ट्रेन में टूट-फूट हुई तो ट्रैक पर लगा सेंसर बता देगा

किसी भी ट्रेन की जांच प्लेटफॉर्म के भीतर जाने के दौरान हो सकेगी रेलवे ने ट्रेनों की सुरक्षा के लिए नया...

Bhaskar News Network

Jan 26, 2020, 06:45 AM IST
किसी भी ट्रेन की जांच प्लेटफॉर्म के भीतर जाने के दौरान हो सकेगी

रेलवे ने ट्रेनों की सुरक्षा के लिए नया मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने की तैयारी कर ली है। सेंसर युक्त इस सिस्टम के ट्रैक के नजदीक लग जाने के बाद किसी भी ट्रेन की जांच उसके प्लेटफॉर्म के भीतर जाने के दौरान हो सकेगी। यदि कोई गड़बड़ी नजर आई, तो सिस्टम इसकी जानकारी तत्काल रेलवे के कंट्रोल रूम को पहुंचा देगा, जहां से तत्काल सुधार कार्य किया जा सकेगा। यात्री ट्रेनों की बेहतर सुरक्षा के लिए लगाए जाने वाले इस सिस्टम को डिजिटल मॉनिटरिंग सेंसर सिस्टम नाम दिया गया है। इस साल के अंत तक पश्चिम-मध्य रेल के भोपाल, जबलपुर व कोटा मंडलों में इसे लगाने की तैयारी चल रही है। फिलहाल इस सिस्टम को इलाहाबाद रूट अप रेलवे ट्रैक पर लगाकर देखा गया है, जिसके अच्छे रिजल्ट सामने आए हैं। पश्चिम-मध्य रेलवे की मुख्य जनसंपर्क अधिकारी प्रियंका दीक्षित का कहना है कि यात्रियों व ट्रेनों की बेहतर सुरक्षा के लिए सिस्टम काफी कारगर साबित होगा।

ट्रेन के पहियों में अचानक क्रेक आ जाने, कपलिंग टूटकर लटकने व ट्रेन के दो टुकड़ों में बंटने और हॉट एक्सल जैसी घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। इन पर रोक लगाने के लिए लखनऊ के रिसर्च डिजाइन एंड स्टेंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) ने सेंसर युक्त ऑनलाइन डिजिटल हैंगिंग मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किया है। इसे स्टेशनों के भीतर से आने व जाने वाले ट्रैक के जोड़ वाले हिस्सों पर लगाया जाएगा। जैसे ही ट्रेन एक साथ दो या तीन से ज्यादा पटरी के जोड़ से होती हुई स्टेशन के भीतर जाएगी, यह सिस्टम उसकी पूरी ऑनलाइन मॉनिटरिंग कर टूटफूट संबंधी सारी जानकारी ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से रेलवे के कंट्रोल रूम को पहुंचा देगा। इससे टूटफूट में सुधार व अन्य सुरक्षात्मक कार्य तत्काल किए जा सकेंगे।

अभी सिस्टम मैन्युअली होने से नजर नहीं आती छोटी टूट-फूट

हॉट एक्सल तक को पहचान लेगा...

स्मॉल बॉक्स वाले सेंसर रहेंगे : जो नया सिस्टम लगाया जाएगा वह स्मॉल बॉक्स वाले सेंसर से युक्त होंगे। इन्हें होम सिग्नल के बाद ट्रैक की साइड में पटरियों के जोड़ के नजदीक लगाया जाएगा। यह इंटरनेट के जरिए रेलवे कंट्रोल रूम से जुड़े रहेंगे और हर ट्रेन की जानकारी कंट्रोल रूम के मॉनिटर पर पहुंचाते रहेंगे। हालांकि मेन्युअली भी मॉनिटरिंग सिस्टम को सुरक्षा के लिहाज से जारी रखा जाएगा।

वर्तमान में जब कोई भी ट्रेन होम सिग्नल से स्टेशन के भीतर प्लेटफॉर्म पर लगने के लिए जाती है, उस दौरान बड़ी-बड़ी लाइटों के जरिए रेलवे स्टाफ हर ट्रेन के नीचे के हिस्से देख लेता है, जिसमें 8 से दस मिनट तक लग जाते हैं। साथ ही सिस्टम मैन्युअली होने के कारण छोटी-मोटी टूट-फूट कई बार नजर नहीं आती, लेकिन नया सिस्टम सेंसरयुक्त व डिजिटल होने के कारण मामूली सी टूट-फूट भी उसकी पकड़ में तत्काल आ जाएगी।

कई बार ट्रेनों के पहिए के एक्सल गर्म हो जाते हैं और उसमें से चिंगारियां निकलने लगती हैं। इससे ट्रेन के निचले हिस्से में आगजनी जैसी घटना होने की आशंका बढ़ जाती है। यह सेंसर सिस्टम हॉट एक्सल तक को पहचान लेगा।

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