Advertisement

Dainik Bhaskar Brings you the latest Hindi News

​चार दिन-चार रात जेल में बिताकर लौटे, किसानों के साथ फिर धरने में हुए शामिल

पिछले 71 दिनों से जारी है किसानों का आंदोलन

dainikbhaskar.com | Sep 12, 2018, 12:21 PM IST

खंडवा. रेशम उत्पादक किसानों और मजदूरों के हक के लिए आंदोलन पर डटे राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ की युवा इकाई के जिलाध्यक्ष सौरभ सिंह कुशवाह और शहर अध्यक्ष योगेश सोनी चार दिन और चार रात जिला जेल में बिताने के बाद सोमवार रात 8 बजे जेल से रिहा हुए। इसके बाद दूसरे दिन से वे दोबारा जिला पंचायत में चल रहे धरने में किसानों के साथ आ डटे। महासंघ के जिला संयोजक विशाल शुक्ला अब भी जेल में हैं। उन्हें पुलिस ने 13 जुलाई को गिरफ्तार कर 16 जुलाई को जेल भेजा था। 


शिवराज सिंह को  काले झंडे दिखाने की थी तैयारी
सौरभ सिंह कुशवाह और योगेश सोनी को पुलिस ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के शहर प्रवास के दौरान 6 सितंबर को सुबह 8 बजे जिला न्यायालय के सामने से गिरफ्तार किया था। कारण पुलिस को अंदेशा था कि महासंघ के बैनर तले किसान और पदाधिकारी मुख्यमंत्री के सामने विरोध प्रदर्शन करेंगे। महासंघ की मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाने की तैयारी थी। लेकिन इसे रद्द कर दिया गया। गिरफ्तारी के समय सौरभ और योगेश काले रंग की शर्ट पहने हुए थे। बस यही उनकी गिरफ्तारी का कारण बना। 


यह हमारा संवैधानिक अधिकार है
सौरभ और योगेश का कहना है कि अब क्या मुख्यमंत्री से मुलाकात कपड़ों का रंग देखकर होगी। हम किसी भी रंग के कपड़े पहने, यह हमारा संवैधानिक अधिकार है। दोनों को 6 सितंबर को शाम 4.30 बजे एसडीएम न्यायालय में पेश कर 6 बजे जेल भेज दिया गया था। दोनों ने बताया हमारे साथ पेशेवर मुजरिम की तरह बर्ताव कर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। 


जेल में डॉक्टर मरीजों को छूते तक नहीं
 सौरभ और योगेश ने बताया जेल में अव्यवस्थाएं पसरी हैं। हमारे जिला संयोजक को बिछाने को बिस्तर दिया जा रहा है और न ही ओढ़ने को कंबल। बर्तनों के बजाय प्लास्टिक के डिब्बे में खाना दिया जा रहा है। अफसर कहते हैं खाना हो तो खाओ, पीना हो तो पीओ। हालात यह हैं कि बीमार होने पर डॉक्टर बंदी को छूते तक नहीं हैं। एक ही ब्लेड से कई लोगों की दाढ़ी बना दी जाती है। पीने के पानी में कीड़े हैं। खाने पर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 150 रुपए खर्च का नियम है। लेकिन जेल में बमुश्किल 25 रुपए खर्च किए जा रहे हैं। खाना गुणवत्ताहीन है। पुस्तकालय के साथ प्रति 50 व्यक्ति एक अखबार दिया जाना चाहिए, लेकिन जिला जेल में इसकी भी व्यवस्था नहीं है। 


71 दिन से किसान-मजदूरों का धरना जारी 
तीन साल से लंबित मजदूरी भुगतान की मांग को लेकर जिला पंचायत परिसर में रेशम उत्पादक किसान-मजदूरों का धरना 71 दिन से जारी है। 2 जुलाई से यहां डटे मजदूर-किसान मजदूरी दिए जाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन शासन-प्रशासन ने अब तक उनकी कोई सुनवाई नहीं की है। 

Advertisement

Dainik Bhaskar Brings you the latest Hindi News

टॉप न्यूज़और देखें

Advertisement

बॉलीवुड और देखें

स्पोर्ट्स और देखें

Advertisement

Dainik Bhaskar Brings you the latest Hindi News

जीवन मंत्रऔर देखें

राज्यऔर देखें

वीडियोऔर देखें

बिज़नेसऔर देखें