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जब राहत ने जेहादी कहे जाने पर इंदौर से ललकारा:राहत इंदौरी ने सीएए के विरोध में धरने में कहा था- एक ही शेर उड़ा देगा परखच्चे तेरे... तू समझता है ये शायर है, कर क्या लेगा

इंदौरएक महीने पहले
राहत इंदौरी 6 फरवरी 2020 की रात इंदौर के बड़वाली चौकी पर चल रहे धरने में शामिल हुए थे। इसमें उन्होंने सीएए को लेकर सवाल पर उठाए थे।- फाइल फोटो
  • बड़वाली चौकी पर सीएए के विरोध में धरना चल रहा था, इसमें 6 फरवरी की रात राहत इंदौरी शामिल हुए थे
  • राहत ने कहा था- मैं मर जाऊं तो मेरी एक अलग पहचान लिख देना, लहू से मेरी पेशानी पे हिन्दुस्तान लिख देना
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इंदौर में बड़वाली चौकी पर नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में दिल्ली के शाहीनबाग की तर्ज पर कई दिनों से धरना प्रदर्शन चल रहा था। इसमें 6 फरवरी 2020 की रात राहत इंदौरी भी शामिल होने पहुंचे थे। तब आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए राहत ने कहा था कि कोई भी शरीफ आदमी चाहे वह हिंदू, मुस्लिम, सिख या ईसाई हो, वह इस कानून से इत्तेफाक नहीं रखता।

केरल में एक नेता के वायरल ऑडियो पर राहत साहब ने जवाब दिया था- ‘‘मैं 77 साल का हो गया हूं, मुझे अभी तक मालूम नहीं पड़ा कि मैं जेहादी हो गया हूं।’’ उन्होंने कहा- मैं मर जाऊं तो मेरी एक अलग पहचान लिख देना, लहू से मेरी पेशानी पे हिन्दुस्तान लिख देना। ऑडियो में कहा जा रहा था कि उर्दू का शायर राहत इंदौरी जेहादी है।​​​​

राहत बोले- उठा शमशीर, दिखा अपना हुनर, क्या लेगा, ये रही जान, ये गर्दन है, ये सर, क्या लेगा...एक ही शेर उड़ा देगा परखच्चे तेरे, तू समझता है ये शायर है, कर क्या लेगा।

इसके बाद उन्होंने सुनाया- आंखों में पानी रखो, होंठो पे चिंगारी रखो, जिंदा रहना है तो तरकीबे बहुत सारी रखो...मैं वहीं कागज हूं, जिसकी हुकूमात को है तलब, दोस्तों मुझ पर कोई पत्थर जरा भारी रखो।

डॉक्यूमेंट हमारे अजायबघरों में रक्खे हैं...
नागरिकता साबित करने के लिए दस्तावेज दिखाने पर राहत ने तंज कसा। एक शेर सुनाया था- घरों के धंसते हुए मंजरों में रक्खे हैं, बहुत से लोग यहां मकबरों में रक्खे हैं... हमारे सर की फटी टोपियों पे तंज न कर, ये डॉक्यूमेंट हमारे अजायबघरों में रक्खे हैं।

यह लड़ाई सिर्फ मुसलमानों की नहीं...
इस शेर के बाद राहत ने कहा कि मैं समझता हूं कि नरेन्द्र मोदी को इससे बड़ा डॉक्यूमेंट कोई नहीं दे पाएगा, जो हमारे पास मौजूद है। और सिर्फ 70 साल के नहीं, बल्कि 700 साल के मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ मुसलमानों की नहीं है...यह लड़ाई हिंदू, सिख, ईसाई...सब हिंदुस्तानियों की है। हर मजहब की लड़ाई है यह।

अगर खिलाफ हैं होने दो जान थोड़ी है, ये सब धुआं है कोई आसमान थोड़ी है।
लगेगी आग तो आऐंगे घर कई जद में, यहां पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है।
हमारे मुंह से जो निकले वहीं सदाकत है..हमारे मुंह में तुम्हारी जबान थोड़ी है।

और जो आज साहिब-ए-मसनद है। उन्होंने कहा कि इस शेर पर दाद मत दीजिएगा, इस शेर पर कहिएगा इंशाअल्लाह।
जो आज साहिब-ए-मसनद हैं कल नहीं होंगे, किरायेदार हैं, कोई जाती मकान थोड़ी है...सभी का खून है शामिल यहां की मिट्‌टी में, किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है।

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