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सुशांत केस में सियासत तेज:सुशांत के पिता की दूसरी शादी की बात कहने वाले शिवसेना नेता संजय राउत ने बिहार सरकार पर निशाना साधा; बोले- मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है?

मुंबई2 महीने पहले
संजय राउत (दाएं) ने आरोप लगाया था कि सुशांत सिंह राजपूत और उनके पिता के बीच संबंध अच्छे नहीं थी।
  • सामना के लेख में राउत ने कहा था कि सुशांत पिता केके सिंह की दूसरी शादी से परेशान थे, उनके रिश्ते ठीक नहीं चल रहे थे
  • राउत के बयान पर कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने कहा- शिवसेना को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए, न कि टुच्चापन
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सुशांत सुसाइड केस में शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने अब बिहार सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोमवार को कहा- सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की, यह उसकी मजबूरी है। सीबीआई केंद्र सरकार की एजेंसी है। केंद्र की ऐसे मामले में अपनी मजबूरी होती है। बिहार सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी, जबकि उनका इससे कोई संबंध नहीं है। मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है?

इससे पहले राउत ने पार्टी के मुखपत्र सामना में एक लेख में सुशांत के परिवार पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि सुशांत अपने पिता केके सिंह की दूसरी शादी के कारण परेशान थे। उनके रिश्ते ठीक नहीं चल रहे थे।

इसके बाद सुशांत के पिता के वकील विकास सिंह ने कहा कि मैं बहुत दुखी हूं कि शिवसेना ऐसा कह रही है। शिवसेना में सुशांत या उनके पिता को कौन इतना करीब से जानता है कि जिससे उन्होंने यह कबूल किया कि मेरे पारिवारिक रिश्ते ठीक नहीं हैं।

परिवार ने कहा- मानहानि का दावा करेंगे
राउत के बयान पर सुशांत के चचेरे भाई और भाजपा विधायक नीरज सिंह ने कहा कि पारिवारिक मामले में इस तरह का शर्मनाक आरोप लगाना निंदनीय है। सुशांत के पिता ने सिर्फ एक शादी की थी। यह परिवार की प्रतिष्ठा पर दाग है। उन्होंने एक अखबार से बातचीत में राउत पर मानहानि का केस करने की बात कही है।

शिवसेना को टुच्चापन नहीं दिखाना चाहिए: संजय निरुपम
शिवसेना सांसद के इस बयान पर कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राउत सुशांत के परिवार के बारे में ओछी बातें कर रहे हैं। हर परिवार की कुछ कहानी होती है। शिवसेना वालों की भी बहुत हैं, लेकिन सुशांत की मौत एक संवेदनशील मामला है। शिवसेना को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए, न कि टुच्चापन।

राउत ने सुशांत के परिवार पर ये आरोप लगाए थे

  • मुखपत्र सामना के रविवार के कॉलम में संजय राउत ने कहा था कि सुशांत के पिता को गुमराह किया गया है, जिसकी वजह से उन्होंने मुंबई में हुई घटना के लिए बिहार में एफआईआर दर्ज करवाई।
  • पिछले कुछ सालों से सुशांत मुंबईकर थे। मुंबई ने उन्हें शोहरत दी थी और उनके स्ट्रगल के दिनों में बिहार उनके साथ नहीं खड़ा था।
  • सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या की थी। कई लोग बिना किसी सबूत के इसे मर्डर बता रहे हैं।
  • सुशांत की जिंदगी में दो लड़कियां आई थीं- अंकिता लोखंडे और रिया चक्रवर्ती। अंकिता ने तो सुशांत को छोड़ दिया था, लेकिन जिस रिया पर अभी आरोप लग रहे हैं, वे उनके साथ थीं। ऐसे में इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि अंकिता ने सुशांत को क्यों छोड़ा था।
  • बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे बीजेपी के आदमी हैं और उन पर 2009 में कई चार्ज लगे थे। इस पर हंसी आती है कि जिसने बीजेपी की उम्मीदवारी ली है, वह अब मुंबई पुलिस पर सवाल उठा रहा है।
  • मुंबई पुलिस इस मामले की जांच कर रही थी और दूसरे राज्य को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए था।
  • बिहार पुलिस इंटरपोल नहीं है। सब को सच जानने का अधिकार है, लेकिन यह सच नहीं है कि सिर्फ सीबीआई या बिहार पुलिस ही इसका पता लगा सकती है।
  • सीबीआई केंद्रीय एजेंसी है, लेकिन वह 'स्वतंत्र और निष्पक्ष' नहीं है। आर्टिकल में कहा गया कि गोधरा हादसे के बाद गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी सीबीआई जांच के पक्ष में नहीं थे।
  • कई राज्यों ने सीबीआई पर प्रतिबंध लगाए हैं। जब सीबीआई शारदा चिट फंड मामले की जांच के लिए पश्चिम बंगाल पहुंची थी, तो सीएम ममता बनर्जी ने न सिर्फ एजेंसी को रोका, बल्कि उसके खिलाफ केस भी दर्ज किया।

सुशांत और दिशा के केस को जोड़ने से नाराज हुए राउत
'सामना' के आर्टिकल में सुशांत और उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामलों को आपस में जोड़ने की भी आलोचना की गई। आर्टिकल में कहा गया कि दोनों मामले पूरी तरह से अलग हैं, लेकिन नेता इन्हें जोड़ रहे हैं। दिशा सालियन के साथ बलात्कार का आरोप बीजेपी के एक नेता लगा रहे हैं। ऐसा करते समय उन्होंने दिशा के परिवार के बारे में नहीं सोचा होगा।

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