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जन्माष्टमी पर कोरोना संकट:कृष्ण भक्तों के लिए सील हुई मथुरा; 39 जगहों पर लगाये गए बैरियर, उत्सव जैसा माहौल दिखे इसलिए शहर के 20 चौराहों को सजाया गया

लखनऊ5 महीने पहले
इस बार महामारी के बीच जन्माष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है। हालांकि, भगवान श्रीकृष्ण का श्रृंगार यूं तो हर साल की तरह ही होगा लेकिन इस बार ब्रज की गलियों और मंदिरों में वह चहल पहल नहीं दिखाई देगी जो पिछली साल दिखी थी।
  • मथुरावासी भी टीवी पर ही देखेंगे जन्मोत्सव, कोरोना की वजह से ब्रज की गलियों में पसरा सन्नाटा
  • इस बार भक्तों से मथुरा न आने की अपील की गई है, बाहरी लोगों का प्रवेश निषेध किया गया
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देश ही नहीं दुनियाभर में कोरोना महामारी से हाहाकार मचा हुआ है। हर साल बृज में जन्माष्टमी के मौके पर काफी धूम रहती है, लेकिन इस बार लोगों ने कार्यक्रमों से दूरी बना ली है। पिछली बार जन्माष्टमी 23 अगस्त को पड़ी थी। उस समय.शहर के हर चौराहे को रंग-बिरंगे झालरों से सजाया गया था। हर नुक्कड़ पर दस राज्यों से आए कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे थे।

वृंदावन से लेकर मथुरा तक इतने सैलानी थे कि शहर में गाड़ी चलाने की जगह नहीं बची थी। योगी सरकार ने 2019 को कृष्ण जन्मोत्सव के रूप में मनाया था। समय वही है, लेकिन कोरोना संकट के समय मथुरा में सन्नाटा पसरा है। प्रशासन ने मथुरा को सील कर दिया है। 13 अगस्त तक मथुरा में किसी बाहरी जिले के व्यक्ति का प्रवेश निषेध कर दिया गया है।

20 चौराहों को सजाया गया है
कृष्ण जन्मोत्सव के वक्त उत्साह बना रहे इसके लिए नगर निगम को जिम्मेदारी दी गई है। यूपी ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ नागेन्द्र प्रताप ने बताया कि नगर निगम द्वारा 20 चौराहों को रंग बिरंगे कपड़ों से सजाया गया है। इस साल कोरोना संकट को देखते हुए भक्तों से मथुरा न आने की अपील की गई है। पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी हमारी बहुत सी योजनाएं थीं, लेकिन कोरोना संकट को देखते हुए अब मंदिरों के बन्द कपाट के पीछे ही जन्मोत्सव मनाया जाएगा।

श्री कृष्णा जन्मस्थान से होगा लाइव टेलीकास्ट
यूपी ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ नागेन्द्र प्रताप ने बताया कि यूं तो मथुरा के सभी मंदिरों को भक्तों के लिए बन्द किया गया है, लेकिन, श्री कृष्ण जन्मस्थान से जन्मोत्सव का लाइव टीवी चैनलों पर किया जाएगा। इसे भक्त लाइव अपने आराध्य को देख सकेंगे।

उन्होंने बताया कि जो भी चैनल लाइव करना चाहता है, सिटी मजिस्ट्रेट के यहां से परमिशन ले सकता है। श्री कृष्णा जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि इस बार तय किया गया है कि इस जन्मोत्सव में कमेटी के चुनिंदा लोग ही शामिल होंगे। साथ ही जो पुजारी है, वह रहेंगे।

जन्माष्टमी को लेकर मंदिरों को सजाया गया है।

ऐसा है श्री कृष्णा जन्मस्थान पर जन्मोत्सव का कार्यक्रम
श्री कृष्णा जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि रात 12 बजे ठाकुरजी का जन्म होगा। वह पूर्णेदु कुंज में विराजमान होकर पधारेंगे। श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर भगवान रेशम, जरी एवं रत्न प्रतिकृति के सुंदर संयोजन से बनी पुष्प वृंत पोशाक धारण करेंगे। यह पोशाक बुद्धवार की सुबह मंगला आरती से पहले धारण कराई जाएगी।

पोशाक में रत्न, मोती, एवं रेशम का प्रयोग करते हुए कमल पुष्प, लता पता आदि का कार्य किया गया है। इस पोशाक को मंगलवार की शाम ढोल , मृदंग की मधुर धुन के मध्य भागवत भवन स्थित मन्दिर में लाया गया।

