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सर्जरी के बाद हुई थी महिला की मौत:पुणे के दो डॉक्टरों को 10 साल की कैद, आयुर्वेद की डिग्री थी और इलाज ऐलौपेथी से करते थे; कोर्ट ने गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराया

पुणे24 दिन पहले
राजश्री की फाइल फोटो। कोर्ट ने इस मामले में डॉक्टरों पर गैर इरादतन हत्या का दोषी माना है।
  • मामला 8 साल पुराना 2012 का है, महिला की डिलीवरी और नसबंदी की सर्जरी के बाद हुए कॉम्पलिकेशन के बाद मौत हो गई थी
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सर्जरी के बाद महिला की मौत मामले में पुणे की एक स्थानीय अदालत ने दो डॉक्टरों को 10 साल की सजा सुनाई है। दोषी ठहराए गए दोनों डॉक्टरों के पास आयुर्वेद की डिग्री थी और वह ऐलौपेथी तरीके से न सिर्फ इलाज कर रहे थे, बल्कि सर्जरी तक कर थे। कोर्ट ने दोनों को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराया है। बताया जा रहा है कि राज्य में यह पहली बार है जब दो डॉक्टरों को इस तरह के केस में 10 साल की सजा हुई है।

मामला 8 साल पुराना है। 21 साल की राजश्री अनिल जगताप को 30 अप्रैल 2012 को डॉ. शिम्पी के अस्पताल में दूसरी गर्भावस्था पर सिजेरियन डिलीवरी के लिए भर्ती कराया गया था। डिलीवरी के बाद हुई ट्यूबेक्टॉमी यानी नसबंदी के दौरान राजश्री को कॉम्पलिकेशन हुआ और ज्यादा ब्लड बहने से उनकी हालत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें दूसरे हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया। वहां भी एक अन्य डॉक्टर ने उनका ऑपरेशन किया और इसके अगले दिन उनकी मौत हो गई।

दोनों के पास आयुर्वेदिक मेडिसिन की डिग्री थी
इस घटना के कुछ दिन बाद परिवार की और से दोनों डॉक्टरों जितेंद्र शिम्पी और सचिन देशपांडे पर केस दर्ज करवाया गया। सीएमओ के आदेश पर पुणे के एक सरकारी हॉस्पिटल के डॉक्टरों के पैनल ने इस मामले की जांच की। जांच में सामने आया कि दोनों डॉक्टरों के पास आयुर्वेदिक मेडिसिन की डिग्री थी और वे एलोपैथिक पद्दति से मरीजों का इलाज कर रहे थे। इसके बाद दोनों को गैर इरादतन हत्या और बॉम्बे नर्सिंग होम पंजीकरण अधिनियम के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। हालांकि, कुछ दिनों में उन्हें जमानत मिल गई थी।

कोर्ट ने गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया

मामले में पुणे के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीआर जगदाले की अदालत ने मंगलवार को डॉक्टर जितेंद्र शिम्पी और सचिन देशपांडे को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 के तहत 10 साल कारावास की सजा दी। दोनों को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराया गया है। शिम्पी को बॉम्बे नर्सिंग होम पंजीकरण अधिनियम के प्रावधान के तहत छह महीने के साधारण कारावास की सजा भी सुनाई गई है 10 साल से अतिरिक्त होगी।

दोनों को मृतका के पति को 2.5 लाख रुपए का जुर्माना देने का भी आदेश दिया गया है। इस मामले के एक अन्य आरोपी एनेस्थिसियोलॉजिस्ट डॉ. वीबी अग्रवाल को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है।

9 गवाहों के बयान के आधार पर दिया फैसला
9 गवाहों के बयान और अभियोजन पक्ष द्वारा पेश सबूत के आधार पर अदालत ने दोनों को गैर इरादतन हत्या का दोषी पाया है। अदालत ने अपने आदेश में जांच अधिकारी अमोल चौधरी और अभियोजक राजेश कावेडिया द्वारा किए गए प्रयासों की भी सराहना की।

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