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यादों में राहत इंदौरी:12 साल पहले ललितपुर में शेर सुनाते वक्त राहत साहब को मंच पर ही हार्ट अटैक आया था, कुछ साल बाद उसी मंच पर फिर लौटे

ललितपुरएक महीने पहलेलेखक: धर्मेंद्र कृष्ण तिवारी
ललितपुर के सदनशाह बाबा के उर्स में राहत इंदौरी ने अपना चर्चित शेर- सभी का खून शामिल है इस मिट्‌टी में, हिंदुस्तान किसी के बाप का नहीं....भी सुनाया था।
  • ललितपुर के ऐतिहासिक बाबा सदनशाह के उर्स में 31 मार्च 2008 को मंच पर गिर गए थे राहत इंदौरी
  • वक्त रहते उन्हें इलाज मिल गया था, बाद में भोपाल भेजा गया था
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मशहूर शायर राहत इंदौरी ने मंगलवार को इस दुनिया को अलविदा कह दिया। हंसते-हंसाते राहत का किसी मंच पर होना चाहने वालों के लिए हर लम्हा ‘राहत’ ही लेकर आता था। एक वक्त ऐसा भी हुआ कि राहत साहब को सब दिल से सुन रहे थे, तभी दिल में परेशानी हुई। हार्ट अटैक आया।

वाकया साल 2008 की 31 मार्च का है। यूपी के ललितपुर शहर में बाबा सदनशाह की दरगाह पर उर्स का मौका था। राहत साहब भी तशरीफ लाए। और भी कई नामचीन शायर थे। कौमी एकता मुशायरे में हर किसी की नजरें राहत को खोज रहीं थीं।

मंच पर आया हार्ट अटैक

राहत साहब ने मंच संभाला। जोरदार तालियों से उनका इस्तकबाल हुआ। 31 मार्च 2008 की उस खुशगवार रात में राहत के शेरों और गजलों ने समा बांध दिया। राहत का अंदाजे-बयां ही कुछ और था। गंभीर बातें करते-करते बीच में हंसी की कुछ पंखुड़ियां बिखेर देते। रंज-ओ-गम भूलकर लोग ठहाके लगाने लगते। इसी अंदाज में बहते-बहाते राहत का एक हाथ अचानक सीने की तरफ गया। चंद लम्हों में वो मंच पर गिर गए। अफरा-तफरी का आलम था। हर जुबां पर एक ही सवाल- राहत को हुआ क्या है?

कौमी एकता मुशायरे के आयोजक असर ललितपुरी के साथ राहत इंदौरी।

आयोजक घबराए और अस्पताल ले गए
कौमी एकता मुशायरे के आयोजक व संयोजक शायर अब्दुल करीम असर ललितपुरी बताते हैं, "जैसे ही राहत साहब मंच पर गिरे। सभी लोग घबरा गए। आनन-फानन में उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया। ये मुशायरे वाली जगह से महज दो सौ मीटर दूर ही था। डॉक्टरों ने दवाएं और इंजेक्शन देकर उनकी जान बचाई। करीब दो घंटे बाद उनकी हालत सामान्य हो गई।" पता लगा कि राहत साहब को हार्ट अटैक आया था।

फिर भोपाल भेजा गया
असर ललितपुरी बताते हैं, "राहत साहब को अटैक आने की जानकारी फोन पर उनके बेटे समीर को दी गई। उन्होंने पिता को भोपाल भेजने के लिए कहा। राहत साहब की हालत में सुधार होने पर और डॉक्टर्स के कहने पर उन्हें ट्रेन से एक अटेंडर के साथ भोपाल भेजा गया। यहां से उनका परिवार उन्हें साथ ले गया। कुछ वक्त बाद राहत फिर ललितपुर आए। मुशायरे में भी हिस्सा लिया। इस दौरान उस घटना का जिक्र भी किया। यहां के लोगों से कहा- मेरी तीमारदारी के लिए शुक्रिया। आपका अहसानमंद रहूंगा।

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