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पर्यावरण संरक्षण:धोरों में 15 साल की मेहनत से 40 बीघा जमीन में 30 से अधिक प्रजाति के फल व छायादार पेड़ों का बगीचा किया विकसित

चाैहटनएक महीने पहले
40 बीघा जमीन में लहलहा रहे फल व छायादार पेड़।
  • रेतीली भूमि पर बादाम, नारियल, केसर, काजू, जायफल के पौधे लगे
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चौहटन रेतीली भूमि पर बादाम, केला, नारियल, अंगूर की बेले, केसर, काजू, जायफल, मुंजाली सहित एक सौ से अधिक किस्मों के पौधे लगाकर रेगिस्तान काे नखलिस्तान बना दिया है। किसान की पंद्रह सालाें की मेहनत से फलदार बगीचा तैयार हुआ है।

सीमित साधनों के बावजूद अब विभिन्न तरह के फलों के पौधे पेड़ का रूप ले रहे है तथा सीजन के अनुसार फलों का उत्पादन दे रहे है। लोग रोजगार के लिए पलायन कर दूसरे राज्यों में मजदूरी के लिए जाते है, लेकिन इस किसान ने अपनी जमीन को ही कर्मभूमि बनाया और पंद्रह साल की मेहनत के बाद अब फलदार बगीचा तैयार हो गया है।

40 बीघा जमीन पर पंद्रह सालों में तैयार हुआ बगीचा
चौहटन के पूर्व विधायक फतेहसिंह के पौते किसान रेवंतसिंह राठौड़ ने अपनी 40 बीघा जमीन पर फलदार पौधे लगाए। पंद्रह साल लगातार मेहनत के बाद अब अशोक कैंबली, हेमबली, बांस, जंगल, जलेबी, मोगरा, रातगनी, करंज, आम, रुद्राक्ष, गुलमोहर, जाल, सीताफल, अनार, केलाश, सफेदा, जेतून, बोगनबेल, गूगल, खजूर, पामटेल, काजू, बादाम, नीम, चमेली, जामून, उमबरा, मेहंदी, आस्ट्रेलियन डोब सहित एक सौ से अधिक किस्म के फल व फूलदार पौध लगाए है। इसके अलावा कई व्यावसायिक फसलें भी पैदा कर आय बढ़ा रहे है।

सैकड़ों पक्षियों का बसेरा बना बगीचा
किसान रेवंतसिंह राठौड़ अपने सहयोगी हुसैन खान, सुभान खान, जयसिंह व बलराम भील के सहयोग से सुबह आठ से लेकर शाम पांच बजे तक पौधों की लगातार सिंचाई करते है। चालीस बीघा जमीन में विभिन्न प्रजाति के सैकड़ों प्रजातियों का बसेरा है। इन्होंने पक्षियों के लिए अलग से एक पानी का कुंड बनाया है। ताकि पक्षियों को पेयजल की कमी महसूस न हो। हमेशा पक्षियों के लिए सुविधा उपलब्ध करवाने में अग्रसर रहते है।

लघु फिल्मों की शूटिंग के लिए उपयुक्त
यहां पर छोटे स्तर पर लघु फिल्मों का भी कई बार फिल्मांकन हुआ है। फलदार बगीचे को देखने के लिए आसपास के लोगों सहित दूर से भी लोग आते है। प्री वेडिंग शूटिंग सहित विभिन्न छोटे बजट की कई लघु फिल्में भी यहां पर शूट हो चुकी है। रेवंतसिंह बताते है कि लगातार देखभाल की वजह से भी पर्यावरण के विपरीत कई फलदार पौधे अब पेड़ बन चुके है। यह देखकर सुखद अहसास होता है।

खेत में खड़े फलदार पेड़ देते हैं सुकून

  • सहयोगियों के साथ 40 बीघा जमीन पर विभिन्न प्रकार के फलदार व छायादार पेड़ लगाए है। मैने विभिन्न फलदार पेड़ खेत में विकसित करने का सपना देखा था जो पंद्रह साल की मेहनत के बाद अब पूरा हुआ है। खेतों में लहलहा रहे पेड़ सुकून देते है। इनकी देखभाल के साथ ही और पेड़ भी लगाए जा रहे है। - रेवंतसिंह राठौड़, किसान
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