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हरितालिका तीज/ सुहागिनों ने निर्जला उपवास रखा, दिनभर हुई पूजन सामग्रियों की खरीदारी



तीज के पहले हीरापुर हटिया बाजार में मेहंदी रचातीं महिलाएं।
  • मंगलवार सुबह में व्रती महिलाएं पवित्र होकर शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना कीं

Danik Bhaskar

Sep 12, 2018, 01:42 PM IST

धनबाद. हरितालिका तीज को लेकर मंगलवार को दिनभर बाजारों में चहल-पहल रहा। दिनभर पूजन सामग्रियों की खरीदारी हुई। व्रती महिलाएं परिवार के साथ विभिन्न पूजन सामग्रियों की खरीदारी की। मंगलवार सुबह में व्रती महिलाएं पवित्र होकर शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना कीं। इसके बाद घर में बने अरवा चावल, चना दाल, कद्दू की सब्जी आदि ग्रहण कर व्रत शुरू कीं।

 

भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर हरितालिका व्रत की कथा सुनेंगी
इसके बाद परिवार के लोगों ने भी प्रसाद ग्रहण किए। भादो शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि बुधवार को महिलाएं निर्जला उपवास रखकर माता गौरी एवं शिव जी की पूजा-अर्चना करेंगी। परंपरा के अनुसार शाम में माता गौरी एवं भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर हरितालिका व्रत की कथा सुनेंगी। पंडित रमेशचंद्र त्रिपाठी का कहना है कि शिव पुराण के अनुसार शिव को देवों के देव आदि देव माना गया है। शिव को अजनमा और अमर मना गया है। सबसे पहले तीज व्रत को माता गौरी ने पति स्वरूप में अखंड सुहाग की कामना से भगवान शिव के लिए कीं थीं।

 

शिव-पार्वती की मूर्ति स्थापित कर विधिविधान से पूजा-अर्चना करनी चाहिए
इसलिए तीज व्रत रखने वाली व्रती पूजा करने वाली चौकी पर केले के पत्ते और बेलपत्र से सुसज्जित कर शिव-पार्वती की मूर्ति स्थापित कर विधिविधान से पूजा-अर्चना करनी चाहिए। माता गौरी को नए वस्त्र सहित हर तरह के शृंगार अर्पित करें। पंडितों के सानिध्य में हरितालिका व्रत की कथा सुनें।

 

चतुर्थी युक्त हरितालिका तीज होती है बहुत शुभ
पंडित रमेश चंद्र त्रिपाठी एवं पंडित सुधीर पाठक का कहना है कि मंगलवार की शाम 7:54 बजे से तृतीया तिथि शुरू हो रही है जो बुधवार शाम 6:48 बजे तक है। इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी। हरितालिका तीज चंद्रोदय का व्रत है। इस बार चतुर्थी तिथि में चंद्रोदय हो रहा है। शास्त्रों के अनुसार चंद्रोदय काल का तीज पर्व बहुत ही शुभ माना गया है। तृतीया तिथि बुधवार शाम 6:48 बजे तक ही है। व्रती शाम में तृतीय तिथि में स्नान आदि कर शिव-पार्वती की मूर्ति स्थापित कर हरितालिका व्रत की कथा सुन लें। गुरुवार को शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना के बाद सूर्योदय के बाद प्रसाद ग्रहण कर पारण करें।

 

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