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साईं के दरबार में ड्रेस कोड:शिरडी के मंदिर में भारतीय परिधान पहन कर आने को कहा गया, तृप्ति देसाई ने जल्द इस नियम को बदलने की दी चेतावनी

शिरडी2 महीने पहले
मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि उन्होंने सिर्फ भारतीय परिधान पहन कर आने की अपील की है, वे लोगों से जबरदस्ती इसे मानने को नहीं कह रहे हैं।
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शिरडी के साईं मंदिर ने भक्तों के दर्शन को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत अब मंदिर में सिर्फ भारतीय परिधान पहन कर आने वालों को ही मंजूरी मिलेगी। संस्थान का कहना है कि कुछ दिनों से यह शिकायत आ रही थी कि कुछ श्रद्धालु छोटे कपड़े पहनकर दर्शन के लिए आ रही हैं। इस बीच भूमाता ब्रिगेड की प्रमुख तृप्ति देसाई ने चेतावनी देते हुए कहा है कि मंदिर ट्रस्ट को ऐसे बोर्ड हटाना चाहिए, नहीं तो हम इसे अपने तरीके से हटायेंगे।

मंदिर प्रशासन ने कोरोना का हवाला देते हुए सभी लोगों से इन नियमों का पालन करने की गुजारिश की है। मंदिर ट्रस्ट ने परिसर में इस बाबत नोटिस भी लगाया है। उस बोर्ड पर लिखा गया है, "श्री साईं भक्तों से अनुरोध है कि आप पवित्र जगह में पधार रहे हैं। अतः आपको भारतीय संस्कृति के अनुरूप वेशभूषा परिधान करने की विनती है।"

मंदिर परिसर में कई जगह इसी तरह के बोर्ड लगे हैं।

कई भक्तों को मंदिर से लौटाया गया
ट्रस्ट के मुताबिक, कई लोगों की शिकायत आने के बाद उन्होंने यह कदम उठाया है। शिकायत करने वालों में कई महिलाएं भी शामिल थीं। मंदिर के नए नियम का असर अब दिखने भी लगा है। वेस्टर्न ड्रेस में मंगलवार को दर्शन के लिए पहुंचे कई भक्तों को सुरक्षा गार्ड ने वापस लौटा दिया गया।

विवाद होने पर मंदिर की सफाई
हालांकि, साई संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कान्हुराज बागटे ने बताया,'हम केवल सुझाव, अनुरोध और अपील कर रहे हैं। हमने भक्तों से दर्शन के लिए आते वक्त भारतीय परिधान पहनने की अपील की है, कोई सख्ती नहीं की और ना ही कोई ड्रेस कोड लागू किया है।

मंदिर का यह फैसला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन
साईं बाबा मंदिर में प्रवेश को लेकर जारी ड्रेस कोड पर भूमाता ब्रिगेड की प्रमुख तृप्ति देसाई ने कहा है,'भारत में संविधान है और संविधान ने सभी को अपनी मर्जी से बोलने और कपड़े पहनने की स्वतंत्रता दी है। मंदिर में किस तरह के कपड़े पहने चाहिए इसका ध्यान सभी भक्तों को होता है। ऐसे में इस तरह का फरमान जारी करना और बोर्ड लगाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन है। हमने देखा है कि शिरडी समेत कई मंदिरों में पुजारी अर्धनग्न होते हैं, वे सिर्फ धोती पहनते हैं लेकिन उनपर कोई रोक नहीं लगाता। इसीलिए शिरडी संस्थान को ऐसे बोर्ड तुरंत निकालने चाहिए, नहीं तो हम खुद इसे निकालंगे।"

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