मुंबई / घर की छत पर विमान बनाया; उड़ान की मंजूरी में 8 साल लगे, मोदी ने बुलाकर पूछा- सपना तो पूरा हुआ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पायलट अमोल यादव।

  • पायलट अमोल यादव ने रविवार को मोदी सेकहा- 19 साल तक संघर्ष किया, उड़ान में सफल रहीतो देश में छोटे और हल्के विमान बनाएंगे
  • डीजीसीए मेक-इन इंडिया में पेश किए गए 6 सीटर विमान की दिसंबर में 40 घंटे की टेस्टिंग करेगा
  • महाराष्ट्र सरकार से 35 हजार करोड़ रु. का अनुबंध किया, 1500 करोड़ का विमान 250 करोड़ रु. में बनाने का दावा

Dainik Bhaskar

Oct 21, 2019, 09:33 AM IST

मुंबई/नई दिल्ली.मुंबई के गोरेगांव के अमोल यादवपेशे से कमर्शियल पायलट हैं। 19 साल तक चले लंबे संघर्ष के बाद उनके खुद के बनाए छह सीटों वाले देसी विमान को दो दिन पहले नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने उड़ाने की अनुमति दे दी। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बुलावे पर वे दिल्ली पहुंचे और उनसे मुलाकात की। उन्होंने अमोल के प्रयास को सराहते हुए पूछा- अब आपका सपना तो पूरा हुआ।इस पर अमोल ने कहा- ‘सिर्फ मेरा ही नहीं बल्कि मेरे पूरे परिवार का सपना साकार हुआ है।’ उन्होंने उम्मीद जताई कि उड़ान में सफलता मिलती है, तो देश में अपनी जरूरतों के हिसाब से हल्के व सस्ते विमान के निर्माण का नया दौर शुरू होगा। उन्होंने 19 सीटों वाले विमान का निर्माण भी शुरू कर दिया है।


अमोल ने बताया कि 90 के दशक में उन्होंने 19 साल की उम्र में अमेरिका में पायलट की ट्रेनिंग ली थी। जब भारत लौटे तो यहां एयरक्राफ्ट खरीदने का प्रयास किया। पता चला कि भारत में एयरक्राफ्ट नहीं बनाए जाते। तब खुद एयरक्राफ्ट बनाने का ख्याल आया। करीब 19 साल पहले चारकोप इलाके में अपने घर की छत पर ही विमान बनाना शुरू कर दिया था। यह उनका बनाया तीसरा विमान है।

19 साल में 5 करोड़ खर्च किए, दो बार बिफल रहे

2003 तक दो एयरक्राफ्ट बनाए, लेकिन दोनों असफल रहे। दोनों में कई कमियां रह गई थीं। फिर छह साल की मेहनत से 2009 में नया विमान तैयार किया। इसके लिए पिस्टन इंजन सहित कई पार्ट्स विदेश से मंगवाए और एयरक्राफ्ट ग्रेड के एल्युमिनियम से जहाज का एयरफ्रेम खुद ही तैयार किया। यह प्रयास सफल रहा। अमोल ने बताया कि बीते 19 साल में हवाई जहाज बनाने पर उन्होंने करीब 5 करोड़ रुपए खर्च कर दिए हैं।

विमान लागत के लिए मां ने गहनें बेचे, भाई ने घर गिरवी रखा

विमान बनाने में अमोल नेन केवल अपना पूरा वेतन झोंक दिया बल्कि मां को अपने गहने तक बेचने पड़े। बड़े भाई ने घर भी गिरवी रख दिया था,लेकिन अब डीजीसीए उड़ान से पहले अमोल के विमान टीएसी-03 की 40 घंटे की टेस्टिंग करेगा। 2017 में इस एयरक्राफ्ट का रजिस्ट्रेशन किया,लेकिन उड़ाने की अनुमति के लिए दो साल और इंतजार करना पड़ा।

राज्य सरकार ने अनुबंध कर एयरस्ट्रिप उपलब्ध कराई

जेट एयरवेज में दिन में पायलट की नौकरी कर रात में घर पर विमान बनाने वाले अमोल की सफलता के बाद महाराष्ट्र सरकार ने उनसे 35 हजार करोड़ का अनुबंध किया है। उन्हें पालघर में जगह और एयरस्ट्रिप उपलब्ध कराई। दिसंबर में डीजीसीए उनके विमान का परीक्षण करेगा। जो विमान विदेशी कंपनियां एक से डेढ़ हजार करोड़ रुपए में बनाती हैं, उसे अमोल 250 करोड़ में बनाने वाले हैं।

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