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संघ/ अयोध्या में जल्द ही राम मंदिर बनना चाहिए, वह चाहे जैसे बने: मोहन भागवत

भागवत ने दिल्ली में आरएसएस के कार्यक्रम को संबोधित किया।

  • आरएसएस प्रमुख ने कहा- गोरक्षा केवल कानून से नहीं होगी
  • मोहन भागवत ने कहा- राम मंदिर जल्द बनाना चाहिए
  • अंतरजातीय विवाहों पर भागवत ने कहा- संघ इसके खिलाफ नहीं
  • कहा- एलजीबीटीक्यू को अलग-थलग नहीं कर सकते, वे समाज का हिस्सा 

Dainik Bhaskar | Sep 27, 2018, 12:34 PM IST

नई दिल्ली. आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण जल्द होना चाहिए, फिर वह चाहे जैसे बने। इस पर न तो राजनीति और न ही देरी होनी चाहिए। अगर यह आपसी सहमति और शांतिपूर्ण तरीके से होगा तो हिंदुओं और मुसलमानों के बीच हमेशा के लिए विवाद भी खत्म हो जाएगा। उन्होंने ये भी कहा कि गोरक्षा समेत किसी भी मुद्दे पर कानून हाथ में लेना गलत और अपराध है। ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। भागवत दिल्ली में हुए आरएसएस के तीन दिन के सम्मेलन के समापन अवसर पर बोल रहे थे।Advertisement

गाय को परिवार का हिस्सा बनाया जाए: संघ प्रमुख

  1. भागवत ने कहा कि संघ प्रमुख होने के नाते मैं कह सकता हूं कि राम बहुसंख्यक हिंदुओं के भगवान हैं। लेकिन कई लोग उन्हें भगवान न मानकर पितृपुरुष मानते हैं। राम मंदिर देश की एकता और अखंडता को बढ़ाएगा।

    भागवत ने कहा कि संघ प्रमुख होने के नाते मैं कह सकता हूं कि राम बहुसंख्यक हिंदुओं के भगवान हैं। लेकिन कई लोग उन्हें भगवान न मानकर पितृपुरुष मानते हैं। राम मंदिर देश की एकता और अखंडता को बढ़ाएगा।

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  2. संघ प्रमुख ने कहा कि गोरक्षा तो होनी चाहिए। संविधान का भी मार्गदर्शक तत्व है तो उसका पालन भी करना चाहिए। लेकिन गोरक्षा केवल कानून से नहीं होती। कई लोग इस मुद्दे पर काम कर रहे हैं कि कैसे गाय को तकनीक का इस्तेमाल करते हुए रोजमर्रा की जिंदगी और हर परिवार का हिस्सा बनाया जाए। ऐसा विचार रखने वाले लोग गो-संरक्षण और समाज की बेहतरी की बात करते हैं। ऐसे लोग मॉब लिंचिंग में शामिल नहीं हैं।

  3. भागवत ने कहा कि हिंदुत्व को लेकर विरोध नहीं बढ़ रहा, बल्कि दुनियाभर में इसकी स्वीकार्यता बढ़ रही है। भागवत ने कहा कि संघ अंग्रेजी समेत किसी भी भाषा के विरोध में नहीं है, लेकिन उनका अपना स्थान होना चाहिए। ऐसी भाषा किसी भारतीय भाषा का स्थान नहीं ले सकती।

  4. आरएसएस प्रमुख ने यह भी कहा कि संघ अंतरजातीय विवाह के खिलाफ नहीं है। यह मुद्दा सीधे तौर पर एक महिला और एक पुरुष के विचारों के आपस में मेल खाने का है। अगर अंतरजातीय विवाहों पर जनमत संग्रह कराया जाए तो ज्यादातर संघ के लोग ऐसे निकलेंगे जिन्होंने अंतरजातीय विवाह किया है। स्वयंसेवकों में अंतरजातीय विवाह आम बात है। 

  5. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में पहला अंतरजातीय विवाह 1942 में हुआ था। ऐसा विवाह करने वालों को कई बधाई संदेश मिले थे। एक-एक संदेश बाबा साहेब अांबेडकर और गुरुजी (गुरु गोलवलकर) ने भी भेजा था। तब गुरुजी ने कहा था कि आप सिर्फ शारीरिक आकर्षण के कारण विवाह नहीं कर रहे, आप यह संदेश भी देना चाहते हैं कि हर कोई समान है।

  6. भागवत ने कहा कि हमने एक नीति का समर्थन जरूर किया है और हमारी नीति के समर्थन करने का लाभ यह मिला कि हमारी शक्ति बढ़ी है। वैसे ही शक्ति इसका समर्थन करने वाले राजनीतिक दलों को भी मिल सकती है। जो इसका लाभ ले सकता है, वो ले जाता है। हमने इमरजेंसी का विरोध किया। इमरजेंसी के खिलाफ अनके दलों के नेता थे। उनमें बाबू जगजीवन राम भी थे। हमने ऐसा विचार नहीं किया कि इसका लाभ जनसंघ को ही मिले। हम राजनीति नहीं करते।

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