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तलाश/ आदमखोर बाघिन के शिकार के लिए बुलाया गया शार्प शूटर, अब तक 12 लोगों की ले चुकी है जान

Dainik Bhaskar | Sep 12, 2018, 07:48 PM IST
-- पूरी ख़बर पढ़ें --

  • बाघिन ने सबसे पहले एक बुजुर्ग महिला को अपना शिकार बनाया था।
  • हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगाईहै।

नागपुर: यवतमाल जिले के पांढरकवड़ा के वनपरिक्षेत्र में आतंक का पर्याय बन चुकी टी-1 बाघिन को मारने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट से मुहर लगने के बाद वनविभाग ने ऑपरेशन तेज कर दिया है। वन विभाग द्वारा इस काम के लिए हैदराबाद से शार्पशूटर नवाब शफात अली खान को बुलाया गया है। उनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने 500 से अधिक जंगली जानवरों का शिकार किया है।Advertisement

सुप्रीम कोर्ट से मिली मंजूरी: वन्यजीव प्रेमी और सामाजिक कार्यकर्ता अजय दुबे की भोपाल स्थित एनजीओ 'प्रयत्न' और सेव टाइगहर कम्पेन के सिमरत सिंधू ने बाघिन को शूट करने के वन विभाग के आदेश को बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में चुनौती दी थी। इस पर हाईकोर्ट ने भी इस पर मुहर लगा दी थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी गई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस दया याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को कायम रखा है। माना जा रहा है कि किसी बाघ को बचाने के लिए दया याचिका अपने आप में पहली बार सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है।

बाघिन को बचाने पहली बार दायर हुई कोई याचिका: यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस के.एम. जोसफ की बेंच के समक्ष दायर की थी।

अब तक 12 लोगों को बनाया अपना शिकार: नरभक्षी बाघिन एक बुजुर्ग महिला और पुरुष समेत 12 लोगों को अपना शिकार बना चुकी है। डीएनए जांच, कैमरा ट्रैप्स और पंजों के निशानों के चलते जांचकर्ता इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि 5 साल की मादा बाघ अब आदमखोर हो गई है और मानव मांस के लिए शिकार कर रही है।

सेना की तर्ज पर होगा ऑपरेशन: बाघिन को मारने के लिए फॉरेस्ट रेंजर्स अब सेना की तर्ज पर ऑपरेशन की तैयारी में जुटे हैं। ये हाथियों पर सवाल होकर ट्रैंक्विलाइजर गन्स (बेहोश करने वाली बंदूकों) के साथ इसपर हमला करेंगे। बाघिन को कैद कर पास के एक चिड़ियाघर में भेजने की योजना भी बनाई गई है।

शूटर की नियुक्ति पर हुआ विवाद: वांटेड बाघिन की तलाश युद्ध स्तर पर की जा रही है। लेकिन उसे मारने के लिए बुलाए गए नवाब शफात अली की नियुक्ति पर सवाल उठने लगे हैं। शफात राज्य के वन विभाग द्वारा ऐसे मामले के लिए भले अधिकृत शार्प शूटर हैं लेकिन उनके गृह राज्य तेलंगाना के साथ कर्नाटक,मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ राज्यों ने उनके खिलाफ बैन लगा रखा है।

जालसाजी का भी है आरोप: शफात के खिलाफ यवतमाल जिले के पांढरकवड़ा में ही 6 महीने पहले एक ऑपरेशन के दौरान वन विभाग के साथ जालसाजी किए जाने की जांच जारी है। उनपर आरोप है कि उन्होंने शिकार से पहले इस्तेमाल होने वाली बेहोशी की दावा को 50 हजार में बाहर बेच दिया था।

कई बार हुए हैं गिरफ्तार: शफात और विवाद का पुराना नाता है। वर्ष 1991 में माओवादियों को हथियार सप्लाई के मामले में कर्नाटक पुलिस शफात को गिरफ्तार कर चुकी है। इतना ही नहीं माओवादियों के सेंट्रल कमेटी के मेंबर पटेल सुधाकर रेड्डी के साथ भी वो गिरफ्तार हो चुका है। वर्ष 2005 में कर्नाटक की सीआईडी ने अवैध शिकार के मामले में उसे गिरफ्तार किया था।

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