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स्मृति शेष:अपने बुजुर्गों का हिंदुस्तान देखना चाहते थे राहत इंदौरी, कहते थे- मैं किस हिंदुस्तान का ख्वाब देख रहा हूं समझ नहीं पा रहा

भोपालएक महीने पहले
राहत साहब जब भी किसी को फोन लगाते और उसका फोन इंगेज आता और बात होने पर वे हंसते हुए कहते थे कि इतनी तो मैं अगर कोशिश करता अल्लाह से मुलाकात की तो हो जाती। 
  • मशहूर शायर राहत इंदौरी का निधन हो गया। इंदौर के अरविंदो अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली, राहतजी का भोपाल से गहरा नाता रहा है
  • पारिवारिक कार्यक्रमों में वे अकसर भोपाल आया करते थे, सितंबर 2019 में वे एक निजी कार्यक्रम में शिरकत करने आए थे
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मशहूर शायर राहत इंदौरी का निधन हो गया। इंदौर के अरविंदो अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली। राहतजी का भोपाल से गहरा नाता रहा है। उनके कई रिश्तेदार भोपाल में रहते हैं। पारिवारिक कार्यक्रमों में वे अकसर भोपाल आया करते थे। सितंबर 2019 में वे एक निजी कार्यक्रम में शिरकत करने आए तो उन्होंने मीडिया से बात करते हुए खुलकर अपने मन की बातें कहीं। राहत साहब जब भी किसी को फोन लगाते और उसका फोन इंगेज आता और बात होने पर वे हंसते हुए कहते थे कि इतनी तो मैं अगर कोशिश करता अल्लाह से मुलाकात की तो हो जाती।

राहत इंदौरी ने जो कहा

  • मैं अपने बुजुर्गों का हिंदुस्तान देखना चाहता हूं मैं किताबों में पढ़ा और बुजुर्गों से सुना हिंदुस्तान का ख्वाब देखता हूं मेरा हिंदुस्तान गंगा जमुनी तहजीब वाला है।
  • मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि मैं किस हिंदुस्तान का ख्वाब देख रहा हूं और यह सच होगा कि नहीं लेकिन मेरा हिंदुस्तान तो प्यारा मोहब्बत और भाईचारे का मकतब है। ।
  • मैं जिस हिंदुस्तान की तलाश कर रहा हूं उस हिंदुस्तान को मैंने किताबों में पढ़ा है। बुजुर्गों से सुना है। मैं जो तसव्वुर कर रहा हूं वह हिंदुस्तान मुझे मिलेगा या नहीं मिलेगा यह तो पता नहीं लेकिन मैंने उसकी तस्वीर अपने दिलो-दिमाग में बना रखी है।
  • देखिए उर्दू अलीगढ़ से चलकर फैजाबाद हैदराबाद होती हुई न्यूयॉर्क और वाशिंगटन पहुंच गई है। उर्दू अखबारों रिसाले विदेशों में भी शायर हो रहे हैं उर्दू की मिठास और मूल्य लोगों को खूब भा रही है यह सीरीज जवान है और इसका दायरा दुनिया भर में बढ़ता जा रहा है।
  • मै ना मोदी से कोई उम्मीद करता हूं और ना ही किसी अन्य पार्टी से उम्मीद रखता हूं। पार्टियां अपने सियासी दायरे में काम करती हैं। किसी एक शख्स को सबको संतुष्ट करना नामुमकिन है।
  • मेरा यह मानना है कि हिंदुस्तान तरक्की करें और दुनिया में मोहब्बत और एकता की मिसाल बने।
  • 70 साल से देखा जा रहा है कि अदब की दुनिया में फिरके बने हुए हैं। अदब बा अदब हो गया है। इसके लिए बेहतर यह होगा कि अपना काम अलग होकर करते रहो।
  • उर्दू की तरक्की और उसकी हिफाजत के लिए सरकार पर इल्जाम लगाना ठीक नहीं है। उर्दू की तरक्की उसके बोलने वाले उसके लिखने वालों और उनके लोगों के हाथों में है।
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