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कृषि कानूनों के खिलाफ महाराष्ट्र के किसान:180 किलोमीटर चलकर मुंबई पहुंचे 21 जिलों के किसान, आजाद मैदान से राजभवन तक मार्च की है तैयारी

मुंबईएक महीने पहले
किसानों का यह सैलाब इगतपुरी से मुंबई निकलने के दौरान का है। इसमें भारी संख्या में लाल झंडे लेकर किसान शामिल हुए थे।
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कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसान आंदोलन में अब महाराष्ट्र के किसान भी शामिल हो गए हैं। राज्य के 21 जिलों के किसान नासिक से मुंबई यानी 180 किलोमीटर तक रैली निकाल रहे हैं। शनिवार देर रात नासिक से शुरू हुई यह यात्रा सोमवार सुबह मुंबई पहुंची।

ये मुंबई के आजाद मैदान में एक सभा करेंगे। इसके बाद ये आजाद मैदान से राजभवन तक कृषि कानून के खिलाफ मार्च निकालेंगे। जिसमें NCP अध्यक्ष शरद पवार और पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे भी शामिल हो सकते हैं। पवार की पार्टी राज्य में सरकार चला रहे गठबंधन का हिस्सा है।

इस रैली का आयोजन अखिल भारतीय किसान सभा द्वारा किया गया है। संगठन ने जारी एक बयान में कहा कि एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को एक ज्ञापन भी सौंपेगा। ऑल इंडिया किसान सभा (AIKS) की महाराष्ट्र शाखा ने दावा किया है कि नासिक से करीब 15 हजार किसान शनिवार को टैम्पो, पैदल और अन्य वाहनों से मुंबई के लिए रवाना हुए हैं।

ड्रोन से हो रही है यात्रा की निगरानी
किसान रैली के मद्देनजर पुलिस ने दक्षिण मुंबई स्थित आजाद मैदान और उसके आसपास के इलाकों की सुरक्षा की विशेष तैयारी की है। इसके अलावा राज्य रिजर्व पुलिस बल (एसआरपीएफ) के जवानों की तैनाती की गई है। यात्रा पर ड्रोन से नजर रखी जा रही है।

ऐसी रही किसानों की 180 किलोमीटर की यात्रा
AIKS के मुताबिक, मुंबई के लिए कूच करने वाले किसानों ने रात्रि विश्राम के लिए इगतपुरी के पास घाटनदेवी में पड़ाव डाला था। रविवार सुबह किसान कसारा घाट के रास्ते मुंबई के लिए रवाना हुए। कसारा घट तक निकाले गए सात किलोमीटर लंबे मार्च में कई महिला किसान भी शामिल हुईं। यह मार्च सुबह नौ बजे शुरू हुआ और समापन 11:30 बजे हुआ। बाद में किसान वाहनों के जरिये आगे की यात्रा पर निकल गए।

कसारा घाट मार्च का नेतृत्व एआईकेएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक धावले और राज्य इकाई के प्रमुख किसन गुज्जर एवं महासचिव अजित नवाले ने किया। भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीटू) से जुड़े इगतपुरी और शाहपुर तहसील के फैक्टरी कामगारों ने इन किसानों पर पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया।

पवार ने केंद्र को दी थी चेतावनी

कड़कड़ाती सर्दी में दिल्ली बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के बारे में बात करते हुए पवार ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर वे किसानों की समस्या सुलझाने में कामयाब नहीं हुए, तो गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा था कि सरकार को किसानों के धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए।

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