श्री कृष्ण जन्मस्थान पर बाल गोपाल का सबसे पहले अभिषेक स्वर्ण रजत निर्मित कामधेनु गाय के थनों से निकले दूध से होगा। उससे पहले बाल गोपाल को रजत निर्मित कमल पुष्प में विराजमान कराया जाएगा और भगवान उसी में से प्रकट होंगे।

इसका इंतजाम कुछ इस तरह किया गया है कि जैसे ही जन्म होगा वैसे ही गाय के थन से दूध निकलने लगेगा। यह बिल्कुल स्वचालित यन्त्र कि तरह होगा। गाय के दूध से अभिषेक होने के बाद ठाकुर जी का दही, घी, बूरा, शहद और दूध से दिव्य अभिषेक किया जाएगा।

कपिल शर्मा ने बताया कि रात्रि 12.10 से 12.20 तक अभिषेक चलेगा, जबकि 12.40 से 12.50 तक श्रृंगार आरती होगी। रात 1 बजे शयन आरती होगी। जन्म के समय मंदिर परिसर में शंख, ढोल नगाड़े और मृदंग बजेगा। शहनाई और नगाड़ों के साथ ही मंगला आरती भी होगी। आरती के बाद ठाकुर जी का पंचामृत से अभिषेक भी होगा।

जन्मोत्सव के दिन भले ही श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर में सन्नाटा पसरा हुआ है, लेकिन उसी मंदिर के बाहर भारी भीड़ है। लोगों की आवाजाही चल रही है। हालांकि, अनलॉक की वजह से मथुरावासियों का घरों से निकलना तो बदस्तूर जारी है, लेकिन वह लोग मंदिरों में भी नहीं पहुंच पाएंगे इससे निराश हैं।

स्थानीय निवासी पवन कहते हैं कि जहां विदेशों से सैकड़ों लोग अपने आराध्य के एक दर्शन करने के लिए चले आते हैं। उन्हीं आराध्य के दर्शन हमें साक्षात नहीं हो पाएंगे। उन्होंने कहा- अपने जीते-जी हमने ऐसा समय कभी नहीं देखा।

बांके बिहारी मंदिर में भी बन्द रहेंगे कपाट
वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर में भी कृष्णा जन्मोत्सव भी बन्द कपाट के पीछे ही होगा। हालांकि, बांके बिहारी सहित वृंदावन के सभी मंदिर पहले ही 31 सितंबर तक बन्द हैं। मंदिर प्रशासन की ओर से बताया गया है कि जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। चूंकि, मंदिर में कोरोना को देखते हुए भक्तों का प्रवेश पहले से ही 31 सितंबर तक बन्द है इसलिए आज जन्मोत्सव के समय भी मंदिर में भक्त प्रवेश नहीं पाएंगे। फोटोग्राफी पर मंदिर में पहले ही रोक है इसलिए जन्मोत्सव का टेलीकास्ट भी नहीं होगा।

इस्कान पर पड़ा कोरोना का साया, विदेशी भक्त भी होंगे जन्मोत्सव से वंचित
वृंदावन स्थित इस्कान मंदिर पर कोरोना का साया पड़ चुका है। मंगलवार को 22 लोग संक्रमित पाए गए थे। ऐसे में मंदिर प्रशासन ने तय किया है कि जन्मोत्सव में सिर्फ दो पुजारी और कमेटी के कुछ मेम्बर शामिल होंगे। जबकि मंदिर में पहले से मौजूद विदेशी भक्तों को भी जन्मोत्सव से दूर रखा जाएगा। हालांकि, बाहरी भक्तों के लिए मंदिर पहले से ही बन्द था।

प्रेम मन्दिर की सजावट सबको खींच रही लेकिन मंदिर है बन्द
वृंदावन पहुंचते ही सबसे पहले प्रेम मंदिर के दर्शन होते हैं। रोज वह अपनी चकाचौंध से लोगों को आकर्षित तो कर रहा है, लेकिन भक्तों का प्रवेश सब मंदिरों की तरह यहां भी बन्द है। जन्मोत्सव हर बार की तरह ही मनाया जाएगा। उस वक्त मंदिर प्रबंधन के कुछ जिम्मेदार लोग ही शामिल होंगे।

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