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बाराबंकी:कोरोना संक्रमित वार्ड ब्वाय ने कोविड अस्पताल के बदइंतजामी की खोली पोल, सीएमओ बोले- उसे कुछ ज्यादा ही उम्मीदें हैं

बाराबंकीएक महीने पहले
कोरोना संक्रमित वार्ड बॉय ने वीडियो वायरल कर कहा कि, उसे भर्ती होने के 16 घंटे बीत जाने के बाद भी कोई डॉक्टर नहीं देखने आया।
  • रविवार को संक्रमित निकला था देवा सीएचसी में तैनात वार्ड ब्वाय
  • हिंद अस्पताल में बने लेवल वन में चल रहा इलाज
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उत्तर प्रदेश में बाराबंकी जिले के एक कोरोना संक्रमित वार्ड ब्वाय ने वीडियो जारी कर लेवल-1 अस्पताल के सुविधाओं की पोल खोली है। आरोप है कि, वह दो दिनों से अस्पताल में भर्ती है, लेकिन अब तक उसे देखने के लिए कोई डॉक्टर नहीं आया है। वहीं, इस मामले में सीएमओ डॉक्टर रमेश चंद्रा ने कहा कि वार्ड ब्वाय की अपेक्षाएं बहुत ज्यादा हैं। इसलिए वह वीडियो वायरल कर रहा है। 

मैंने चार माह बिना छुट्टी के देशसेवा की, बदले में कोरोनावायरस मिला

बाराबंकी जिले में चंद्रा अस्पताल को लेवल-1 का अस्पताल बनाया गया है। देवा सीएचसी में कार्यरत वार्ड ब्वाय मनोज कुमार रविवार को कोरोना संक्रमित निकला। मंगलवार को उसे चंद्रा अस्पताल में जिला प्रशासन ने भर्ती करवा दिया। वॉर्ड ब्वाय ने कहा कि 16 घंटे के भीतर मुझे कोई देखने नहीं आया, जो लोग यहां पहले से आइसोलेशन वार्ड में भर्ती हैं। उन्होंने बताया कि पिछले छह दिनों से कोई साफ सफाई नहीं हुई है। अगर देश की सेवा करते हुए मैं कोरोना पॉजिटिव पाया गया, तो यह सिर्फ मेरी जिम्मेदारी नहीं है। मैंने 10 बार सैंपलिंग की और मुझे सिर्फ एक बार पीपीई किट मिली। मैं पिछले 10 साल से स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हूं।

पिछले चार महीने से एक भी दिन छुट्टी नहीं ली और मैंने अपनी ड्यूटी की। मुझे इसके बदले में कोरोनावायरस मिला है। मुझे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी के रुप में मुझे कम से कम मूलभूत सुविधाएं दी जानी चाहिए। मैं नहीं जानता कि ये मेरा सौभाग्य है या दुर्भाग्य है। मैंने पिछले 16 घंटों में इतनी समस्या का सामना किया है जो आपको बता भी नहीं सकता।

सीएमओ ने मामले में दी अपनी सफाई

सीएमओ डॉक्टर रमेश चंद्र ने कहा कि वार्ड ब्वाय ने काफी मेहनत की है और इसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। मगर यह लक्षणविहीन है और ऐसी दशा में बहुत ज्यादा देखभाल जरूरी नहीं होती है, जो जरूरी है वह उपचार उसे दिया जा रहा है। इस अस्पताल में जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी भी भर्ती है और उन्होंने प्राइवेट वार्ड ले रखा है। यह भी वैसा ही अलग कमरा चाहता था, जो नहीं मिला। इस कारण उसने वीडियो जारी किया है। इस वार्डबॉय की अपेक्षाएं ज्यादा हैं और जब वह नहीं पूरी हो रही तो सवाल खड़ा कर रहा है।

सरकार का जो निर्देश है कि हर मरीज को अलग बेड, खाना और नाश्ता के साथ जरूरी उपचार दिया जाए, वह दिया जा रहा है। जहां तक पीपीई किट न मिलने की बात है तो यह किट उसे ही दी जाती है जो सैंपलिंग करता है। वार्डबॉय के लिए किट जरूरी नहीं होती है। चन्द्रा अस्पताल प्राइवेट है, जिसे जिलाधिकारी के आदेश पर एक्वायर किया गया है शेष सारा स्टाफ सरकारी है।

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