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देवरिया सदर विधानसभा सीट:ब्राह्मणों का किस पार्टी को मिलेगा साथ? यहां का रिजल्ट देगा संकेत, पूर्व विधायक के बेटे के मैदान में आने से भाजपा को भितरघात का खतरा

देवरियाएक महीने पहले
भाजपा के विधायक जन्मेजय सिंह के निधन के बाद यह सीट खाली हुई थी।
  • देवरिया सदर सीट पर 29 साल से नहीं चुना गया है कोई ब्राह्मण कैंडिडेट
  • भाजपा से बगावत कर पूर्व विधायक जन्मेजय सिंह के बेटे ने दाखिल किया है पर्चा
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यूपी में जातीय राजनीति का हमेशा से ही बोलबाला रहा है। सत्ता की चाभी इस समय ठाकुर नेता सीएम योगी आदित्यनाथ के हाथ में है। ऐसे में विपक्ष उनके ऊपर ब्राह्मणों के उत्पीड़न का आरोप लगाता ही रहा है। पिछले दिनों कुख्यात विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद इसकी चर्चा तेज हुई थी। विपक्ष ने जनता के इस गुस्से को देखा तब सपा ने दुनिया की सबसे लंबी भगवान परशुराम की मूर्ति बनाने का एलान किया। यही नहीं मायावती ने एक कदम आगे जाकर सपा से भी भव्य मूर्ति बनाने का एलान किया। जबकि कांग्रेस से नेता जितिन प्रसाद ब्राह्मणों को लामबंद करने के लिए पिछले वर्ष से ही अभियान चला रहे हैं।

ऐसे में देवरिया सदर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव का मतदान 3 नवंबर को होना है। जानकार मानते हैं कि यूपी की 7 सीटों पर होने वाले उपचुनावों में देवरिया सदर सीट इकलौती ब्राह्मण बाहुल्य सीट है। ऐसे में यह सीट ही तय करेगी कि भविष्य में ब्राह्मण किस पार्टी के साथ होंगे।

पहली बार टॉप चार पार्टियों के कैंडिडेट त्रिपाठी है

देवरिया से कोई भी पार्टी जीते लेकिन झंडा त्रिपाठी की बुलंद करेंगे। दरअसल, भाजपा, कांग्रेस, सपा और बसपा इन टॉप चार पार्टियों से त्रिपाठी कैंडिडेट मैदान में है। ऐसा मौका पहली बार है जब ब्राह्मण जाति के चार प्रत्याशी मैदान में उतरे हैं और सभी के उपनाम के पीछे त्रिपाठी लगा है। लेकिन देवरिया सीट पर कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। भाजपा से जहां डॉ सत्य मणि त्रिपाठी को टिकट दिया गया है तो वहीं सपा से पूर्व मंत्री ब्रह्मा शंकर त्रिपाठी को टिकट मिला है। कांग्रेस ने मुकुंद भाष्कर मणि त्रिपाठी को अपना कैंडिडेट बनाया है। जबकि बसपा ने अभयनाथ त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया है।

पार्टी प्रत्याशी
भाजपा डॉ सत्य मणि त्रिपाठी
सपा ब्रह्मा शंकर त्रिपाठी
बसपा अभयनाथ त्रिपाठी
कांग्रेस मुकुंद भाष्कर मणि त्रिपाठी

भाजपा को है भितरघात का खतरा

2017 में भाजपा के जन्मेजय सिंह ने भाजपा का झंडा फहराया था। वह 2012 में भी विधायक चुने गए थे। लेकिन उनके आकस्मिक निधन के बाद उनके समर्थकों को उम्मीद थी कि उनके बेटे अजय कुमार सिंह को टिकट मिलेगा। लेकिन भाजपा ने सभी कयासों को दरकिनार करते हुए सत्य प्रकाश मणि त्रिपाठी को टिकट दिया है। भाजपा के इस रवैये से नाराज पूर्व विधायक के बेटे अजय सिंह ने निर्दलीय पर्चा भर दिया है और वह भाजपा को चुनौती दे रहे हैं।

