इटली / सार्दिनिया में पर्यटकों के लिए संदेश लिखे गए; यहां गूगल मैप के भरोसे न रहें, वरना फंस सकते हैं

पोस्टर और तख्तियां में लिखा है, इस कस्बे में गूगल मैप के भरोसे न रहें।

  • सार्दिनिया में पुलिस और प्रशासन ने पर्यटकों के लिए चेतावनी वाले संदेश लगवाएं हैं
  • गूगल मैप सेबहुत सारे पर्यटक रास्ता भटक कर खतरनाक जगहों पर पहुंच रहे, सालभर में 150 मामले सामने आए
  • प्रशासन ने कहा कि जल्द ही कागज वाले नक्शे उपलब्ध कराए जाएंगे, इन्हेंसोशल मीडिया पर भी शेयर किया जाएगा

Dainik Bhaskar

Oct 17, 2019, 10:11 AM IST

मिलान.इटली के चर्चित पर्यटन स्थल सार्दिनिया में पुलिस और प्रशासन ने पर्यटकों के लिए चेतावनी वाले संदेश लगवाएं हैं। संदेश वालेपोस्टर और तख्तियां में लिखा है, इस कस्बे में गूगल मैप के भरोसे न रहें। वरना आप फंस सकते हैं। यहां गलत नेविगेशन से पर्यटक भटक रहे हैं। गूगल मैप से बहुत सारे पर्यटक रास्ता भटक कर खतरनाक जगहों पर पहुंच रहे हैं। जिससे बार-बार फायर सर्विस या माउंटेन रेस्क्यू टीम को आना पड़ता है। बचाव दल को पर्यटकों को खोजने में भी भारी परेशानी होती है। सालभर में ऐसे 150 मामले सामने आ चुके हैं।

प्रशासन ने कहा कि जल्द ही कागज वाले नक्शे उपलब्ध कराए जाएंगे और सही नक्शे सोशल मीडिया पर भी शेयर करेंगे, जिससे लोगों को सही रास्ता ढूंढ़ने में परेशानी न हो। ऑग्लिस्ट्रा प्रांत के बौनेई इलाके के मेयर सल्वाटोर कोरिस ने भी लोगों से कहा कि वह पारंपरिक कागज के नक्शों का इस्तेमाल करें।

ऐसी घटनाओं के लगवाए संदेश
कुछ दिन पहले ही रेस्क्यू सर्विस ने कार में फंसे लोगों को बड़ी मुश्किल से निकाला। ये लोग प्रसिद्ध सफेद रेत की खोह तलाश रहे थे, मैप ने इन्हें सुप्रामो पर्वत श्रृंखला में पहुंचा दिया था। पिछले हफ्ते ही छुटि्टयां मनाने आए एक दंपती अपनी सेडान में फंस गए थे। पुलिस के मुताबिक मैप के कारण कई सारी गाड़ियां खतरनाक जगहों पर फंस चुकी हैं। कई पर्यटकों की जान भी मुश्किल में पड़ गई थी।

शिकायत मिली,सुधार करेंगे
मामले में गूगल प्रवक्ता का कहना है कि हमें सार्दिनिया में गूगल मैप नेविगेशन में समस्या की जानकारी मिली है। हम स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर इसकी जांच कर रहे हैं। इसमें जल्दी ही सुधार कर लिया जाएगा, ताकि ड्राइवरों को बेहतर ढंग से मदद मिल सके।

मेयर बोले- हम पैसे नहीं लेते, पर नुकसान तो होता ही है
मेयर सल्वाटोर कोरिस का कहना है कि रेस्क्यू अभियान हमारे लिए तो खर्चीले हैं ही, पर्यटकों को भी खासा नुकसान उठाना पड़ता है। उनके वाहनों में टूट-फूट हो जाती है। रेस्क्यू के काम के लिए समर्पित टीम और उपकरणों पर काफी खर्च होता है। इसे प्रशासन ही वहन करता है। हम पर्यटकों से इस मदद के लिए कोई राशि नहीं लेते। उन्होंने बताया कि बोर्ड और तख्तियां लगाने की पहल भी हमारी ही है।

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