भारत ने चीन के 59 ऐप पर अपने देश में बैन लगाए हैं। 

चीन से दुनिया भर के देशों के लिए आने वाले खतरों का जिक्र करते हुए पोम्पियो ने कहा, ‘‘ जब तक चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ऐसी हरकतें करती रहेंगी, जैसा वे लंबे समय से करती रही हैं तो उन्हें ऐसा जवाब मिलेगा जैसा पहले कभी नहीं मिला। ऐसा सिर्फ अमेरिका की ओर से नहीं होगा, बल्कि दुनिया की सभी आजादी पसंद लोकतंत्र उसे जवाब देंगे।

इकोनॉमिक क्लब ऑफ न्यूयॉर्क में बोलते हुए, उन्होंने भारत में चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने का उदाहरण दिया। साथ ही कहा- उन्होंने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से भारतीय लोगों को खतरा था। हम भारतीयों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उनके पास सभी जानकारियां है, जिससे वे सही फैसले कर सकें।

भारत ने अमेरिका के कहने पर चीनी ऐप पर प्रतिबंध नहीं लगाए

उन्होंने कहा- भारत ने चीनी ऐप पर प्रतिबंध इसलिए नहीं लगाया, क्योंकि अमेरिका ने इसे ऐसा करने के लिए कहा था। उन्होंने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि वे इससे अपने नागरिकों को होने वाले खतरों के बारे में जानते थे। हालांकि, अमेरिका ने खुद किसी भी चीनी ऐप पर प्रतिबंध नहीं लगाया है।

वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी ऑर्गनाइजेशन का हेड चीन का नहीं होगा

पोम्पियो ने कहा कि अमेरिका भारत, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी ऑर्गनाइजेशन (विश्व बौद्धिक संपदा संगठन) का प्रमुख बनने से चीन के कैंडिडेट वान बिनांग को रोका जा सके। इसके बजाय सिंगापुर के डेरेन तांग को चुना जाए।

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