स्थानीय पत्रकार सदानंद सिंह कहते हैं कि भाजपा अजय सिंह को टिकट देती तो उसे जनता की सहानुभूति भी मिलती और ब्राह्मण वोटों के बिखराव का भी फायदा मिलता। लेकिन इस स्थिति में भाजपा मुश्किल में है। दरअसल, अजय सिंह के खड़े होने से उनके भाजपा समर्थकों के वोट तो काटेंगे ही साथ ही ब्राह्मण वोटों में भी बिखराव तय है। ऐसे में अजय सिंह का खुद जीतना तो मुश्किल दिख रहा है। लेकिन वह भाजपा को भी नहीं जीतने देने की स्थिति में दिख रहे हैं। साथ ही जिस तरह से वह चुनाव में लगे है उससे यही दिख रहा है कि वह खुद कम जीतना चाहते हैं, भाजपा को रोकना उनका असल मकसद है। जिसका फायदा विपक्ष को मिलना तय माना जा रहा है।

नुक्कड़ सभाओं के साथ घर घर जाकर मांग रहे वोट

देवरिया के उपचुनाव में जिले के भाजपा कार्यकर्ता व नेता घर घर जाकर लोगों से वोट मांग रहे हैं तो वही प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के साथ-साथ पार्टी के कई बड़े नेता नुक्कड़ सभाओं के साथ जनसभा करते हुए देवरिया में दिखाई पड़ रहे हैं। इन सब से पीछे अन्य पार्टियां भी नहीं है। जिसके चलते कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के भी जिला स्तर के नेता से लेकर वरिष्ठ नेता देवरिया की गलियों में घूमते हुए नजर आ रहे हैं और रात रात भर कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करने के बाद सुबह से शाम तक नुक्कड़ सभाओं में भी दिखाई पड़ रहे हैं। हालात कुछ ऐसे बन गए हैं की पार्टी के छोटे से कार्यकर्ता से लगाकर बड़े कार्यकर्ताओं ने भी भाजपा को हराने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है।

ब्राह्मण-वैश्य तय करेंगे कौन सा त्रिपाठी बनेगा विधायक
देवरिया सीट के मतदाताओं पर नजर डालें तो लगभग 4 लाख मतदाता इस विधानसभा में आते हैं और सर्वाधिक बाहुल्य मतदाता ब्राह्मण ही हैं। अगर जातिगत आंकड़ों पर नजर डालें तो देवरिया सीट पर ब्राह्मण 55 हजार, 50 हजार वैश्य, 30 हजार यादव, 25 हजार मुसलमान, 22 हजार निषाद, 20 हजार ठाकुर, 16 हजार कुशवाहा, 10 हजार के आसपास राजभर, 8 हजार चौरसिया और 13 हजार सैंथवार जाति के मतदाता हैं। लेकिन हार जीत का फैसला ब्राह्मण और वैश्य कि मतदाता ही करते हैं, जिस तरफ यह मतदाता चले जाते हैं जीत उसी की पक्की मानी जाती है।

जाति आंकड़ा
ब्राह्मण 55000
वैश्य 50,000
यादव 30000
मुस्लिम 25000
निषाद 25000
ठाकुर 25000
कुशवाहा 20000
राजभर 15000
अन्य 155000

29 साल से नहीं चुना गया ब्राह्मण कैंडिडेट

देवरिया सीट पर हो रहे उपचुनाव में 29 साल बाद कोई ब्राह्मण उम्मीदवार विधायक बनेगा। 1989 में ब्राह्मण उम्मीदवार राम छबीला मिश्रा जनता दल से चुनाव जीते थे, जिसके बाद से अभी तक कोई भी ब्राह्मण इस सीट से चुनाव नहीं जीत सका है। 29 साल बाद चार ब्राह्मण उम्मीदवार आमने-सामने देवरिया के उपचुनाव में आमने सामने हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 29 साल का रिकॉर्ड कौन उम्मीदवार अपने नाम करता है। देवरिया सीट के बारे में यह भी जानना जरूरी है कि 2009 से पहले यह सीट गौरी बाजार विधानसभा के नाम से जानी जाती थी। 2012 में इस सीट पर पहला चुनाव हुआ। जिस पर भाजपा ने जीत का परचम लहराया था।

पार्टी कितनी बार हुई जीत
भाजपा 04
सपा 01
बसपा 00
कांग्रेस 02
भारतीय क्रांति दल 02
जनता पार्टी 01
जनता पार्टी (एस) 01
जनता दल 02
नेशनल लोकतांत्रिक पार्टी 01
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