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राहत इंदौरी के यादगार शेर:मैं मर जाऊं तो मेरी एक अलग पहचान लिख देना, लहू से मेरी पेशानी पे हिन्दुस्तान लिख देना

इंदौरएक महीने पहले
अब हमारे बीच नहीं रहे राहत साहब।
  • राहत इंदौरी का कोरोनावायरस से 70 साल की उम्र में निधन हो गया
  • राहत ने आज सुबह ट्वीट कर कोरोना संक्रमित होने की जानकारी दी थी
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मशहूर शायर राहत इंदौरी का मंगलवार शाम दिल का दौरा पड़ने से इंतेकाल हो गया। सुबह उन्होंने ट्वीट करके कोरोना पॉजिटिव होने की जानकारी दी थी। राहत अपने बेबाक अदांज और बेहतरीन शायरी के लिए जाने जाते रहे हैं। आइए उनके कुछ शेरों पर नजर डालते हैं...

  • एक ही शेर उड़ा देगा परखच्चे तेरे... तू समझता है ये शायर है कर क्या लेगा
  • मैं मर जाऊं तो मेरी एक अलग पहचान लिख देना, लहू से मेरी पेशानी पे हिन्दुस्तान लिख देना।
  • उठा शमशीर, दिखा अपना हुनर, क्या लेगा, ये रही जान, ये गर्दन है, ये सर, क्या लेगा...एक ही शेर उड़ा देगा परखच्चे तेरे, तू समझता है ये शायर है, कर क्या लेगा।
  • आंखों में पानी रखों, होंठो पे चिंगारी रखो, जिंदा रहना है तो तरकीबे बहुत सारी रखो...मैं वहीं कागज हूं, जिसकी हुकूमात को हैं तलब, दोस्तों मुझ पर कोई पत्थर जरा भारी रखो।
  • घरों के धंसते हुए मंजरों में रक्खे हैं, बहुत से लोग यहां मकबरों में रक्खे हैं...हमारे सर की फटी टोपियों पे तंज न कर, ये डाक्युमेंट हमारे अजायबघरों में रक्खे हैं।
  • अगर खिलाफ हैं होने दो जान थोड़ी है, ये सब धुआं है कोई आसमान थोड़ी है। लगेगी आग तो आऐंगे घर कई जद में, यहां पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है। हमारे मुंह से जो निकले वहीं सदाकत है..हमारे मुंह में तुम्हारी जबान थोड़ी है।
  • जो आज साहिब-ए-मसनद हैं कल नहीं होंगे, किरायेदार हैं, कोई जाती मकान थोड़ी है...सभी का खून है शामिल यहां की मिट्‌टी में, किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है।
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