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जयपुर: जिस होटल में विधायक, वहां से रिपोर्ट:होटल के बाहर इतनी भीड़ कि लॉकडाउन में ठप पड़ी दुकानें फिर चलने लगीं, दुकानदार बोले- अपनी रोजी- रोटी चलती रहनी चाहिए

जयपुर22 दिन पहलेलेखक: विष्णु शर्मा
होटल के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस और मीडिया के लोग हैं। किसी को भी होटल के नजदीक जाने की अनुमति नहीं है।
  • पुलिस फोर्स और मीडिया के यहां पहुंचने से आसपास की दुकानों पर भीड़ नजर आती है
  • दुकानदारों का कहना है कि अंदर जो भी चल रहा हो, हमारे लिए तो यह सब अच्छा है
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राजस्थान के सियासी घमासान में जयपुर का फेयरमोंट होटल राजनीति का सेंटर बन चुका है। गहलोत गुट के विधायक सोमवार से यानी 4 दिन से होटल में हैं। बाड़ेबंदी के कारण फेयरमोंट होटल में मंत्री और नेताओं का जमावड़ा लगा है। वहीं, होटल के बाहर पार्टी कार्यकर्ता और मीडिया का आन-जाना लगातार जारी है। इस कारण आम दिनों में सुनसान रहने वाले इस इलाके में अचानक चहल-पहल बढ़ गई है।

पुलिस फोर्स के साथ ही अतिरिक्त सुरक्षा बल और मीडिया के यहां पहुंचने से आसपास की दुकानों पर भीड़ है। भास्कर रिपोर्टर ने यहां आसपास के लोगों से बात की। लोगों का कहना है कि यहां बड़ी संख्या में स्टूडेट्स रहते हैं। जो लॉकडाउन में घर जा चुके हैं। इसके कारण एक-दो लोग ही नजर आते थे।

बाड़ेबंदी से अच्छी कमाई हो रही

चाय और खाने-पीने की दुकानों पर राजनीतिक चर्चा जोरों पर हैं। आसपास के दुकानदारों का कहना है कि अंदर जो भी चल रहा हो। हमारे लिए तो अच्छा है। वैसे ही लॉकडाउन है। कमाई नहीं हो रही थी। यहां पर बाड़ेबंदी होने से अच्छी कमाई हो रही है। अंदर क्या हो रहा पता नहीं, क्योंकि हमें टीवी देखने का भी वक्त नहीं।

होटल के बाहर तैनात पुलिस का जत्था।

होटल के बाहर चाय की दुकान लगाने वाले गुरुजी ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से यहां सभी कॉलेज और इंस्टीट्यूट बंद थे। एक लीटर दूध में पूरे दिन का काम हो जाता था। वहीं, एक दम से इतने लोग पहुंचे तो पहले समझ ही नहीं आया क्या हुआ। फिर पता चला कि नेता आएं हैं। बाड़ेबंदी की जा रही है। धीरे-धीरे होटल के बाहर भी लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। अब 4 से 5 लीटर दूध काम में ले रहा हूं।

होटल के बाहर चाय की दुकान लगाने वाले गुरुजी।

ये गंदी राजनीति है
होटल के पास ही दुकान पर बैठे एक शख्स ने कहा कि ये गंदी राजनीति है। कोरोना के कारण सब बंद था। अब भीड़ हो गई है। यहां कांग्रेस के अलावा कभी किसी की मीटिंग नहीं देखी। पहले राज्यसभा में भी यहां आ गए थे। इनमें हमें कोई मतलब नहीं है, अपनी रोजी-रोटी चलती रहनी चाहिए। ये तो बस वर्चस्व की राजनीति है।

'गहलोत का तख्ता हिल गया'

दूसरे दुकानदार ने कहा कि ये दो भाइयों के परिवार की लड़ाई जैसा है। जो ज्यादा टाइम एक जगह नहीं टिक पाते। अगर मिलते भी हैं तो फिर रूठ जाते हैं। ये तो फिर भी सत्ता की लड़ाई है। वहीं, दुकान पर बैठे लोगों का कहना था कि गहलोत का तख्ता हिल गया। पायलट को खुश रखना चाहिए था। एक का कहना था कि ये तो खिचड़ी है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को होटल के बाहर प्रेस से बात की।

होटल के बाहर सुरक्षा कड़ी

वहीं, होटल के बाहर सुरक्षा घेरा भी कड़ा कर दिया गया। मीडिया और बाकी लोगों को होटल के गेट से काफी दूर ही रोक दिया गया है। बड़ी संख्या में पुलिस का जत्था तैनात है। नेता और विधायक यहां आकर प्रेस को संबोधित करते हैं। 

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