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श्रीकृष्ण जन्मभूमि केस में सुनवाई:मथुरा की अदालत ने शाही मस्जिद पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान का दावा खारिज किया, 13.37 एकड़ जमीन पर भी किया गया था दावा

मथुरा24 दिन पहले
स्थानीय कोर्ट में यह केस भगवान श्रीकृष्ण विराजमान, कटरा केशव देव खेवट, मौजा मथुरा बाजार शहर की ओर से वकील रंजना अग्निहोत्री और 6 अन्य भक्तों की ओर से दायर किया गया है।
  • सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन समेत 7 लोग इस केस में वादी
  • वादी पक्ष ने कहा कि इस फैसले के बाद अब वह हाईकोर्ट में अपील करेंगे
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श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद मामले में 13.37 एकड़ जमीन के मालिकाना हक को लेकर दायर याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है। याचिका में श्रीकृष्ण जन्मस्थान से ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग की गई थी। सिविल कोर्ट के न्यायाधीश ने सुनवाई के बाद यह फैसला लिया।

इससे पहले सिविल जज सीनियर डिवीजन छाया शर्मा की कोर्ट में सुनवाई हुई थी। इस दौरान इस बात को लेकर बहस हुई कि क्या इस कोर्ट में इस वाद को सुने जाने का संवैधानिक अधिकार है? याचिकाकर्ता के वकील कमलेश शुक्ला ने कहा कि सेक्शन 9 में कोर्ट को असीमित अधिकार है और जिस डिक्री को रद्द किए जाने की मांग है, वह इसी कोर्ट से है। तर्क सुनने के बाद जज ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

वादी पक्ष ने कहा- हाईकोर्ट में करेंगे अपील

बताया गया है कि इस मुकदमे में 1968 में हुए समझौते और 1991 एक्ट में हुई टिप्पणी, जिसमें 1947 से पहले धार्मिक स्थलों की स्थिति यथावत रखने और कोई भी विवाद न्यायालय में न सुनने के आदेश को ही कारण माना है। वहीं वादी पक्ष के वकील करुणेश शुक्ला ने बताया कि कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका को खारिज कर दी है कि इसको स्वीकार करने का कोई कारण नहीं है। हम जल्द ही उच्च न्यायालय में अपील दायर करेंगे।

यह है मामला

श्रीकृष्ण विराजमान और सात अन्य ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर 25 सितंबर को स्थानीय कोर्ट में एक याचिका दाखिल की। 28 सितंबर को जज छाया शर्मा की कोर्ट में जैसे ही इस केस की फाइल पहुंची तो उन्होंने महज पांच मिनट के अंदर इसकी अगली तिथि तय कर दी थी। जिसे बुधवार को खारिज कर दिया गया।

मथुरा कोर्ट परिसर में वकील रंजना अग्निहोत्री, हरिशंकर जैन व विष्णु शंकर जैन। (बाएं से)

याचिका में क्या है?

भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन ने मथुरा की अदालत में सिविल केस दायर किया है। इसमें 13.37 एकड़ जमीन पर दावा करते हुए मालिकाना हक मांगा गया है और शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग की गई। इसमें जमीन को लेकर 1968 के समझौते को गलत बताया। यह केस भगवान श्रीकृष्ण विराजमान, कटरा केशव देव खेवट, मौजा मथुरा बाजार शहर की ओर से वकील रंजना अग्निहोत्री और 6 अन्य भक्तों की ओर से दायर किया गया है।

याचिका ‘भगवान श्रीकृष्ण विराजमान’ और ‘स्थान श्रीकृष्ण जन्मभूमि’ के नाम से दायर की गई है। याचिका में कहा गया कि जिस जगह पर शाही ईदगाह मस्जिद खड़ी है, वही जगह कारागार था, जहां भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था।

इस केस में Place of worship Act 1991 की रुकावट है। इस ऐक्ट के मुताबिक, आजादी के दिन 15 अगस्त 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस संप्रदाय का था, उसी का रहेगा। इस एक्ट के तहत सिर्फ रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को छूट दी गई थी।

क्या है 1968 समझौता?

1951 में श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट बनाकर यह तय किया गया कि वहां दोबारा भव्य मंदिर का निर्माण होगा और ट्रस्ट उसका प्रबंधन करेगा। इसके बाद 1958 में श्रीकृष्ण जन्म स्थान सेवा संघ नाम की संस्था का गठन किया गया था। कानूनी तौर पर इस संस्था को जमीन पर मालिकाना हक हासिल नहीं था, लेकिन इसने ट्रस्ट के लिए तय सारी भूमिकाएं निभानी शुरू कर दीं।

इस संस्था ने 1964 में पूरी जमीन पर नियंत्रण के लिए एक सिविल केस दायर किया, लेकिन 1968 में खुद ही मुस्लिम पक्ष के साथ समझौता कर लिया। इसके तहत मुस्लिम पक्ष ने मंदिर के लिए अपने कब्जे की कुछ जगह छोड़ी और उन्हें (मुस्लिम पक्ष को) उसके बदले पास की जगह दे दी गई।

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