सुप्रीम कोर्ट / मस्जिदों में मुस्लिम महिलाओं के प्रवेश को लेकर याचिका दाखिल

  • याचिकाकर्ता मुस्लिम दंपत्ती ने कहा-मस्जिदों में जाना और नमाज अदा करना महिलाओं कामौलिक अधिकार
  • याचिका मेंदावा- कुरान में कहीं भी मस्जिदों में मुस्लिम महिलाएं के प्रवेश पर रोक का जिक्र नहीं

Dainik Bhaskar

Apr 15, 2019, 08:50 PM IST

नई दिल्ली. मस्जिदों में मुस्लिम महिलाओं के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को याचिका दाखिल की गई। याचिकाकर्ता मुस्लिम दंपत्ती ने कहा कि मस्जिदों में जाना और नमाज अदा करना उनका मौलिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि मस्जिदों में महिलाओं को जाने से रोकना गैरकानूनी और असंवैधानिक है।

'इन प्रथाओं से महिलाओं के आत्मसम्मान को ठेस'

  1. याचिकाकर्ता के वकिल आशुतोष दुबे ने कहा कि इस तरह की प्रथाओं से महिलाओं के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचता है। साथ ही यह उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिका में केंद्र सरकार, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय, केंद्रीय वक्फ परिषद, महाराष्ट्र राज्य वक्फ बोर्ड और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को पक्षकार बनाया गया है।

  2. याचिका में कहा गया है कि कुरान में कहीं भी इसका जिक्र नहीं है कि मस्जिदों में महिलाएं प्रवेश नहीं कर सकती हैं। महिला और पुरुष को उनके आस्था के आधार पर पूजा या इबादत करने का पूरा अधिकार है। वर्तमान में महिलाओं को जमात-ए-इस्लामी और मुजाहिद संप्रदाय के तहत मस्जिदों में नमाज अदा करने की अनुमति है। लेकिन, सुन्नी गुट में यह अधिकार नहीं है।

  3. याचिका में यह भी कहा गया है कि जिन मस्जिदों में महिलाओं को जाने की अनुमति है, वहां भी जेंडर के आधार पर अलग-अलग प्रवेश द्वार है और नमाज के लिए दीवार बनाए गए हैं। जेंडर के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। मुस्लिम महिलाओं को सभी मस्जिदों में प्रवेश की अनुमति दी जानी चाहिए।

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