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बाबा आमटे की पोती ने किया सुसाइड:अपनों के खिलाफ खड़ी हो गईं थीं शीतल, परिवार ने डिप्रेशन होने की कही थी बात

मुंबई2 महीने पहले
शीतल कई साल से महारोगी सेवा समिति (MSS) में बतौर सीईओ जिम्मेदारी संभाल रहीं थीं-फाइल फोटो।
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बाबा आमटे की पोती और महारोगी सेवा समिति की CEO शीतल आमटे का सोमवार तड़के निधन हो गया। पुलिस के मुताबिक- उन्होंने जहर का इंजेक्शन लगाकर जान दी है। उनकी मौत के बाद यह जानकारी सामने आ रही है कि जिस संस्थान में वे CEO थीं, उसी संस्थान में वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाते हुए एक सप्ताह पहले उन्होंने एक वीडियो जारी किया था। हालांकि, इस वीडियो को उन्होंने सिर्फ दो घंटे में डिलीट कर दिया था।

शीतल के आरोप पर यह थी आमटे परिवार की सफाई
इन आरोपों को खारिज करते हुए संस्था से जुड़े दिवंगत सामाजिक कार्यकर्ता बाबा आमटे के बेटे विकास और प्रकाश, उनकी पत्नियों भारती और मंदाकिनी की ओर से एक बयान जारी किया गया था। इसमें उन्होंने शीतल के आरोपों को बेबुनियाद बताया था। शीतल विकास आमटे की बेटी थीं। आमटे परिवार की ओर से जारी बयान में कहा गया,'महारोगी सेवा समिति, वरोरा, देश का एक प्रमुख सामाजिक सेवा संगठन है। इसने वंचितों के विकास को दिशा और प्रेरणा प्रदान की है। यहां लाखों सामाजिक कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया है।

आमेट की तीन पीढ़ियां इस काम में जुटी हुई हैं। शीतल आमटे करजगी ने महारोगी सेवा समिति के काम, ट्रस्टियों और श्रमिकों के बारे में अनुचित बयान दिया है। वह मानसिक तनाव और डिप्रेशन का सामना कर रही हैं। उनकी सभी टिप्पणियां बेबुनियाद हैं। शीतल के आरोपों के कारण होने वाली किसी भी गलतफहमी को रोकने के लिए आपसी चर्चा के बाद आमटे परिवार यह बयान जारी कर रहा है।'

बाबा आमटे के बेहद करीब थीं शीतल आमटे।

इसमें आगे कहा गया है, "हम अपने सभी लाभार्थियों, श्रमिकों और सहयोगियों को आश्वस्त करना चाहते हैं कि संगठन का काम पिछले सात दशकों की परंपरा को जारी रखते हुए जारी रहेगा और लोगों से किसी भी झूठे प्रचार पर विश्वास न करने की अपील करते हैं।"

जल्द एक डिटेल स्टेटमेंट जारी करने वाली थी शीतल
परिवार के इस बयान के बाद शीतल और गौतम कराजगी ने एक बयान में कहा था,'हमारे दादा बाबा आमटे और साधना आमटे ने जो हमें सिखाया हम उसके साथ खड़े हैं। सही समय पर हम इस मामले में एक डिटेल स्टेटमेंट जारी करेंगे। हम लोगों से आग्रह करते हैं कि वे हम पर भरोसा करें। हम मीडिया से आग्रह करेंगे कि वे कोई भी स्टेटमेंट हमारे समर्थन या खिलाफ बिना हमारी पुष्टि के जारी नहीं करें।'

वे कई साल से अपने पति के साथ कुष्ट रोगियों की देखरेख कर रही थीं।

ट्रस्ट में सीईओ थीं शीतल
अपने सामाजिक कार्यों, विशेष रूप से कुष्ठ रोगियों की सेवा के लिए बाबा आमटे को देश के दूसरे सर्वोच्च पुरस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। 1959 में महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के वरोरा में स्थापित, आनंदवन को महारोगी सेवा समिति (MSS) द्वारा संचालित किया जाता है, जो एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट है, जिसमें विकास आमटे वर्तमान में सचिव हैं और शीतल करजगी सीईओ थीं।

MSS के तहत दो प्रोजेक्ट्स, लोक बिरादरी प्रकल्प(1967) और हेमलकसा(1973) में शुरू हुआ। हेमलकसा प्रोजेक्ट को डॉ प्रकाश और डॉ मंदाकनी आमटे और उनके बेटों दिगंत, अनिकेत और उनकी पत्नियों द्वारा संचालित किया जा रहा है।

आनंदवन में नियंत्रण को लेकर भाई संग चल रहा था विवाद

आनंदवन और सोमनाथ पर नियंत्रण को लेकर शीतल (41) और उनके भाई कौस्तुभ (43) के बीच प्रतिद्वंद्विता में वर्तमान टकराव की स्थिति उत्पत्ति हुई। शीतल ने कौस्तुभ के खिलाफ अनियमितताओं के कई आरोप लगाए थे, जिसके कारण उन्होंने पांच साल पहले एमएसएस ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया था। कौस्तुभ के इस्तीफे के बाद, उन्होंने संगठन के कुछ पुराने लोगों को भी हटा दिया था।

ट्रस्ट की एक मीटिंग के बाद वीडियो जारी कर लगाया था आरोप
शीतल ने कहा था, संगठन को जीवित रहने के लिए अपने कामकाज के तरीकों को बदलने की जरूरत है और उन परिवर्तनों को भ्रमित करने के लिए इन्हें गलत करार दिया गया। ट्रस्ट की 29 अक्टूबर को हुई एक मीटिंग में कौस्तुभ नाम के सदस्य की एंट्री को लेकर हुए विवाद के बाद शीतल ने कौस्तुभ, अनिकेत और प्रकाश आमटे पर कई आरोप लगाते हुए एक वीडियो जारी किया था। हालांकि, इस वीडियो को सिर्फ दो घंटे के भीतर फेसबुक से हटा दिया गया। हालांकि, शीतल ने उस वीडियो को हटाने को लेकर कोई भी स्पष्टीकरण नहीं दिया था। इस वीडियो के हटाने के एक दिन बाद ही उन्होंने आत्महत्या कर ली है।

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