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लद्दाख में कैसे कम होगा तनाव:भारत-चीन में 5 महीने से जारी तनाव कम करने के लिए डिप्लोमैटिक स्तर की बातचीत हुई, 7वें राउंड की मिलिट्री लेवल की चर्चा पर सहमति बनी

नई दिल्लीएक महीने पहले
भारत-चीन के बीच यह बैठक 20 अगस्त को वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (डब्ल्यूएमसीसी) के तहत हुई बैठक के बाद हुई। -फाइल फोटो
  • चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया- चीन-भारत के बीच डब्ल्यूएमसीसी के तहत 19वीं मीटिंग हुई
  • प्रवक्ता ने बताया कि भारत और चीन के बीच वार्ता के दौरान तनाव कम करने पर फोकस रहा
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लद्दाख में 5 महीने से भारत और चीन के बीच तनाव जारी है। इसे कम करने के लिए दोनों देशों के बीच डिप्लोमैटिक स्तर की वर्चुअल मीटिंग हुई। दोनों देशों ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर हालात की समीक्षा की। यह बैठक 20 अगस्त को वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (डब्ल्यूएमसीसी) के तहत हुई बैठक के बाद हुई है। दोनों देश सातवें राउंड की सैन्य कमांडरों की बैठक के लिए भी राजी हुए हैं और इसके लिए दोनों जल्द ही तारीख तय करने पर भी सहमत हैं।

बीजिंग में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वान्ग वेनबिन ने बताया कि चीन और भारत के बीच डब्ल्यूएमसीसी के तहत 19वीं मीटिंग हुई। दोनों देशों के बीच वार्ता के दौरान तनाव कम करने पर फोकस रहा। बैठक से जुड़े लोगों ने न्यूज एजेंसी को बताया कि दोनों देश उस 5 सूत्रीय एजेंडा को लागू करने का रास्ता खोज रहे हैं, जो 10 सितंबर को भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की मास्को में हुई मुलाकात के दौरान बनाया गया था।

विदेश मंत्रियों की मुलाकात के दौरान 5 सूत्रीय प्रस्ताव पर सहमति बनी थी
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच मास्को में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) के दौरान द्विपक्षीय वार्ता की थी। इस दौरान सीमा से जल्द से जल्द सेनाओं के डिसएंगेजमेंट पर सहमति बनी थी। इसके अलावा ऐसे एक्शन लेने से परहेज बरतने पर भी दोनों देश राजी हुए थे, जिससे तनाव बढ़ता हो।

1959 की एलएसी के समझौते पर भारत-चीन में बयानबाजी
चीन के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में कहा था कि 1959 में भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को चीन के लीडर झोऊ एनलाई ने एलएसी का प्रस्ताव भेजा था और हम आज भी उस एलएसी को मानते हैं।

भारत ने मंगलवार को ही साफ शब्दों में चीन से कह दिया था कि हमने कभी की 1959 में चीन द्वारा एकतरफा तरीके से तय की गई एलएसी को नहीं माना है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि दोनों देशों के बीच एलएसी पर सहमति बनाने की प्रक्रिया वास्तव में 2003 तक चली। लेकिन, इसके बाद यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई, क्योंकि चीन ने इसे आगे बढ़ाने में कोई दिलचस्पी नहीं ली।

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