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चुनावी आंकड़ा / 2014 में पहली बार लोकसभा चुनाव में नोटा, झारखंड में 57% प्रत्याशी इससे हार गए

  • 14 सीटों पर 240 प्रत्याशी खड़े थे...137 को नोटा से भी कम वोट मिले
  • राजमहल और दुमका में विनिंग मार्जिन के आधे तो लोहरदगा में जीत के अंतर से ज्यादा वोट नोटा को मिले
  • 7 सीटों पर नोटा पांचवें या छठे स्थान पर रहा, धनबाद में 21 को नोटा से कम वोट

Dainik Bhaskar

Apr 16, 2019, 10:45 AM IST

रांची. अपना प्रतिनिधि चुनना जनता का अधिकार है और प्रतिनिधित्व करने उतरे नेताओं में से यदि कोई पसंद न हो तो ये राय जाहिर करना भी एक अधिकार है। ईवीएम में नोटा (नन ऑफ द एबव) का बटन मतदाताओं को यही अधिकार देताहै...और झारखंड में जनता इस अधिकार का बखूबी इस्तेमाल करती है। 2014 में पहली बार चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव में मतदाताओं को नोटा का विकल्प दिया था। जहां पूरे देश में कुल मतदाताओं में से 1.1% लोगों ने नोटा का बटनदबाया, वहीं झारखंड में ये आंकड़ 1.49% रहा। यानी राष्ट्रीय औसत से भी ज्यादा। पहली बार मिले इस अधिकार का इस्तेमाल लोगों ने कुछ ऐसा किया कि 2014 में राज्य की 14 सीटों के लिए मैदान में उतरे 240 प्रत्याशियों में से 57% यानी कुल 137 को नोटा से भी कम वोट मिले।

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