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भीमा कोरेगांव हिंसा/ पहले से सोची समझी साजिश थी हिंसा, जांच रिपोर्ट में हुआ खुलासा



इस हिंसा में कई करोड़ की संपत्ति का नुक्सान हुआ था।
  • 1 जनवरी को भीमा-कोरेगांव में दो गुटों के बीच दंगे हुए थे
  • इसमें एक शख्स की मौत हो गई थी
Dainik Bhaskar | Sep 12, 2018, 02:29 PM IST

पुणे. भीमा-कोरेगांव में हिंसा की घटना पुलिस की लापरवाही से हुई और यह पूर्व नियोजित थी। संभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे ने हिंसा भड़काने के हालात बनाए। यह दावा कोल्हापुर आईजी द्वारा गठित सत्यशोधन समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट में किया है। 1 जनवरी को भीमा-कोरेगांव में दो गुटों के बीच दंगे हुए थे। इसमें एक युवक को अपनी जान गंवानी पड़ी। आगजनी, पथराव जैसी घटनाओं को अंजाम दिया गया था। 

 

क्या है सत्यशोधन समिति?

  1. जांच रिपोर्ट में यह सामने आया

    पुलिस को सौंपी गई रिपोर्ट के मुताबिक, मिलिंद एकबोटे ने महार समाज के इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने के लिए 'धर्मवीर संभाजी महाराज स्मृति समिति' का गठन किया था। इसमें हिंसा को लेकर मिलिंद एकबोट और भिड़े गुरूजी को मुख्य आरोपी बनाया गया है। साथ ही कहा गया है कि कुछ पुलिसवालों ने भी उनका साथ दिया था। 

  2. जबरदस्ती दिया जा रहा है नक्सल एंगल

    सत्यशोधन समिति के अध्यक्ष डाॅ.सिद्धार्थ धेंडे ने बताया कि इसके सबूत बहुत पहले ही पुलिस को सौंप दिए गए लेकिन उस पर पुलिस ने अभी तक कुछ भी नहीं किया है। इस प्रकरण को नक्सल मोड़ देकर जांच की जा रही है, जो गलत है। पुलिस ने जांच की दिशा ही बदल डाली है।

  3. इस आधार पर तैयार की जांच रिपोर्ट

    डाॅ. सिद्धार्थ धेंडे ने बताया कि फाइनल रिपोर्ट बनाने से पहले उनकी समिति से जुड़े लोगों ने हिंसा वाले इलाके का दौरा किया। वहां के लोगों से बात की और उनके इंटरव्यू भी रिकॉर्ड किए। यही नहीं उस दौरान ड्यूटी पर तैनात पुलिसवालों के बयान भी रिकॉर्ड किए गए। इन सबके बाद हम इस नतीजे पर पहुंचे कि यह हिंसा पूर्व नियोजित थी। हिंसा में इस्तेमाल पत्थर और लाठी-डंडों का इंतजाम पहले से किया गया था।

  4. राज्य सरकार द्वारा गठित आयोग पर बनाया गया दबाव

    डाॅ. सिद्धार्थ धेंडे ने बताया कि राज्य सरकार ने जांच के लिए जो आयोग नियुक्त किया है। उस आयोग के समक्ष मामले के मुख्य आरोपी मिलिंद एकबोटे अपने वकील के साथ बैठते हैं। यह एक प्रकार से आयोग पर दबाव डालने की कोशिश है। डाॅ. सिद्धार्थ धेंडे का आरोप है कि सरकार एकबोटे और संभाजी भिड़े को बचाने की कोशिश कर रही है।

  5. क्या कहना है पुणे ग्रामीण पुलिस का?

    इसी मामले की जांच कर रही पुणे ग्रामीण पुलिस का दावा है कि हिंसा के पीछे 31 दिसंबर को पुणे के शनिवारवाड़ा में आयोजित यलगार परिषद में हुए भाषण भी कारण हैं। जून में भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में पुणे ग्रामीण पुलिस ने प्रतिबंधित माओवादी संगठन से जुड़े पांच एक्टिविस्ट शोमा सेन, महेश राऊत, सुरेंद्र गडलिंग, रोना विल्सन और सुधीर ढवले को मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद औऱ रांची से गिरफ्तार किया था। अगस्त में रांची से फादर स्टेन स्वामी, हैदराबाद से वामपंथी विचारक और कवि वरवरा राव, फरीदाबाद से सुधा भारद्धाज और दिल्ली से सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलाख की गिरफ्तारी हुई है। सभी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अगली सुनवाई तक नजरबंद रखने का आदेश दिया है।

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