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कृषि बिल पर विवाद:महाराष्ट्र में नहीं लागू होगा नया कृषि अध्यादेश, संसद में कानून बनने से पहले राज्य में लागू हुआ था

मुंबई24 दिन पहले
  • महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महाविकास अघाड़ी ने अगस्त में ही कृषि विधेयक को लागू कर दिया था
  • पिछले सप्ताह संसद में बिल के पारित हो जाने के बाद से पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं
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काफी समय तक दुविधा में रहने के बाद उद्धव ठाकरे सरकार ने बुधवार को नए कृषि अध्यादेश को लागू करने के अपने 10 अगस्त के आदेश पर रोक लगा दी है, जो कि अब संसद में कानून का रूप ले चुके हैं।महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महाविकास अघाड़ी ने अगस्त में ही कृषि विधेयक को लागू कर दिया था। जिसके बाद इसकी आलोचना सरकार में बैठे कुछ लोगों ने दबे स्वर में कर रहे थे। पिछले सप्ताह संसद में बिल के पारित हो जाने के बाद से पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

सूत्रों की माने तो कांग्रेस और राकांपा के दबाव में सीएम ठाकरे ने इस फैसले को वापस लेने का मन बनाया।

तीनों अध्यादेश को लागू करने का आदेश दिया था

10 अगस्त को जारी अधिसूचना में सभी कृषि उपज एवं पशुधन बाजार समितियों (एपीएमसी) और जिला कृषि सहकारी समितियों को राज्य में प्रस्तावित कानूनों पर तीन अध्यादेश को ‘सख्ती से लागू करने’ का आदेश दिया गया था। ये विधेयक, कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक 2020, कृषक (सशक्तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 थे।

अजित पवार भी बिल लागू नहीं करने की बात कह चुके हैं

कुछ दिन पहले उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने कहा था कि राज्य में कृषि कानून लागू नहीं किए जाएंगे। राज्य के राजस्व मंत्री और महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रमुख बालासाहेब थोराट ने कहा था कि सभी सत्तारूढ़ दल इन नए कानूनों के खिलाफ हैं। राज्य में उन्हें लागू नहीं करने का निर्णय सामूहिक रूप से विचार-विमर्श के बाद लिया जाएगा।

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