हिंदी दिवस विशेष / दक्षिण का एक मात्र हिंदी गांव पल्लीपुरम; जहां पंचायत ने ही सभी के लिए हिंदी सीखना अनिवार्य किया

पल्लीपुरम ग्राम पंचायत अगले दो साल में 20 हजार लोगों को सिखाएगी हिंदी।

  • मलयाली भाषी उत्तर प्रदेश या बिहार से आने वाले मजदूरों से हिंदी सीख रहे हैं
  • ऐसा इसलिए ताकि दूसरे प्रदेशों से आने वाले मजदूरों से बातचीत सहजता से की जा सके

Dainik Bhaskar

Sep 14, 2019, 12:12 PM IST

कोच्चि (बाबू के पीटर).किसी दूसरे प्रदेश या देश जाकर वहां की भाषा सीखना आम बात है,लेकिन केरल में ऐसा नहीं है। यहां के मलयाली भाषी उत्तर प्रदेश या बिहार से आने वाले मजदूरों से हिंदी सीख रहे हैं। सूबे की पल्लीपुरम ग्राम पंचायत में सभी के लिए हिंदी सीखना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के साथ एक अभियान चलाया जा रहा है।

पंचायत के क्षेत्राधिकार में रहने वाले सभी परिवार हिंदी बोलना सीख रहे हैं। ऐसा इसलिए ताकि दूसरे प्रदेशों से आने वाले मजदूरों से बातचीत सहजता से की जा सके। पंचायत वयस्कों को 52 हफ्तों का प्रशिक्षण दे रही है।

बच्चों के लिए हिंदी का प्रशिक्षण नि:शुल्क

बच्चों के लिए हिंदी का प्रशिक्षण नि:शुल्क है। पल्लीपुरम पंचायत के अध्यक्ष पीआर हरिकुट्टन बताते हैं, ‘आवेदक को प्रशिक्षण के तहत 52 कक्षाएं लेनी होती हैं। एक परीक्षा भी हाेती है, जिसके बाद प्रमाण पत्र मिलता है।’ वे कहते हैं, ‘60 लोगों का पहला समूह पास हो चुका है। ये सभी अब अपने पड़ोसियों और नजदीकी पंचायत के लोगों को प्रशिक्षण देंगे। इस तरह आसपास की सभी पंचायतें और रहने वाला हरेक स्त्री-पुरुष हिंदी सीख लेगा। हमारी कोशिश है कि पल्लीपुरम के 17 वार्डों में रहने वाले 7850 परिवारों के करीब 20 हजार लोग अगले दो साल में हिंदी में बात करने लगें।’

राज्य में 35 लाख गैर मलयालम भाषी मजदूर

हिंदी के प्रति इस लगाव के पीछे वजह भी है। दरअसल, पल्लीपुरम पंचायत अलपुझा जिले का औद्योगिक केंद्र है। यहां सूचना-प्राैद्योगिक केंद्र और केरल राज्य औद्योगिक विकास निगम का प्रशिक्षण केंद्र है। नए उद्योग भी यहां पहुंच रहे हैं। अभी यहां करीब 1000 उत्तर भारतीय मजदूर हैं और जल्द ही संख्या बढ़ेगी। कोच्चि के प्रवास और समग्र विकास केंद्र के कार्यकारी निदेशक बेनॉय पीटर कहते हैं, ‘इस पहल से स्थानीय लोगों से संवाद बेहतर होगा।’ राज्य सरकार के आंकड़े देखें तो केरल में 2018 में तकरीबन 35 लाख बाहरी मजदूर काम कर रहे हैं। इनमें हिंदी भाषी भी शामिल हैं।

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