हादसा / इंजन जलने से 4 घंटे जंगल में खड़ी रही ट्रेन, प्यासे यात्रियों के लिए किसानों ने ट्यूबवेल खोले, पानी पाउच और टैंकर लेकर पहुंची पुलिस

  • म्याना के पास ग्वालियर-बीना पैसेंजर के इंजन में जनरेटर में शार्ट सर्किट से लगी आग
  • दोपहर 2 बजे गुना पहुंचने वाली ट्रेन शाम 4.20 बजे दूसरा इंजन लगाकर लाई

Dainik Bhaskar

Apr 24, 2019, 03:13 PM IST

गुना।मंगलवार को ग्वालियर से गुना आ रही पैसेंजर ट्रेन के इंजन में तरावटा व बिलोनिया के बीच आग लग गई। यह घटना दोपहर एक बजे के आसपास हुई। पूरे घटनाक्रम के दौरान साढ़े 4 घंटे तक गुना-ग्वालियर रेल रूट ठप रहा। दोपहर 2 बजे गुना पहुंचने वाली यह शाम 4.20 तक दूसरे इंजन से खींचकर लाई गई। शुरूआती जांच में आग लगने की वजह इंजन के जनरेट में हुए शॉर्ट सर्किट को बताया जा रहा है। शुरूआत में तो धुंआ ही निकल रहा था।

इससे लोको पायलट सचेत हो गए थे लेकिन उन्हें उम्मीद नहीं थी कि अचानक आग भड़क जाएगी। राहत की बात यह रही कि आग केबिन की ओर बढ़ी, अगर यह दूसरे वाले हिस्से में लगती तो बोगियां भी इसकी चपेट में आ जातीं। करीब 4 घंटे यह ट्रेन ऐसी जगह खड़ी रही जहां दूर-दूर तक खेत व जंगल के अलावा कुछ नहीं था। करीब 43 डिग्री की भीषण गर्मी में यात्री प्यास से बेहाल हो गए। ऐसे मेंं आसपास के किसानों व ट्रेन में बैठे कुछ यात्रियों ने पानी के इंतजाम करने में मदद की। बाद में म्याना पुलिस के थाना प्रभारी व जवान पानी के पाउच व टैंकर लेकर पहुंच गए। सबसे पहले तो इंजन को अलग करके स्टेशन लाया गया। उसके बाद ट्रेन को शाम 4 बजे के आसपास गुना लाया गया।


दोपहर 12.30 से 3.30 तक पूरी घटना एक नजर में

  • दोपहर 12.30 : सबसे पहले धुंआ उठते हुए देखा : तरावटा से निकलने के बाद लोको पायलट ने सबसे पहले जनरेटर वाले हिस्से से धुंआ उठते देखा। उन्हें खतरे का अंदेशा तो हो गया था लेकिन उन्होंने सोचा कि कुछ देर बाद गुना पहुंच ही जाएंगे। वहीं पर स्थिति की समीक्षा कर ली जाएगी। इस दौरान ट्रेन की रफ्तार को भी धीमा रखा गया।
  • दोपहर 12.40 बजे : करीब 10 मिनट के दौरान लोको पायलट ने जैसे ही ट्रेन को रफ्तार देने की कोशिश की तो आग तेजी से भड़क गई। लपटों ने केबिन को घेर लिया। लोको पायलट ने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोका।
  • दाेपहर 1.30 बजे तक : गुना में सूचना भेजी जा चुकी थी और लोको पायलटों ने इंजन में उपलब्ध आग बुझाने वाले यंत्रों स्थिति को नियंत्रित किया। इस दौरान फायर ब्रिगेड भी मौके पर पहुंची लेकिन आग को पूरी तरह नहीं बुझाया जा सका। यात्रियों ने धक्का लगाकर उसे दूर धकेला
  • दोपहर 2 बजे : गुना से दूसरा इंजन पहुंच गया। उसके साथ आग बुझाने के और उपकरण भी भेजे गए। इसके बावजूद आग पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका। पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास फायर ब्रिगेड के लिए करीब आधा घंटे इंतजार किया गया। पर वह नहीं पहुंची।
  • शाम 3.30 बजे : बोगियों को लाने के लिए इंजन रवाना हुआ। एक घंटे बाद पूरी ट्रेन रेलवे स्टेशन पर पहुंच गई। यह अपने निर्धारित समय से ढाई घंटे देरी से आई। पर सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि पूरे घटनाक्रम में किसी को कोई चोट नहीं आई।

दिव्यांश और पलाश ने कैन में पानी भरवाया: हादसे में यात्रियों को सबसे ज्यादा अगर किसी चीज ने परेशान किया तो वह था पानी की कमी। ट्रेन में मौजूद दो युवा दिव्यांश और पलाश 2-3 कैन लेकर आधे किमी दूर संजय चतुर्वेदी के खेत से बोर शुरू करवाकर ले आए। इस दौरान पानी क ेलिए यात्रियों ने उन्हें घेर लिया। आधा घंटे बाद म्याना थाना प्रभारी व उनका स्टाफ वाहनों में पानी के पाउच लेकर लाए, पंचायत और पुलिस ने पानी के टैंकर भी पहुंचा दिए।

लोको पायलट, गार्ड ने डीजल टैंक तक आग को नहीं जाने दिया
गार्ड व दोनों लोको पायलटों ने इसमें सजगता दिखाई। उन्होंने अपने पास उपलब्ध फायर फाइटर उपकरणों से आग को नियंत्रित कर लिया था। सबसे ज्यादा चिंता इस बात को लेकर थी कि कहीं यह डीजल टैंक तक न पहुंच जाए। इसलिए सबसे पहले उसे रोका गया। इसके बाद इंजन को बोगियों से अलग किया गया।

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