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महाअष्टमी पर मंदिरों से रिपोर्ट:मैहर में 50 हजार से ज्यादा भक्तों ने मां शारदा के दर्शन किए, दूसरे राज्यों में कम दर्शनार्थी

एक महीने पहले
मध्य प्रदेश के मैहर में तड़के 4 बजे से ही देवी मां के मंदिर के पट खोल दिए गए। दर्शनों के लिए लोगों की कतार सीढ़ियों से नीचे तक देखी जा सकती है।
  • मध्य प्रदेश के अलावा दूसरे राज्यों में ज्यादातर बड़े मंदिर कोरोना की वजह से बंद हैं
  • जो मंदिर खुले भी हैं, उनमें पहले के मुकाबले काफी कम संख्या में लोग दर्शन को पहुंचे हैं
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आज नवरात्र का 8वां दिन यानी महाअष्टमी है। पहले की तरह न भव्य पंडाल हैं, न देवी मां की बड़ी प्रतिमाएं, न मेले ...लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था परवान पर है। खासकर मध्य प्रदेश के मंदिरों में कोरोना पर भक्ति भारी है। हालांकि, दूसरे राज्यों में ज्यादातर मंदिर बंद हैं। जो खुले भी हैं, उनमें पहले के मुकाबले दर्शनार्थियों की संख्या कम है। पढ़ें देश के कुछ ऐसे ही प्रसिद्ध देवी मां के मंदिरों से भास्कर की यह रिपोर्ट...

मां शारदा का धाम मैहर
मैहर मध्य प्रदेश के सतना जिले में है। यहां त्रिकूट पर्वत पर मां शारदा विराजमान हैं। देवी मां के दरबार में तड़के 4 बजे से ही भक्त आना शुरू हो गए। दोपहर होते-होते एक अनुमान के मुताबिक 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु मां के दर्शन कर चुके हैं। मैहर धाम में पुजारी सुमित महाराज ने बताया कि महाष्टमी पर सुबह 3.30 से 4 बजे तक विशेष पूजन हुआ। इसके बाद देवी मां के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। रात 8.30 बजे शयन आरती के बाद पट बंद कर दिए जाते हैं, लेकिन भक्तों का आना जारी रहेगा तो पट खुले रखेंगे।

सलकनपुर की बीजासन माता
मध्य प्रदेश में सलकनपुर में बीजासन माता विराजमान हैं। हर साल अष्टमी और नवमी पर यहां दर्शनार्थियों की संख्या 1 लाख तक रही है। इस बार कोरोना की वजह से भक्तों की संख्या कम है, लेकिन सुबह 9 बजे तक 20 हजार से ज्यादा श्रद्धालु माता के दर्शन कर चुके हैं। शाम तक यह संख्या 50 हजार से ज्यादा पहुंचने की संभावना है। महंत प्रभुदयाल शर्मा ने बताया कि सुबह 5.30 बजे आरती के साथ ही मंदिर के पट खोल दिए गए हैं।

करौली की राजराजेश्वरी माता
राजस्थान के करौली में राजराजेश्वरी कैला मां मंदिर भी देवी मां के प्रसिद्ध स्थलों में से एक है। यहां करीबी राज्यों से भी भक्त मां के दर्शन को पहुंचे हैं। कैला देवी मंदिर ट्रस्ट प्रबंधक महेश चंद शर्मा व्यवस्थाओं को संभाले हुए हैं। उन्होंने बताया- भक्त मां के दर्शन को आ रहे हैं, लेकिन पहले के मुकाबले भीड़ कम है। उधर, शेखावाटी की शक्ति पीठ जीण माता का दरबार इस बार आम भक्तों के लिए बंद रखा गया है। इस बार माता को पारंपरिक भोग भी नहीं लगा। पुजारी राकेश पाराशर ने बताया कि देवी मां को कोलकाता और कानपुर से आई पोशाक पहनाई गई है। आम भक्तों को देवी मां के ऑनलाइन दर्शन कराए जा रहे हैं।

काशी का कामाख्या मंदिर
वाराणसी (उत्तर प्रदेश) के कामाख्या मंदिर में इस बार अष्टमी पर पहले की तरह भीड़ नहीं है। मंदिर में दर्शन के लिए भोर में मंगल आरती के बाद ही पट खोल दिए गए थे। मंदिर के बाहर फूल-माला की दुकानों पर भी इक्का-दुक्का लोग ही नजर आए। फूल बेचने वाले छोटू ने बताया- इस बार अष्टमी में बिल्कुल भीड़ नहीं हुई है। भक्तों की भीड़ होती थी, तो दुकानदारी होती थी। इस बार पता ही नहीं चला कि नवरात्र है। पुजारी देवेंद्र पूरी ने बताया कि इस बार कोरोना ने मानो भक्तों के पांव को घरों में ही रोक दिया हो।

झारखंड का छिन्नमस्तिका मंदिर
झारखंड में रजरप्पा स्थित छिन्नमस्तिका मंदिर में भी सुबह से भीड़ है। पुजारी असीम पंडा ने बताया मंदिर में दूसरे राज्यों के भी भक्त सुबह से माता के दर्शन करने आ रहे हैं। मंदिर जंगल में पहाड़ों के बीच है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर के बाहर पूजन सामग्री और फूल-मामला बेचने वाले दुकानदार भी खुश हैं। उन्हें उम्मीद है कि शाम तक उनकी अच्छी बिक्री हो जाएगी।

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