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जांच:रिश्वत लेने पर निलंबित प्रो. आरपी सिंह के जेएनवीयू कार्यकाल की भी होगी जांच

जोधपुरएक महीने पहले
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महर्षि दयानंद सरस्वती यूनिवर्सिटी में रिश्वत लेने पर निलंबित हुए कुलपति प्रो. आरपी सिंह के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में कुलपति रहने के कार्यकाल की जांच होगी। राज्य सरकार के इसके लिए निर्देश के बाद जेएनवीयू में हड़कंप मच गया है। प्रो. सिंह के समय भर्ती से लेकर कई ऐसे कार्यों हुए हैं, जिन पर सवाल उठे हैं। पूर्व कुलपति प्रो. सिंह का तीन साल का कार्यकाल पदभार संभालने के बाद से ही विवादों के घेरे में बना रहा था।

विवि में 6 मई 2015 से 5 मई 2018 तक के कार्यकाल में नियम कायदों को ताक पर रखकर कई निर्णय लिए गए। इनमें करोड़ों के ठेके नियम विरुद्ध आवंटित करना, सामूहिक नकल के घेरे में आने के बाद भी काॅलेजों की मान्यता बहाल करना, सरकार के इनकार के बावजूद शिक्षक भर्ती करना प्रमुख थे।

नियुक्तियां हों या खरीद के मामले, सभी जांच के दायरे में
सबसे अहम रहा करीबी मित्र की नियुक्ति। इसमें प्रो. सिंह ने अपने मित्र डॉ. राजेश दूबे को एचआरडीसी सेंटर की भर्ती निकालकर नियुक्त कर दिया। इसको लेकर हाल के दिनों तक विवाद रहा। इसके अलावा एक टेलीकॉम कंपनी को विवि में एड करने की इजाजत दे दी, लेकिन उसकी एवज में विवि को कुछ फायदा नहीं हुआ।

यह एमओयू बाद में आए कुलपति ने तोड़ दिया। इसके अलावा निर्माण संबंधी करोड़ों के काम भी करवाए गए। इसी क्रम में विवि में 2016 से पहले ऑनलाइन कार्य एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज का कम्प्यूटर साइंस विभाग 10 लाख रुपए में कर रहा था। फिर प्रो. सिंह ने अचानक दिल्ली की एक कंपनी को ऑनलाइन टेंडर कर करीब 4 करोड़ रुपए में ठेका आवंटित कर दिया।

पूर्व में 9 काॅलेजों में परीक्षा के दौरान सामूहिक नकल होना प्रमाणित हुआ। इसके संबंध में काॅलेजों की मान्यता निरस्त कर दी गई थी। इसके अलावा निजी काॅलेजों पर पहले तो मनमाने तौर पर ही लाखों रुपए की पेनल्टी लगाई, फिर कुछ काॅलेजों के मामले में मध्यस्थता के बाद पेनल्टी कम करने का खेल जारी रहा।

इनमें सबसे अहम रहा कि प्रो. सिंह ने सरकार की अनुमति के बगैर ही कुछ विभागों में नियुक्तियां कर लीं। इसमें आर्ट्स के दो विभागों और इंजीनियरिंग में शिक्षकों की भर्ती की गई। इसमें कुल 27 शिक्षकों की नियुक्तियां हुई हैं। गैर शैक्षणिक कार्मिकों की भर्ती भी निकाली थी, लेकिन वह यह भर्ती भर नहीं सके। इसके अलावा विवि में 100 फीट ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज लगाने और सात फीट ऊंची तांबे की स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा स्थापित करने में भी घोटाला हुआ।

विवि ने इन दोनों की बगैर निविदा प्रक्रिया के बाढ़, चक्रवात, तूफान जैसी अकल्पित घटना बताकर खरीद की। इसमें तिरंगे झंडे के लिए 11.34 लाख और विवेकानंद की प्रतिमा के लिए 9.81 लाख की प्रतियोगी बातचीत के बावजूद विवि प्रशासन ने दोनों कंपनियों को एक मुश्त 25 लाख रुपए का भुगतान कर दिया। सूरसागर विधायक सूर्यकांता व्यास की ओर से यह मामला विधानसभा में उठाया गया था। प्रो. सिंह ने नियमों से परे जाकर काम किया। प्रोफेसरों को कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक पदों पर नियुक्त कर दिया।

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