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खड़गे का मोदी को पत्र/ अंतरिम सीबीआई चीफ की नियुक्ति अवैध, चयन समिति की बैठक तुरंत बुलाएं

Dainik Bhaskar | Jan 15, 2019, 03:04 PM IST
मल्लिकार्जुन खड़गे
-- पूरी ख़बर पढ़ें --

  • खड़गे ने लिखा- आलोक वर्मा को निदेशक पद से हटाने के लिए हुई बैठक की जानकारी सार्वजनिक करें
  • खड़गे ने कहा-सरकार की प्रतिक्रिया बताती है वह 'स्वतंत्र' निदेशक की नियुक्ति को लेकर डरी हुई है
  • मोदी की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार चयन समिति ने 10 जनवरी को सीबीआई चीफ वर्मा को हटा दिया था

Dainik Bhaskar

Jan 15, 2019, 03:04 PM IST

नई दिल्ली. कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा। इस खत में उन्होंनेनागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिमचीफ बनाए जाने को अवैध बताया।खड़गे ने नएसीबीआई चीफ नियुक्त करने कोलेकरजल्द मीटिंग बुलाए जाने की मांग भी की। खड़गे ने पूर्व सीबीआई चीफआलोक वर्मा परकेंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) औरजस्टिस (रिटायर्ड) एके पटनायक रिपोर्ट को भी सार्वजनिक करने को कहा।

खड़गे ने लिखा, ''सरकार की प्रतिक्रिया बताती है कि वह सीबीआई में किसी 'स्वतंत्र' निदेशक की नियुक्ति को लेकर डरी हुई है। सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्ट होना चाहिए। सरकार को10 जनवरी को हुई सिलेक्शन कमेटी की बैठक की जानकारी भी सार्वजनिक करनी चाहिए।"

चयन समिति ने 2:1 से लिया था वर्मा को हटाने का फैसला

प्रधानमंत्री मोदीकी अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार चयन समिति ने 10 जनवरी को सीबीआई चीफ आलोक वर्मा को हटा दिया था। रिश्वतखोरी और कर्तव्य निवर्हन में लापरवाही के आरोपों के आधार पर उन्हें हटाने का फैसला हुआ था। समिति ने 2:1 से यह निर्णय लिया। मोदी और समिति के दूसरे सदस्य सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एके सीकरी वर्मा को हटाए जाने के पक्ष में थे। वहीं, समिति के तीसरे सदस्य और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे सीबीआई चीफ को हटाए जाने के खिलाफ थे। खड़गे ने समिति को अपना विरोध पत्र भी सौंपा था।

वर्मा का सीबीआई में कार्यकाल 31 जनवरी को खत्म हो रहा था। 1979 की बैच के आईपीएस अफसर वर्मा को अब सिविल डिफेंस, फायर सर्विसेस और होम गार्ड विभाग का महानिदेशक बनाया गया था। वहीं, नागेश्वर राव को दोबारा सीबीआई के अंतरिम चीफ बनाया गया। लेकिन आलोक वर्मा ने एक दिन बाद ही इस्तीफा दे दिया था।

वर्मा-अस्थाना में हुआ था विवाद
दरअसल, वर्मा और जांच एजेंसी में नंबर-2 अफसर राकेश अस्थाना के बीच विवाद के बाद केंद्र सरकार ने दोनों को छुट्टी पर भेज दिया था। फैसले के खिलाफ वर्मा की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 76 दिन बाद बहाल किया था। साथ ही कहा कि उच्चाधिकार चयन समिति ही वर्मा पर लगे आरोपों के बारे में फैसला करेगी।

सीबीआई में पहली बार दो बड़े अफसरों के बीच लड़ाई शुरू हुई थी

2016 में सीबीआई में नंबर दो अफसर रहे आरके दत्ता का तबादला गृह मंत्रालय में कर अस्थाना को लाया गया था। दत्ता भावी निदेशक माने जा रहे थे। लेकिन गुजरात कैडर के आईपीएस अफसर राकेश अस्थाना सीबीआई के अंतरिम चीफ बना दिए गए। अस्थाना की नियुक्ति को वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। इसके बाद फरवरी 2017 में आलोक वर्मा को सीबीआई चीफ बनाया गया। सीबीआई चीफ बनने के बाद आलोक वर्मा ने अस्थाना को स्पेशल डायरेक्टर बनाने का विरोध कर दिया। उन्होंने कहा था कि अस्थाना पर कई आरोप हैं, वे सीबीआई में रहने लायक नहीं हैं। अस्थाना स्पेशल डायरेक्टर बनाए गए। लेकिन मीट कारोबारी मोइन कुरैशी से जुड़े एक मामले की जांच के बाद अस्थाना और वर्मा ने एकदूसरे पर रिश्वतखोरी के आरोप लगाए।