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AU के पूर्व वीसी प्रो. सीएल खेत्रपाल का निधन:किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी को शोध के लिए दान में दी गई पार्थिव शरीर

प्रयागराज2 महीने पहले
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस चांसलर प्रो. सीएल खेत्रपाल। (फाइल फोटो)
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और जाने माने वैज्ञानिक प्रोफेसर सीएल खेत्रपाल का बुधवार को निधन हो गया। लखनऊ स्थित संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज (एसजीपीजीआई) में उन्होंने अंतिम सांस ली। प्रो. खेत्रपाल के निधन के बाद उनका पार्थिव शरीर लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी को दान में दे दिया गया है। मेडिकल के स्टूडेंट उनके शरीर के आर्गन से शोध कर सकेंगे।

पीजीआई में चल रहा था इलाज

प्रो. खेत्रपाल बीमार चले रहे थे। पीजीआई में भर्ती थे। बुधवार को उनका निधन हो गया। उनके बेटे मुनीश ने बताया कि उनकी इच्छा थी कि विज्ञान में लगातार नए आयाम गढ़े जाएं। इस लिहाज से उनका देह केजीएमयू को दान में दिया गया। उनके निधन पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रोफेसर राम सेवक दुबे ने शोक व्यक्त किया है।

एयू से पढ़ाई की, यहीं वीसी बने

प्रोफेसर खेत्रपाल का जन्म 25 अगस्त 1937 को हुआ था। उन्होंने अपनी पढ़ाई इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पूरी की। मुंबई के प्रतिष्ठित परमाणु ऊर्जा स्थापना प्रशिक्षण से परास्नातक की पढ़ाई की। फिर 1965 में उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च से पीएचडी की।

खेत्रपाल ने पोस्ट डाक्टोरल के दौरान प्रोफेसर 1967 से 1969 तक स्विटजरलैंड के बेसल यूनिवर्सिटी में शोध किया। 1973 में वह भारत लौटे और बंगलुरु के रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट मेंं बतौर शिक्षण कार्य शुरू किया। यहां प्रोफेसर जीएन रामचंद्रन के सुझाव पर 1977 में भारत के पहले परमाणु चुंबकीय अनुनाद रिसर्च सेंटर की स्थापना की। अब यह एनएमआर रिसर्च सेंटर के नाम जाना जाता है। इसके बाद वह शोध के लिए 1979 से 1984 विदेश में रहे।

तीन साल रहे ईविवि के कुलपति

प्रो. सीएल खेत्रपाल 1998 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के कुलपति नियुक्त किए गए। यहां वह 2001 तक पद पर थे। उनका कार्यकाल कई शैक्षिक सुधारों के लिए जाना जाता है। उन्होंने एयू में कई सेंटर की स्थापना की। इसके बाद वे संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ में 2001-06 तक प्रोफेसर रहे। वह यहां सेंटर ऑफ बायोमेडिकल मैग्नेटिक रेजोनेंस के संस्थापक निदेशक भी रहे। उनकी 260 पुस्तकें प्रकाशित हैं। सैकड़ों पुस्तकों की समीक्षा की है।

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