रोहित शेखर मर्डर केस / बार-बार बयान बदल रही पत्नी अपूर्वा, अब नार्को टेस्ट कराने की तैयारी

  • अपूर्वा से कई घंटे हुई पूछताछ, दो कर्मचारियों से भी किए गए सवाल-जवाब
  • नौकर गोलू और परिवार के करीबी राजीव से अलग-अलग हुई पूछताछ

Dainik Bhaskar

Apr 23, 2019, 11:12 AM IST

नई दिल्ली.पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के बेटेरोहित शेखर तिवारी की हत्या के बाद शक के दायरे में आई उसकी पत्नी अपूर्वा का पुलिस नार्को टेस्ट कराने की तैयारी कर रही है। पुलिस मानकर चल रही है कि वह घटना को लेकर जो कुछ भी बता रही है, वह पूरी तरह सत्य नहीं। उसके विरोधाभासी बयान खुद कई सवाल खड़े करते हैं। ऐसे में नार्को टेस्ट के जरिए पुलिस उससे सच को उगलवाने का प्रयास करेगी।

हालांकि, इस प्रक्रिया को अपनाने से पहले पुलिस को कोर्ट का सहारा लेना होगा। वहां से भी अनुमति तब मिलेगी जब अपूर्वा इसके लिए रजामंदी देगी। क्राइम ब्रांच के सीनियर पुलिस अफसर ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की वकील व रोहित तिवारी को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए पुलिस आयुक्त से अनुमति मांगी। पुलिस अधिकारी ने मांग की है कि वे अपूर्वा को घर से अलग पुलिस ऑफिस में पूछताछ करना चाहते हैं।

क्राइम ब्रांच की स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम ने सोमवार को एक बार फिर गहन पूछताछ की। कई घंटे चली छानबीन के दौरान सारे सवाल-जवाब पति पत्नी के रिश्ते के इर्दगिर्द ही घूमते रहे। वहीं, पुलिस की एक टीम घरेलू नौकर गोलू व इस परिवार के करीबी राजीव को लेकर प्रशांत विहार स्थित ऑफिस में ले गई। वहां दोनों को अलग-अलग कमरे में बिठाकर पूछताछ हुई। इस दरम्यान दोनों ही लोगों ने वही जवाब दिए जो पहले वह बता चुके थे।

इन्होंने दावा किया कि अपूर्वा ने एक वीडियो कॉल रोहित को किया था। यह कॉल गोलू ने उठाया जो बाद में रोहित को पकड़ा दिया गया। उस वक्त रोहित शराब पी रहा था और एक कर्मचारी की पत्नी भी साथ थी। यह पता चलने पर अपूर्वा बुरी तरह से भड़क गई थी। ये बात तब की है जब रोहित 15 अप्रैल को उत्तराखंड से दिल्ली लौट रहा था। उस वक्त राजीव के साथ उसकी पत्नी भी मौजूद थी।

सच उगलवाने के लिए किया जाता है टेस्ट
नार्को टेस्ट का इस्तेमाल किसी व्यक्ति से ऐसे जानकारी प्राप्त करने के लिए किया जाता है, जिसे देने में वह सामान्य तौर पर या तो असमर्थ होता है या उसे उपलब्ध कराने को तैयार नहीं होता। यानी उस आदमी के मन से सच उगलवाने के लिए यह टेस्ट किया जाता है। ज्यादातर आपराधिक केस में ही इसका प्रयोग होता है। नार्को विश्लेषण एक फोरेंसिक परीक्षण होता है, जिसे जांच अधिकारी, मनोवैज्ञानिक, चिकित्सक व फोरेंसिक विशेषज्ञ की उपस्थिति में किया जाता है। इस टेस्ट में व्यक्ति को ट्रूथ सीरम इंजेक्शन दिया जाता है जिससे व्यक्ति स्वाभाविक रूप से बोलता है।

कोर्ट के आदेश के बाद होती है टेस्ट की प्रक्रिया
अगर पुलिस को लगता है कि कोई शख्स बात को छिपा रहा है या झूठ बोल रहा है तो उस स्थिति में केस से जुड़ा जांच अधिकारी उसका नार्को टेस्ट कराने के लिए कदम आगे बढ़ाता है। इसके लिए सबसे पहले वह कोर्ट में अर्जी लगाकर नार्को टेस्ट कराने की मांग करता है। इसके बाद कोर्ट उस शख्स को बुलाती है, जिसका टेस्ट की मांग कोर्ट से की गई होती है। जिसका यह टेस्ट होना है, अगर वह इसे कराने से मना कर दे तो फिर कोर्ट इसकी मंजूरी नहीं देती।

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