चुनाव परिणाम / आलोट में चपरासी के बेटे ने केंद्रीय मंत्री के बेटे को हराया

  • गुड्‌डू के भाजपा में जाने के बाद आलोट में एकतरफा जीत का दावा कर रही थी भाजपा

Dainik Bhaskar

Dec 12, 2018, 11:50 AM IST

आलोट (रतलाम). जिस वक्त प्रेमचंद गुड्डु और उनके बेटे अजीत बौरासी ने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामा था उसी वक़्त से भाजपा आलोट में एकतरफा जीत का दावा कर रही थी। केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत अपने विधायक बेटे जितेंद्र की जीत को लेकर आश्वस्त थे मगर करणी सेना ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेरने का काम किया।

करणी सेना के समर्थन के ऐलान के बाद कांग्रेस के नए नवेले प्रत्याशी मनोज चावला की टीम का आत्म विश्वास बढ़ा और उसने पूरी ताकत झोंकते हुए बाजी न केवल अपने पक्ष में कर ली बल्कि तमाम राजनीतिक पंडितों को भी उन्हीं के पूर्वानुमान पर दोबारा सोचने के लिए विवश कर दिया।

चौंके बिना प्रेमचंद गुड्डू भी नहीं रहे क्योंकि जितेंद्र की राह आसान करने के लिए ही तो वे अपने बेटे अजीत को भाजपा के टिकट पर उज्जैन की घट्टिया सीट से लड़वाने को राजी हुए थे। किस्मत उनकी भी खराब ही निकली। बेटा कांग्रेस के टिकट के लिए जिस आलोट में पांच साल से मेहनत कर रहा था, वह पाला बदलने के बाद घट्टिया में भी कांग्रेस के रामलाल मालवीय से 4628 वोटों से हार गया। थावरचंद गेहलोत और प्रेमचंद गुड्डू पुत्रमोह में ऐसे फंसे की चुनावी कुरुक्षेत्र में हारना पड़ा।

चपरासी के बेटे ने केंद्रीय मंत्री के बेटे को हराया

आलोट विधानसभा सीट पर चपरासी (प्यून) के बेटे ने इतिहास रचा। 70 साल में पहली बार यहां कोई स्थानीय उम्मीदवार मनोज चांवला ने 5700 वोटों से जीत दर्ज की। मनोज के पिता काेमल चांवला ताल तहसील में प्यून हैं। विधि स्नातक की डिग्री लेने 2003 से राजनीति में सक्रिय हुए मनोज ने कहा- इतने सालों में पार्टी का एक भी स्थानीय उम्मीदवार नहीं जीता। यही लक्ष्य था जिसमें सभी ने साथ दिया। एट्रोसिटी एक्ट को लेकर लोगों में गुस्सा था जिसका भी हमें लाभ मिला।

स्कूल के समय एक सपना देखा था हम उसे लेकर चले। जनता के बीच काम किया जिसे देखकर कांग्रेस टिकट दिया। कार्यकर्ताओं की मेहनत व जनता के प्यार-आशीर्वाद से जीत मिली। एट्रोसिटी एक्ट को लेकर पार्टी का जो आदेश होगा उसके अनुसार काम करेंगे।


आलोट में कांग्रेस का स्थानीय का कार्ड चला। जीवन का पहला चुनाव लड़े कांग्रेस प्रत्याशी मनोज चावला को जनता ने सिर आंखों पर बैठाया। एट्रोसिटी एक्ट के विरोध व स्थानीय उम्मीदवार चावला के आगे केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गेहलोत पुत्र भाजपा प्रत्याशी जितेंद्र गेहलोत की विधायकी नहीं बचा सके।

आलोट में पिछले कार्यकाल में करोड़ों के विकास कार्य करवाने व नवाेदय स्कूल खुलवाने के बावजूद लोगों ने मंत्री पुत्र जितेंद्र को नकार दिया। बेटे को जिताने के लिए मंत्री गेहलोत ने पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू, जनपद अध्यक्ष रामविलास धाकड़ को कांग्रेस से तोड़ लिया। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह व खुद सीएम शिवराजसिंह चौहान की सभा करवाने सहित कई पापड़ बेले लेकिन सफल नहीं हुए।

यहां 28 सितंबर को नवोदय स्कूल का शुभारंभ करने आए मानव संसाधन केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर व खुद थावरचंद गेहलोत को भी एट्रोसिटी एक्ट का विरोध झेलना पड़ा था और पूरा नगर बंद रहा था। करणीसेना ने काले झंडे दिखाए थे। करणीसेना व राजपूत नेताओं ने तो खुलकर चावला का साथ दिया और जिता दिया। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए नेता पछता रहे हैं।


हार के बावजूद डटे रहे, कांग्रेस प्रत्याशी को बधाई भी दी

विधानसभा क्षेत्र के भाजपा प्रत्याशी जितेंद्र गेहलोत हार के बावजूद पूरे समय मतगणना स्थल पर डटे रहे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी मनोज चावला से हाथ मिलाकर जीत की बधाई भी दी। जबकि हारने वाले कुछ प्रत्याशी पहले ही घर से नहीं आए तो कुछ हार की सूचना मिलते ही लौट गए।

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